बोल हरि बोल: मंत्री जी की पहली विदेशी यात्रा और साहब को मैडम से हुआ तगड़ा वाला प्यार

मध्यप्रदेश में इन दिनों मंत्री जी की पहली विदेश यात्रा, आईपीएस मीट में विवाद, और एक आईएएस अफसर का दिल मैडम पर आना चर्चाओं का विषय बन गया है। आज के बोल हरि बोल में पढ़िए मध्यप्रदेश की सियासत और नौकरशाही में कई दिलचस्प किस्से...

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Harish Divekar
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bol hari bol 18 january 2026 journalist harish divekar bhopal
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मध्यप्रदेश की सियासत और नौकरशाही में इस हफ्ते भी सब कुछ सरकारी नहीं रहा। कहीं दिल ने फाइलों से आगे बढ़कर फैसला ले लिया, तो कहीं अंदाज़-ए-बयां ने पुराने दिनों की याद दिला दी। कुल मिलाकर, यह हफ्ता ऐसा रहा… जिसने सत्ता और मंत्रालय के गलियारों को रोचक किस्सों से भर दिया।

एक तरफ एक आईएएस साहब का दिल एक मैडम पर आ गया है और यह मामला मंत्रालय से लेकर ड्रॉइंग रूम तक फुसफुसाहट का विषय बना हुआ है। दूसरी तरफ, मामा का अंदाज़-ए-बयां फिर चर्चा में है। कुछ लोगों को यह शैली पसंद आई है, तो कुछ इसे सियासी संकेत मान रहे हैं।

आईपीएस मीट में डॉक्टर साहब ने जो कहा, उसने भी अफसरों के बीच खूब कानाफूसी करवाई। वहीं, भोपाल के एक नेताजी अपने बयान की वजह से इस हफ्ते चर्चा से ज्यादा हंसी के पात्र बन गए हैं।

कुल मिलाकर, ये किस्से कहीं सत्ता को आईना दिखाते हैं, तो कहीं सिस्टम के भीतर की हलचल बताते हैं। तो आप भी ज्यादा ऊपर मत रुकिए, सीधे सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।

ऐसा स्वागत तो बनता है जी!

सूबे के एक माननीय पहली बार मंत्री बने हैं। अब सत्ता में दो साल रहने के बाद वे डॉक्टर साहब के साथ पहली बार विदेश यात्रा पर जा रहे हैं। ऐसे मौके रोज-रोज थोड़े ही आते हैं। मंत्री जी के चाहने वालों ने भी तय कर लिया कि खुशी मनानी है तो पूरे मन से मनाई जाए।

नतीजा ये हुआ कि गांव में मंत्री जी का जोरदार स्वागत किया गया। फूल-मालाएं, मिठाइयां और ढेर सारी शुभकामनाएं… मंत्री जी को गांव से ऐसे रवाना किया गया, जैसे वे किसी बड़े मिशन पर जा रहे हों।

कहते हैं, गांवों में आज भी परंपराएं जिंदा हैं। यहां छोटी-छोटी खुशियां भी बड़े उत्सव में बदल जाती हैं। मंत्री जी भी इस आत्मीयता से गदगद दिखे। उन्होंने गांव वालों के इस उत्साह के फोटो-वीडियो बाकायदा सोशल मीडिया पर डाले और दिल खोलकर आभार जताया। खैर, मंत्री जी को बधाई… आखिर ऐसा स्वागत तो बनता है जी!

ये तारीफ थी या कमेंट्स?

आईपीएस मीट में खाकी वर्दी के मुखिया ने प्रदेश में पुलिसिंग को लेकर लंबे-चौड़े कसीदे पढ़े। इसके बाद बारी थी डॉक्टर साहब के संबोधन की। उन्होंने माइक थामकर अपनी बात शुरू की।

उन्होंने सबसे पहले कहा कि मैं पुलिस के मुखिया के भाषण में विभाग की उपलब्धियों को सुनकर थोड़ी देर गफलत में पड़ गया था। मुझे समझ ही नहीं आया कि मैं आईपीएस मीट में आया हूं या पुलिस की किसी सरकारी मीटिंग में। इस पर सबने खुलकर ठहाका लगाया।

हालांकि डॉक्टर साहब ने तुरंत बात संभाली और वर्दी वाले साहब की तारीफ भी की, लेकिन असली गॉसिप यहीं से शुरू हुई। मीट खत्म होते-होते सीनियर से लेकर जूनियर आईपीएस तक आपस में कानाफूसी करने लगे कि डॉक्टर साहब ने तारीफ की थी या कमेंट किया है?

