बोल हरि बोल: दुबई का दर्द. मेडम का जमीन प्रेम और पत्रकार जी का डायरेक्ट कनेक्शन
Harish Divekar | Mar 15, 2026, 11:40 IST
bol hari bol 15 march 2026 journalist harish divekar bhopal
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में जानें कैसे मंत्रालय की मैडम सस्ते दामों पर जमीन तलाश रही हैं और दुबई में निवेश करने वाले अफसरों की नींद क्यों उड़ी है।
BHOPAL. सत्ता और सिस्टम के गलियारों में बहुत कुछ ऐसा होता है जो फाइलों में दर्ज नहीं होता, लेकिन चर्चाओं में खूब तैरता रहता है। मंत्रालय से लेकर जिलों तक अफसरों और नेताओं के आसपास कई ऐसे किस्से जन्म लेते हैं, जो आधे सच और आधे तंज के साथ पूरे प्रशासनिक माहौल की तस्वीर दिखा देते हैं।
सिस्टम के गलियारों में खबरें अक्सर फाइलों से कम और फुसफुसाहटों से ज्यादा निकलती हैं। ऐसे ही कुछ चटपटे किस्से और अंदरखाने की हलचल लेकर हाजिर है वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर का साप्ताहिक कॉलम, बोल हरि बोल…
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मंत्रालय में ऊंचे पद पर बैठे साहब भले ही ईमानदारी का गीत गाते हों, लेकिन घर की सरकार कुछ और ही सुर में चल रही है। मैडम इन दिनों भोपाल में बैठकर इंदौर के तहसीलदारों को फोन घुमा रही हैं।
मैडम का एक ही सवाल होता है, कहीं ऐसी जमीन दिखी क्या, जिसमें कागजों में थोड़ा बहुत पेंच हो और बाजार से सस्ते में मिल जाए?
बेचारे तहसीलदार भी क्या करें। साहब का पद बड़ा है, इसलिए मैडम की बात को हल्के में लेने की हिम्मत किसी में नहीं।
जी मैडम, देखते हैं, कहकर मामला टालते रहते हैं। दो-एक तहसीलदार मेहनत करके जमीन ढूंढ भी लाए, लेकिन मैडम को उनका रेट पसंद नहीं आया।
मैडम का साफ कहना है। जमीन चाहिए तो मरे के दाम में चाहिए। अब तहसीलदार भी सोच में हैं कि इतनी सस्ती जमीन आखिर मिलेगी कहां?
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दारू महकमे के एक अधिकारी इन दिनों हर दरवाजे पर जाकर अपनी सजा माफ करवाने की गुहार लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि कलेक्टर मैडम को उनकी मनचाही रकम नहीं दी तो उन पर कार्रवाई कर दी गई।
दारू वाले साहब का कहना है कि सिस्टम में जो चल रहा था, वही हिसाब हम दे रहे थे। लेकिन मैडम डबल का हिसाब मांग रही थीं। हमने मना किया तो एक्शन ले लिया।
अब इस कहानी में सच कितना है और शिकायत कितनी, यह तो मैडम ही बता सकती हैं। लेकिन साहब ने बड़े अफसरों के सामने इतना रोना रोया है कि प्रशासनिक गलियारों में मैडम की चर्चा जरूर शुरू हो गई है।
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आप सोच रहे होंगे कि ईरान के युद्ध से अफसरों को तेल-गैस या शेयर मार्केट की चिंता होगी। लेकिन असली टेंशन कुछ और ही है।
दरअसल चर्चा है कि कुछ खास अफसरों ने दुबई में अच्छा खासा निवेश कर रखा है। किसी ने बच्चों के नाम पर कंपनी खोली है, तो किसी ने रिश्तेदारों के जरिए कारोबार खड़ा किया है। ऊपर से गोल्डन वीजा भी ले लिया।
अब युद्ध के बाद दुबई पर खतरे की खबरों ने इन अफसरों की नींद उड़ा दी है। निवेश बढ़ने के बजाय घटता दिख रहा है।
हमारी सलाह तो यही है। इतना टेंशन क्यों लेते हैं साहब? आखिर पैसा खेत के गेहूं बेचकर तो लाए नहीं थे… यहीं कमाया था, यहीं लग रहा है।
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पावर कॉरिडोर में इन दिनों एक तथाकथित पत्रकार की खूब चर्चा है। यह स्वयंभू पत्रकार इतना माहिर है कि कई अफसर इसकी बातों में आ चुके हैं।
पहले इसके निशाने पर प्रमोटी आईएएस और आईपीएस हुआ करते थे, लेकिन अब साहब का आत्मविश्वास इतना बढ़ गया है कि सीधे डायरेक्ट आईएएस पर हाथ साफ करने लगे हैं।
इनका तरीका बड़ा दिलचस्प है। किसी वरिष्ठ अफसर को फोन लगाकर स्पीकर पर बात करवाते हैं और सामने वाले को अपनी गहरी पहुंच का भरोसा दिलाते हैं। फिर शुरू होता है मलाईदार पोस्टिंग का सपना।
