बोल हरि बोल: सम्मान कभी पोस्ट से नहीं मिलता साहब, रिश्ते कमाना पड़ते हैं…
Harish Divekar | Apr 05, 2026, 11:48 IST
bol hari bol 05 april 2026 journalist harish divekar bhopal
मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों आईएएस अफसरों की फीकी विदाई, पीएचक्यू की सख्ती और सत्ता के समीकरण काफी चर्चा में है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए इन घटनाओं के बारे में विस्तार से...
BHOPAL. सिस्टम के भीतर की कहानियां ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल से भी समझ आती हैं। इस हफ्ते मंत्रालय के गलियारों से लेकर पीएचक्यू के कमरों और नवग्रह मंदिर के प्रांगण तक से कई कहानियां सामने आई हैं। अफसरशाही की चमक के पीछे छिपा सच कई तस्वीरों में सामने आया।
कहीं 250 कुर्सियों वाले हॉल में सिर्फ 10 कुर्सियां भरीं तो कहीं रिटायर कर्मियों की विदाई में रिश्तों की गर्माहट ने प्रोटोकॉल को मात दे दी। उधर, मंत्रालय में बैठी एक सख्त मैडम ने खाकी की पुरानी आदतों पर ब्रेक लगाया। आज वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के इस लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol में बात इन्हीं चेहरों, किस्सों और इशारों की होगी…
तो 31 मार्च को मंत्रालय में एक ऐसी विदाई हुई, जो कहीं न कहीं हमारे सिस्टम की असलियत को बेनकाब कर गई। कहने को तो ये आईएएस अफसरों की विदाई पार्टी थी, लेकिन जब पार्टी शुरू हुई तो हॉल में बैठे सिर्फ 10 अफसर! हां! आपने सही सुना… 250 लोगों के बैठने की क्षमता वाले हॉल में 150 आईएएस अफसरों में से केवल 10 ही पहुंचे। अब आप सोच रहे होंगे, 150 अफसर कहां गए? सही सोचा आपने, बाकी सब शायद अपनी विदाई की ‘फॉर्मलिटी’ से बचने के लिए कहीं और व्यस्त थे।
जब इस स्थिति का सामना हुआ, तो पार्टी को तुरंत सीएस के एंटी-चेंबर में शिफ्ट किया गया। अब सोचिए, छोटी सी जगह में थोड़ी चहल-पहल और रौनक तो दिखनी चाहिए थी ना!
अब सबसे मजेदार हिस्सा ये था कि मंत्रालय में पदस्थ प्रमोटी आईएएस अफसरों ने भी इस विदाई पार्टी से अपनी दूरी बना ली। ये बात भी है कि प्रमोटेड आईएएस की विदाई में वही जो सुपर सीनियर का ट्रीटमेंट हो, वो तो नहीं होता। एक और बात, याद है न इकबाल सिंह को विदाई देने में सीएम ने मीटिंग का नोटिस तक जारी किया था! बड़ा पद, बड़ा ढंग, बड़ा स्पेस… पर लोग भी तो ऐसे ही जुड़े रहते हैं।
और फिर, दूसरी तरफ मंत्रालय में रिटायर हो रहे कर्मचारियों की विदाई पार्टी हुई। यहां का मंजर थोड़ा अलग था। कर्मचारी रिटायर हो रहे थे, और उनके रिश्तेदारों से लेकर मंत्रालय के साथी भी शामिल हुए थे।
पार्टी में कोई स्पेशल शिफ्ट नहीं थी। क्योंकि ये लोग बड़े पदों पर नहीं थे। लेकिन क्या मजा आया! उनके लिए विदाई एक शानदार पल बन गया। छोटी सी पोस्ट, लेकिन बड़ा दिल और लोगों का प्यार। कर्मचारियों को हर बार सम्मान मिलता है, क्योंकि वे हमेशा जमीन से जुड़े रहते हैं; दूसरों के सुख-दुख में जो खड़े रहते हैं।
मोरल ऑफ द स्टोरी: बड़े पद पर रहकर अगर आप जमीं से जुड़े नहीं रहते तो ऐसी विदाई ही होगी, जिसे सिर्फ एक फॉर्मलिटी भर माना जाएगा। और याद रखिए, सीनियर आईएएस अफसरों को भी अपनी विदाई खुद ही याद रखनी पड़ी, क्योंकि वे छोटी जगह से बहुत दूर जो हो चुके हैं।
अपर मुख्य सचिव के पद से रिटायर हुए साहब अपने पुनर्वास का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इन साहब का नाम नियामक आयोग जैसी संस्था के अध्यक्ष के लिए कमेटी फाइनल कर चुकी है, लेकिन आदेश है कि निकलता ही नहीं।
वैसे साहब बड़े ही शांत स्वभाव और धारा के साथ चलने वाले माने जाते हैं। लेकिन उनके समीकरण पूरी तरह से फिट नहीं बैठ पा रहे हैं। बताते हैं कि सूबे के मुखिया ने दूरदर्शी प्लान के चलते यह नियुक्ति होल्ड की है। आने वाले कुछ महीनों में कोई बड़ा अफसर रिटायर हो रहा है, शायद उन्हें इस पद पर पहला ऑफर दिया जा सकता है।
मंत्रालय में बैठने वाली मैडम की सख्ती से खाकी के आला अफसर खासे परेशान हैं। दरअसल अब तक पीएचक्यू अपने मनमाने तरीके से सरकार में काम करवा लेता था। लेकिन जब से मैडम ने मंत्रालय में पीएचक्यू के काम की कमान संभाली है, तब से खाकी वाले साहब लोगों के गणित गड़बड़ा गए हैं।
मैडम के आगे उनकी एक नहीं चल रही। बताते हैं कि खाकी वालों ने इशारों में समझाया कि आईएएस की बातों में न आओ, आपको आना तो लौटकर अपनी बिरादरी में ही है। मैडम का एक ही राग है- सही काम रुकेगा नहीं, गलत काम आगे बढ़ेगा नहीं।
पंडितजी के धैर्य और जीवटता को मानना पड़ेगा। जब उनके राजनीतिक करियर में लंबा अंधकार दिखाई दे रहा था, तब पंडितजी ने चाणक्य का साम, दाम, दंड और भेद का फार्मूला अपनाकर अंधकार भरे राजनीतिक करियर में रोशनी की अलख जला दी। अब बस मंजिल थोड़ी दूर ही बची है।
दरअसल पंडितजी ने प्रदेश का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर बनाकर अपने कमजोर ग्रहों को मजबूत करके अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त दे दी। अब देखना यह है कि पंडितजी के स्ट्रीमलाइन में आने के बाद यह तंत्र-मंत्र वाला फार्मूला क्या उन्हें प्रदेश के शीर्ष पद तक ले जा सकता है?