खैर, मंच पर सब मुस्कान में सिमट गया और बाहर निकलते-निकलते मामला भी। चलिए, फिलहाल तो यही मान लेते हैं कि अंत भला तो सब भला…।

खाकी वाले साहब का गीता ज्ञान

एक आईपीएस साहब इन दिनों बिल्कुल अलग अवतार में नजर आ रहे हैं। साहब ने सुबह की दिनचर्या में गीता के श्लोक शामिल कर लिए हैं।

सुबह-सुबह साहब गीता के श्लोकों का हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद करते हैं और फिर खुद की आवाज में रिकॉर्ड कर उसे व्हाट्सएप पर अपने खास लोगों को भेजते हैं। मजेदार बात यह है कि ये कोई भारी-भरकम प्रवचन नहीं होते, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी, तनाव और उलझनों से निकलने के आसान सूत्र होते हैं।

साहब का यह आध्यात्मिक अवतार लोगों को खूब भा रहा है। दफ्तर की टेंशन, फैसलों का दबाव और जीवन की दौड़… इन सबके बीच गीता ज्ञान को वे ऐसे परोस रहे हैं कि सुनने वाला भी खुद को थोड़ा हल्का महसूस करे।

अब पुलिस महकमे में कानाफूसी है कि साहब ने शायद समझ लिया है कि खाकी संभालने के लिए भी कभी-कभी कृष्ण का ज्ञान जरूरी होता है। वैसे, गीता की क्लास रोज चलेगी या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल साहब का अध्यात्म वाला अंदाज चर्चा में है।

IAS पर करम, IPS पर सितम!

प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक चर्चा जोर पकड़ रही है कि डॉक्टर साहब की तराजू आईएएस की तरफ ज्यादा झुकी नजर आ रही है। अंदरखानों की मानें तो इस बार सीआर की परीक्षा में आईएएस को अच्छे नंबर मिले हैं।

आपको बता दें कि जिन आईएएस अधिकारियों को प्रशासनिक मुखिया से उम्मीद के मुताबिक नंबर नहीं मिले थे, उनके अंक भी डॉक्टर साहब ने बढ़ा दिए हैं।

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू खाकी से जुड़ा है। चर्चा है कि आईपीएस अफसरों के साथ मामला ठीक उलटा रहा। वर्दी वाले बड़े साहब ने अपने अफसरों को जो नंबर दिए थे, डॉक्टर साहब ने उन पर कैंची चला दी। नतीजा यह हुआ है कि खाकी खेमे में हल्की बेचैनी और गहरी चुप्पी है

अब सच क्या है और गणित कैसे बैठा, यह तो आईपीएस अफसर ही बेहतर समझ पाएंगे। इतना तय है कि इन दिनों मंत्रालय से लेकर पुलिस मुख्यालय तक एक ही सवाल तैर रहा है कि ये क्या डॉक्टर साहब का कोई मैसेज है?

मामा का अंदाज-ए-बयां…

मामा अपने सौम्य और सहज स्वभाव के लिए पहचान रखते हैं, लेकिन विदिशा में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने जो हुआ, उसे मामा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।

जी हां, मामा ने मंच से कहा कि लोग विदिशा के गड्ढों के साथ मेरी फोटो डाल रहे हैं। इस पर एक पल के लिए तो मानो सनाका खिंच गया। फिर डॉक्टर साहब ने जवाब में कहा कि जो भी आपने मांगा है, सब दे देंगे। सरकार आपके साथ है।

बात यहीं नहीं थमी। जब मामा भाषण दे रहे थे, तब एक माननीय डॉक्टर साहब से बात कर रहे थे। यह देखकर मामा ने कहा कि आप डिस्टर्ब मत कीजिए… अभी हम बोल रहे हैं। इसके जवाब में माननीय ने कहा कि मैं डिस्टर्ब नहीं कर रहा। मैं तो आपके ही सपोर्ट में बोल रहा था।

विदिशा के इस घटनाक्रम को मामा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके पीछे वजह यह है कि मामा का अंदाज उनके स्वभाव के उलट था। अब इसके और क्या मायने हैं, ये तो मामा और डॉक्टर साहब ही जानें, लेकिन लगता है कि कोई मैसेज देने की कोशिश की गई है।

साहब का दिल बेकरार हुआ!

