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BHOPAL. मध्यप्रदेश में सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों फाइलों से ज्यादा चर्चाएं चल रही हैं। कहीं एक बछड़े की मौत ने अफसर को प्रायश्चित पर भेज दिया, तो कहीं तबादलों की लिस्ट तैयार होकर भी बड़े साहब की छुट्टी के चलते अटक गई है।
उधर, पुलिस मुख्यालय का सिस्टम भी इन दिनों कुछ ऐसा उलझा हुआ है कि छोटे-छोटे फैसले भी लंबित हो रहे हैं। कुल मिलाकर सरकार के गलियारों में इन दिनों फाइलों से ज्यादा फुसफुसाहटें और कयासों का दौर चल रहा है। रंग में भंग पड़ रहा है।
खैर, देश-प्रदेश में खबरें तो और भी बहुत हैं, आप तो सीधे नीचे उतर आईए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
बछड़े के लिए प्रायश्चित
सचिव पद पर बैठे एक साहब की शिफ्टिंग के दौरान ऐसा घटनाक्रम हुआ कि पूरा महकमा कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया। शिफ्टिंग के दौरान साहब का बछड़ा दुनिया छोड़ गया। खबर मिलते ही मैडम का पारा चढ़ गया और जिम्मेदारी संभाल रहे अफसरों के माथे पर पसीना आ गया।
मामले की गंभीरता भांपते हुए संबंधित अफसर ने अनोखा रास्ता चुना। वे सीधे 21 दिन की छुट्टी पर निकल गए और संदेश भिजवा दिया कि सनातनी परंपरा के अनुसार बछड़े की मौत का प्रायश्चित करने के लिए पूजा-पाठ कर रहे हैं।
बस फिर क्या था... जैसे ही अफसर ने नैतिक जिम्मेदारी ली, साहब और मैडम का गुस्सा भी ठंडा पड़ गया। उल्टा अधीनस्थ के प्रति स्नेह उमड़ आया कि देखो, हमारे बछड़े के लिए प्रायश्चित तक कर डाला। अब दफ्तर में चर्चा यही है कि बछड़े की मौत ने भले हलचल मचा दी, लेकिन अफसर की समझदारी ने मामला भी शांत कर दिया।
तबादलों के बादलों का इंतजार
होली के रंग उतर गए और रंगपंचमी भी गुजर गई, लेकिन तबादलों के बादल अब तक नहीं बरसे हैं। अंदरखाने की मानें तो आईएएस तबादलों की लिस्ट तैयार है, बस बड़े साहब के लौटने का इंतजार हो रहा है। पहले 5 तारीख को सूची आने की चर्चा थी, लेकिन ऐन वक्त पर बड़े साहब निजी कारणों से 11 तारीख तक अवकाश पर चले गए और मामला टल गया।
उधर, आईपीएस तबादलों का हाल और दिलचस्प है। ना सूत का पता, ना कपास का… और जुलाहे में लट्ठमलट्ठा।
फिर भी दावेदारों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। राजधानी में 'गणेश परिक्रमा' जारी है और हर कोई अपने समीकरण मजबूत करने में जुटा है। खबर है कि रामनवमी के बाद आईपीएस तबादलों के बादल भी बरस सकते हैं।
फिलहाल सबसे ज्यादा बेचैनी उन आईएएस अफसरों में है जो कलेक्टर बनकर जाने या छोटे जिले से बड़े जिले की तरफ बढ़ने का सपना देख रहे हैं। डर यही है कि अगर लिस्ट ज्यादा लटक गई तो समीकरण ही न बदल जाएं।
पीएचक्यू का सिस्टम गड़बड़ाया
सरकार में हमेशा मजबूत माने जाने वाले पुलिस मुख्यालय (PHQ) का सिस्टम इन दिनों कुछ गड़बड़ाया-सा नजर आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि पीएचक्यू के बड़े अफसरों और सरकार के बीच संवाद पहले जैसा सहज नहीं रहा है। नतीजा यह है कि छोटी-छोटी बातें भी उलझने लगी हैं।
मिसाल के तौर पर, बड़वानी जिले में एसपी के रिटायर होने के बाद करीब दो महीने तक जिला बिना एसपी के चलता रहा। न पीएचक्यू ने प्रस्ताव भेजा और न ही सरकार ने जल्दी दिखाई। ऐसे कई मामले हैं, जो सिस्टम की सुस्ती की कहानी कह रहे हैं। गलियारों में चुटकी ली जा रही है, जब सिस्टम ही साइलेंट मोड में हो, तो फैसले भी वेटिंग में ही रहते हैं।
सूत्रों का कहना है कि सूबे के मुखिया भी इस स्थिति से खुश नहीं हैं। इसका संकेत उसी वक्त मिल गया था, जब कई आईपीएस अफसरों की सीआर (CR) डाउनग्रेड कर दी गई थी। अब अफसरशाही में सवाल गूंज रहा है कि पीएचक्यू की गाड़ी कब फिर रफ्तार पकड़ेगी?