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कहीं 250 कुर्सियों वाले हॉल में सिर्फ 10 कुर्सियां भरीं तो कहीं रिटायर कर्मियों की विदाई में रिश्तों की गर्माहट ने प्रोटोकॉल को मात दे दी। उधर, मंत्रालय में बैठी एक सख्त मैडम ने खाकी की पुरानी आदतों पर ब्रेक लगाया। आज वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के इस लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol में बात इन्हीं चेहरों, किस्सों और इशारों की होगी…
आईएएस की फीकी विदाई और कर्मचारियों की जश्न वाली!
जब इस स्थिति का सामना हुआ, तो पार्टी को तुरंत सीएस के एंटी-चेंबर में शिफ्ट किया गया। अब सोचिए, छोटी सी जगह में थोड़ी चहल-पहल और रौनक तो दिखनी चाहिए थी ना!
अब सबसे मजेदार हिस्सा ये था कि मंत्रालय में पदस्थ प्रमोटी आईएएस अफसरों ने भी इस विदाई पार्टी से अपनी दूरी बना ली। ये बात भी है कि प्रमोटेड आईएएस की विदाई में वही जो सुपर सीनियर का ट्रीटमेंट हो, वो तो नहीं होता। एक और बात, याद है न इकबाल सिंह को विदाई देने में सीएम ने मीटिंग का नोटिस तक जारी किया था! बड़ा पद, बड़ा ढंग, बड़ा स्पेस… पर लोग भी तो ऐसे ही जुड़े रहते हैं।
और इस पार्टी का मंजर कुछ और ही रहा…
पार्टी में कोई स्पेशल शिफ्ट नहीं थी। क्योंकि ये लोग बड़े पदों पर नहीं थे। लेकिन क्या मजा आया! उनके लिए विदाई एक शानदार पल बन गया। छोटी सी पोस्ट, लेकिन बड़ा दिल और लोगों का प्यार। कर्मचारियों को हर बार सम्मान मिलता है, क्योंकि वे हमेशा जमीन से जुड़े रहते हैं; दूसरों के सुख-दुख में जो खड़े रहते हैं।
मोरल ऑफ द स्टोरी: बड़े पद पर रहकर अगर आप जमीं से जुड़े नहीं रहते तो ऐसी विदाई ही होगी, जिसे सिर्फ एक फॉर्मलिटी भर माना जाएगा। और याद रखिए, सीनियर आईएएस अफसरों को भी अपनी विदाई खुद ही याद रखनी पड़ी, क्योंकि वे छोटी जगह से बहुत दूर जो हो चुके हैं।
रिटायर्ड आईएएस को पुनर्वास का इंतजार
वैसे साहब बड़े ही शांत स्वभाव और धारा के साथ चलने वाले माने जाते हैं। लेकिन उनके समीकरण पूरी तरह से फिट नहीं बैठ पा रहे हैं। बताते हैं कि सूबे के मुखिया ने दूरदर्शी प्लान के चलते यह नियुक्ति होल्ड की है। आने वाले कुछ महीनों में कोई बड़ा अफसर रिटायर हो रहा है, शायद उन्हें इस पद पर पहला ऑफर दिया जा सकता है।
मैडम की सख्ती से PHQ परेशान
मैडम के आगे उनकी एक नहीं चल रही। बताते हैं कि खाकी वालों ने इशारों में समझाया कि आईएएस की बातों में न आओ, आपको आना तो लौटकर अपनी बिरादरी में ही है। मैडम का एक ही राग है- सही काम रुकेगा नहीं, गलत काम आगे बढ़ेगा नहीं।
पंडितजी को फल गई नवग्रह शांति
दरअसल पंडितजी ने प्रदेश का सबसे बड़ा नवग्रह मंदिर बनाकर अपने कमजोर ग्रहों को मजबूत करके अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त दे दी। अब देखना यह है कि पंडितजी के स्ट्रीमलाइन में आने के बाद यह तंत्र-मंत्र वाला फार्मूला क्या उन्हें प्रदेश के शीर्ष पद तक ले जा सकता है?
द सूत्र पर पढ़िए बोल हरि बोल के अन्य कॉलम...
बछड़े की मौत के लिए प्रायश्चित, तबादलों की बेचैनी और पीएचक्यू में उलझन
बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों से फुसफुसाहटें… नाम नहीं, सिर्फ इशारे
खाकी वाले साहब का गजब का नजराना, कांग्रेस में वो इस्तीफा और कौन बनेगा भोपाल का सरताज?
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