बोल हरि बोल : मैडम के तीखे तेवर, डॉक्टर साहब की फटकार और वो दिल्ली वाली मुलाकात!

Harish Divekar | Apr 19, 2026, 13:59 IST
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मध्य प्रदेश की सत्ता गलियारों में इन दिनों एक अजीब सी हलचल देखने को मिल रही है। मंत्री से लेकर अफसरों तक, सबकी कुर्सी खतरे में है। यहां सियासत के खेल और सख्त सवालों के बीच सत्ता के बड़े फैसले सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...

Bhopal. मध्यप्रदेश में प्रचंड गर्मी का दौर शुरू हो गया है। इसी के साथ सत्ता और सिस्टम के गलियारों में भी पारा चढ़ा हुआ है। इस बीच एक मंत्री जी की चिट्ठी खूब सुर्खियां बटोर रही है। वहीं, मैडम के तेवर के किस्से भी कम नहीं हैं। तो एक माननीय की दिल्ली वाली मुलाकात से उनके विरोधियों के सीने पर सांप लोट रहे हैं।



सत्ता के गलियारों की कहानियां कई हैं, आप तो सीधे नीचे उतर आइए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।



डॉक्टर साहब के सवाल ने खोली पोल!

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मंत्रालय की हाई-प्रोफाइल बैठक में उस वक्त माहौल अचानक बदल गया, जब सब बढ़िया है वाले प्रेजेंटेशन पर डॉक्टर साहब के एक सीधे सवाल ने पूरी कहानी उलट दी। अफसरों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ बताया कि जल गंगा और जल संचय भागीदारी अभियान में मध्य प्रदेश देश में अव्वल चल रहा है। आगे बढ़ते हुए उन्होंने यह भी जोड़ा कि जल संवर्धन में डिंडोरी पहले नंबर पर है और खंडवा दूसरे स्थान पर चमक रहा है।



सब कुछ तालियों के लायक लग ही रहा था कि तभी डॉक्टर साहब ने स्लाइड को बीच में रोक दिया। उन्होंने पूछा कि जब खंडवा देश में दूसरे नंबर पर है, तो इसी प्रेजेंटेशन में पीएचई की नल-जल योजना में वह सबसे नीचे कैसे दिख रहा है?



बस, फिर क्या था… कमरे में अचानक सन्नाटा पसर गया। कुछ पल पहले जो आंकड़े शान से चमक रहे थे, वही अब सवालों के घेरे में खड़े नजर आए।



खंडवा कलेक्टर ने स्थिति संभालने की कोशिश की। सफाई आई कि पीएचई के ईई की वजह से डेटा फीड नहीं हो पाया। लेकिन मुख्यमंत्री ने तुरंत पूछा, तो इसका मतलब आपको खुद भी असली स्थिति का अंदाजा नहीं था?



इस एक लाइन ने पूरी बैठक की हवा निकाल दी। अफसरों ने बात को घुमाने और संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन तब तक मामला हाथ से फिसल चुका था। कहावत याद आ गई- दूध में मक्खी गिर जाए तो उसे निकालने से भी स्वाद वापस नहीं आता।



असल में, गलियारे की फुसफुसाहट कुछ और ही कहानी कहती है। यहां एक अनकहा नियम चलता है कि जो अफसर जितनी चमकदार आंकड़ेबाजी कर ले, उसकी उतनी ही जोरदार वाहवाही होती है। जमीन पर हालात कैसे हैं, यह बाद की बात है; प्रेजेंटेशन के रंग और ग्राफ ही असली खेल तय करते हैं।



मैडम को भी विपश्यना भेज दो…

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मंत्रालय के गलियारों में इन दिनों एक एसीएस मैडम के तेवर चर्चा में हैं। हाल की कई बड़ी बैठकों में उनका अंदाज इतना सख्त रहा कि मैदान से लेकर मंत्रालय तक अफसरों के पसीने छूटते नजर आए। जूनियर आईएएस हों या सीनियर… मैडम किसी की भी समझ पर सवाल उठाने से नहीं हिचकतीं।



मैडम हर बैठक में पूरी तैयारी के साथ आती हैं। एजेंडे के किसी एक बिंदु को पकड़ती हैं और वहीं से ऐसे सवाल दागती हैं कि पूरे विभाग की पेशानी पर बल आ जाएं। नतीजा यह होता है कि प्रेजेंटेशन के रंग फीके पड़ जाते हैं और माहौल थोड़ा भारी हो जाता है।



अब हाल यह है कि बैठक के बीच ही अफसरों के बीच फुसफुसाहट सुनाई देने लगी है कि मैडम को भी विपश्यना भेज दो, शायद थोड़ा सुकून मिल जाए! दिलचस्प बात यह है कि पहले यह तंज सिर्फ ‘साहब’ के लिए इस्तेमाल होता था, अब मैडम भी उसी लिस्ट में शामिल हो गई हैं। वैसे, मैडम की काबिलियत और ईमानदारी पर किसी को शक नहीं… बस तेवर थोड़े नरम हो जाएं तो तस्वीर और भी बेहतर हो सकती है।



साहब कब बन गए डॉक्टर?

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मंत्रालय के गलियारों में इन दिनों नए डॉक्टर साहब की एंट्री ने सबको चौंका दिया है। मामला यह है कि एक प्रमोटी आईएएस अफसर ने अचानक अपने नाम के आगे डॉक्टर जोड़ लिया है। अब बाकी अफसरों के बीच कानाफूसी शुरू हो गई है कि “भई, ये डिग्री कब और कहां से ले आए?