इन दिनों राजधानी में एक आईएएस अफसर की प्रेम-कहानी सुर्खियां बटोर रही है। सचिव स्तर के ये साहब दिल के मामले में ज्यादा ही आगे निकल गए हैं।

उनकी इस प्रेम कहानी की शुरुआत बिल्कुल प्रोफेशनल थी। काम-काज के सिलसिले में साहब की मैडम से मुलाकात हुई और दोनों एक-दूसरे को दिल दे बैठे। साहब मलाईदार कुर्सी पर विराजमान हैं। वहीं, मैडम संभ्रांत परिवार की बहू हैं। उनके परिवार का नाम अपने आप में ब्रांड है। उनका एक फेमस अस्पताल है। ऊपर से यह परिवार नामी कंपनी का सैलून भी चलाता है।

मैडम खुद भी कोई साधारण प्रोफाइल नहीं रखतीं। वे एक बड़ी कंसल्टेंसी में ओहदे पर हैं। बस, ये कहानी भी उसी तरह आगे बढ़ी, जैसे होता है। फाइलों के बीच साहब और मैडम की नजरें मिलीं। मीटिंग्स बढ़ीं और वही कहानी… आंखें चार हुईं, दिल बेकरार हुआ।

अब साहब और मैडम के अफेयर की चर्चा मंत्रालय से लेकर हाई-प्रोफाइल ड्रॉइंग रूम तक पहुंच गई है। अब ये साहब कौन हैं, उनका नाम जानने के लिए थोड़ी मेहनत आप भी कीजिए।

नेताजी का ये बयान भी…

नंबर बढ़ाने के चक्कर में नेता क्या-क्या बोल जाते हैं, इसका ताजा नमूना राजधानी में देखने को मिला है। एक माननीय का बयान इन दिनों राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चा में है।

उन्होंने यहां तक कह दिया कि जब वे मेयर थे, तब एक अधिकारी उन्हें हटाने की कोशिश कर रहा था। अब नेताजी शायद ये भूल बैठे कि मेयर को हटाने का अधिकार किसी अफसर के पास होता ही नहीं। लेकिन बयान तो दे दिया गया… वो भी पूरे आत्मविश्वास के साथ।

ऐसे में सुनने वाले पहले चौंके, फिर मुस्कराए और बाद में कानाफूसी शुरू हो गई। मामला भोपाल स्लॉटर हाउस से जुड़ा है। उसी संदर्भ में नेताजी भावनाओं में कुछ ज्यादा ही आगे निकल गए। हालांकि दिलचस्प बात ये रही कि उन्होंने जिस अफसर का जिक्र किया था, उसका नाम बताने से परहेज किया।

खीर में साथ, महेरी में न्यारे

आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी- खीर में साथ और महेरी में न्यारे। यही हाल इन दिनों इंदौर का है। शहर संकट से जूझ रहा है, लेकिन सियासी मैदान में खामोशी है।

जिन नेताओं को उपलब्धियों के मंच पर फोटो खिंचवाते देखा जाता है, वही मुश्किल घड़ी में नजर नहीं आ रहे हैं। घटनाक्रम के बीच सांसद महोदय सिर्फ राहुल गांधी के दौरे के दौरान क्षणिक नारेबाजी तक ही सीमित रहे। साथ में मेयर पुष्यमित्र भार्गव भी नजर आए, लेकिन पूरा दृश्य किसी मजबूत हस्तक्षेप से ज्यादा कोरम पूरा करने जैसा था।

सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला की गैरहाजिरी की है। जल त्रासदी और स्वास्थ्य संकट के बीच उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। मंत्री तुलसी सिलावट ने भी इस मामले में दूरी बनाए रखी है। विधायक गोलू शुक्ला, मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, मनोज पटेल और उषा ठाकुर जैसे तमाम नाम भी कटे-कटे नजर आ रहे हैं।

शहर पूछ रहा है कि ये नेता संकट में कहां हैं? हालांकि इस सन्नाटे के बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जरूर कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये देने का ऐलान किया है।

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