जंगल महकमे में रस्साकसी
जंगल महकमे में एक पद के लिए खींचतान चल रही है। जी हां, पीसीसीएफ शुभरंजन सेन के वन बल प्रमुख बनने के बाद खाली हुए 'चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन' पद को लेकर रस्साकसी जारी है।
एक हफ्ते बाद भी तय नहीं हो पाया है कि प्रदेश का अगला चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन कौन होगा। वन बल प्रमुख के बाद यह पद सबसे अहम माना जाता है, जिसके अधीन प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व, 13 नेशनल पार्क और 26 वाइल्ड लाइफ सेंचुरी आती हैं। इस पद के लिए दो महिला अफसर दावेदार हैं। अब देखना होगा कि किसे यह पद मिलेगा?
पिट गए विधायक जी!
सूबे की सियासत में इन दिनों एक कांग्रेस विधायक की पिटाई खूब चर्चा में है। अब आप गलत न समझिए, मामला किसी सियासी टकराव का नहीं, बल्कि होली की रंगीन परंपरा का है। हुआ यूं कि विधायक जी अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित मशहूर 'लट्ठमार होली' कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंच गए। माहौल पहले से ही रंग, गुलाल और ठहाकों से सराबोर था।
बस फिर क्या था, कार्यक्रम के बीच एक महिला ने परंपरा निभाते हुए विधायक जी की जमकर ‘खातिरदारी’ कर दी। लाठियां बरसनी शुरू हुईं और विधायक जी भी खुद को बचाने के लिए इधर-उधर होते नजर आए।
आसपास मौजूद लोग यह नजारा देखकर ठहाके लगाते रहे। विधायक जी भी मुस्कुराते हुए इस रस्म का हिस्सा बनते दिखे। लट्ठमार होली की यही खासियत है; यहां रंग के साथ मजाक और हल्की-फुल्की ‘पिटाई’ भी परंपरा का हिस्सा मानी जाती है। लिहाजा विधायक जी ने भी खेलभावना के साथ इस रस्म को निभाया।
फिर एक्शन मोड में पंडितजी
प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक पंडितजी फिर सुर्खियों में हैं। मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच उनके समर्थक पूरे जोश में दावा कर रहे हैं कि इस बार पंडितजी की फिर ताजपोशी तय है। समर्थकों का आत्मविश्वास ऐसा कि एक ने तो खुलकर कह दिया कि पंडितजी अपनी सीट ही नहीं, इलाके की किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ लें, जीत तो तय ही है, वो भी निर्विरोध।
इधर, पंडितजी भी लगातार सुर्खियां बटोरने में पीछे नहीं हैं। हाल ही में वे बस की ड्राइविंग सीट पर नजर आए और स्टीयरिंग थामे सड़क पर बस दौड़ाते दिखे। मजेदार बात यह कि इस ड्राइविंग शो में उनके साहबजादे भी पीछे नहीं रहे; उन्होंने भी स्टीयरिंग संभाल ली। बस फिर क्या था, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वैसे इससे पहले भी पंडितजी अपने बंगले की कायापलट को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। उन्होंने अपने बंगले के दरवाजे क्षेत्र के बीमार और जरूरतमंद लोगों के लिए खोल रखे हैं। अब सवाल यही है कि क्या इस बढ़ती सक्रियता का इनाम उन्हें सत्ता में कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी दिलाएगा? सियासी गलियारों में इसी की चर्चा है।
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