जिज्ञासा बढ़ी तो खोजबीन भी हुई, इसमें पता चला है कि किसी निजी संस्था ने उन्हें मानद उपाधि से नवाजा है। बस, तभी से साहब ने डॉक्टर को अपने नाम का स्थायी हिस्सा बना लिया है।



मजेदार बात यह है कि खुद साहब को भी नियम-कायदे पता हैं कि मानद उपाधि को इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाता। मगर दिखावे की इस दौड़ में नियम अक्सर फाइलों में ही रह जाते हैं।



अब खाकी में होगी सर्जरी…

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प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर उठते सवालों के बीच अब खाकी में बड़ी सर्जरी की तैयारी है। खबर है कि कई जिलों के कप्तानों को इधर से उधर करने की सूची लगभग तैयार है और इस बार फेरबदल छोटा नहीं, असरदार होने वाला है।



सूत्र बताते हैं कि सूबे के मुखिया खाकी के घटते खौफ से खासे नाराज हैं। साफ संकेत है कि मैदान में फिर से इकबाल कायम करना होगा। इसी के चलते लंबे समय से लंबित आईपीएस तबादलों को अब हरी झंडी मिलने वाली है। दिलचस्प यह है कि आईएएस की कई सूचियां आ चुकी हैं, लेकिन खाकी का मामला अब तक फंसा हुआ था।



हाल की कुछ घटनाओं और कई जिलों के कप्तानों की भूमिका पर उठे सवालों ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। अब चर्चा है कि इसी हफ्ते तबादलों की सूची सामने आ सकती है।



नजरें एक और दिलचस्प पहलू पर टिकी हैं- पीएचक्यू के प्रस्ताव में शामिल नामों में से आखिर कितनों पर मुहर लगती है। क्योंकि पिछले कुछ समय में कई प्रस्तावों के पलटने से अंदरखाने खासी हलचल रही है।



अब देखना है कि इस सर्जरी में कौन फिट बैठता है और किसकी कुर्सी खिसकती है…!



कांग्रेस में कुर्सी हलचल तेज…

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प्रदेश कांग्रेस में अंदरखाने बड़ी उठापटक की पटकथा लगभग तैयार मानी जा रही है। खबर है कि जिन आठ जिलों में प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा, वहां अब जिला अध्यक्षों की कुर्सी खतरे में है। सूची में निमाड़, बुंदेलखंड, मध्य और विंध्य अंचल के कुछ जिले शामिल हैं।



इस सुगबुगाहट ने संगठन में हलचल बढ़ा दी है। मौजूदा अध्यक्षों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं, तो दूसरी ओर दावेदारों की सक्रियता अचानक बढ़ गई है। हाल यह है कि पीसीसी दफ्तर में रोज नए-नए चेहरे अपनी टीम के साथ नजर आने लगे हैं। ‘गणेश परिक्रमा’ का दौर चल रहा है।



सिर्फ नीचे ही नहीं, ऊपर तक लॉबिंग तेज है। हर कोई अपने-अपने समीकरण साधने में जुटा है, ताकि जब सूची निकले तो नाम उसी के पक्ष में हो।



अब सबकी नजर उस लिस्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि किसकी कुर्सी जाएगी और किसकी किस्मत चमकेगी…!



एक मुलाकात… और बढ़ गई पावर की चर्चा!

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सूबे की सियासत में इन दिनों एक माननीय की बीजेपी के नंबर-2 से हुई मुलाकात खूब सुर्खियां बटोर रही है। एक तस्वीर सामने आई और बस... राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया है।



चर्चा यह है कि माननीय जिस मकसद से गए थे, शायद बात बन ही गई है। अब तो विरोधी भी तस्वीर में उनकी मुस्कान के मतलब निकालने में जुटे हैं... कौन-सा संकेत है, क्या संदेश है, सबकी अपनी-अपनी व्याख्या चल रही है।



उधर, समर्थकों का उत्साह सातवें आसमान पर है। उन्हें इस मुलाकात में आने वाले बड़े बदलाव की झलक दिख रही है। अंदरखाने तो यह तक कहा जा रहा है कि अब माननीय की नजर मंत्रिमंडल की कुर्सी पर है।



एक तस्वीर ने माननीय की राजनीतिक ताकत को नई चमक दे दी है… अब देखना यह है कि यह मुस्कान सिर्फ कैमरे तक रहती है या सत्ता के गलियारों में भी रंग दिखाती है!



वीआईपी भक्ति पर बवाल…

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सूबे के एक दिग्गज मंत्री जी इन दिनों अपनी एक चिट्ठी को लेकर सुर्खियों में हैं। मामला कुछ यूं है कि मंत्री जी ने दक्षिण के एक प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन के लिए सिफारिशी पत्र लिखा है, जिसमें अपने करीबी लोगों के लिए वीआईपी दर्शन की व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया है।



बस, जैसे ही यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हुई, प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने तंज कसा कि क्या अब भगवान के दरबार में भी वीआईपी एंट्री जरूरी हो गई? तो किसी ने सीधा सवाल दाग दिया कि जब आस्था सच्ची हो, तो लाइन में लगने में दिक्कत कैसी?



मामला अब सिर्फ एक चिट्ठी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वीआईपी कल्चर बनाम आम श्रद्धालु की भावना पर बहस छेड़ गया है। लोग कह रहे हैं कि भक्ति में बराबरी होनी चाहिए, यहां सिफारिश की जगह नहीं होनी चाहिए।



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