हाल ही में दो डायरेक्ट आईएएस अफसरों को नगर निगम कमिश्नर बनवाने का झांसा देकर 20-20 लाख का झटका दे चुके हैं। बेचारे अफसर अब चुप हैं। शिकायत भी कैसे करें? पैसा अगर नंबर-1 का होता तो थाने में रिपोर्ट लिखवा देते। अब काले-पीले की कहानी किसे सुनाएं।
फिलहाल इतना ही… सत्ता और सिस्टम के गलियारों में चर्चाएं जारी हैं। अगले हफ्ते फिर मिलेंगे कुछ नई फुसफुसाहटों और दिलचस्प किस्सों के साथ- तब तक बोल हरि बोल…
बछड़े की मौत के लिए प्रायश्चित, तबादलों की बेचैनी और पीएचक्यू में उलझन
बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों से फुसफुसाहटें… नाम नहीं, सिर्फ इशारे
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चर्च को चंदा दिला रहे कलेक्टर साहब, मंत्रालय वाले साहब मसाज के शौकीन और मंत्रीजी की चाहत अधूरी
सिस्टम के गलियारों में खबरें अक्सर फाइलों से कम और फुसफुसाहटों से ज्यादा निकलती हैं। ऐसे ही कुछ चटपटे किस्से और अंदरखाने की हलचल लेकर हाजिर है वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर का साप्ताहिक कॉलम, बोल हरि बोल…
मैडम को जुगाड़ की जमीन चाहिए
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मंत्रालय में ऊंचे पद पर बैठे साहब भले ही ईमानदारी का गीत गाते हों, लेकिन घर की सरकार कुछ और ही सुर में चल रही है। मैडम इन दिनों भोपाल में बैठकर इंदौर के तहसीलदारों को फोन घुमा रही हैं।
मैडम का एक ही सवाल होता है, कहीं ऐसी जमीन दिखी क्या, जिसमें कागजों में थोड़ा बहुत पेंच हो और बाजार से सस्ते में मिल जाए?
बेचारे तहसीलदार भी क्या करें। साहब का पद बड़ा है, इसलिए मैडम की बात को हल्के में लेने की हिम्मत किसी में नहीं।
जी मैडम, देखते हैं, कहकर मामला टालते रहते हैं। दो-एक तहसीलदार मेहनत करके जमीन ढूंढ भी लाए, लेकिन मैडम को उनका रेट पसंद नहीं आया।
मैडम का साफ कहना है। जमीन चाहिए तो मरे के दाम में चाहिए। अब तहसीलदार भी सोच में हैं कि इतनी सस्ती जमीन आखिर मिलेगी कहां?
कलेक्टर मैडम और दारू वाले साहब
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दारू महकमे के एक अधिकारी इन दिनों हर दरवाजे पर जाकर अपनी सजा माफ करवाने की गुहार लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि कलेक्टर मैडम को उनकी मनचाही रकम नहीं दी तो उन पर कार्रवाई कर दी गई।
दारू वाले साहब का कहना है कि सिस्टम में जो चल रहा था, वही हिसाब हम दे रहे थे। लेकिन मैडम डबल का हिसाब मांग रही थीं। हमने मना किया तो एक्शन ले लिया।
अब इस कहानी में सच कितना है और शिकायत कितनी, यह तो मैडम ही बता सकती हैं। लेकिन साहब ने बड़े अफसरों के सामने इतना रोना रोया है कि प्रशासनिक गलियारों में मैडम की चर्चा जरूर शुरू हो गई है।
ईरान का युद्ध और अफसरों की टेंशन
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आप सोच रहे होंगे कि ईरान के युद्ध से अफसरों को तेल-गैस या शेयर मार्केट की चिंता होगी। लेकिन असली टेंशन कुछ और ही है।
दरअसल चर्चा है कि कुछ खास अफसरों ने दुबई में अच्छा खासा निवेश कर रखा है। किसी ने बच्चों के नाम पर कंपनी खोली है, तो किसी ने रिश्तेदारों के जरिए कारोबार खड़ा किया है। ऊपर से गोल्डन वीजा भी ले लिया।
अब युद्ध के बाद दुबई पर खतरे की खबरों ने इन अफसरों की नींद उड़ा दी है। निवेश बढ़ने के बजाय घटता दिख रहा है।
हमारी सलाह तो यही है। इतना टेंशन क्यों लेते हैं साहब? आखिर पैसा खेत के गेहूं बेचकर तो लाए नहीं थे… यहीं कमाया था, यहीं लग रहा है।
तथाकथित पत्रकार से सावधान
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पावर कॉरिडोर में इन दिनों एक तथाकथित पत्रकार की खूब चर्चा है। यह स्वयंभू पत्रकार इतना माहिर है कि कई अफसर इसकी बातों में आ चुके हैं।
पहले इसके निशाने पर प्रमोटी आईएएस और आईपीएस हुआ करते थे, लेकिन अब साहब का आत्मविश्वास इतना बढ़ गया है कि सीधे डायरेक्ट आईएएस पर हाथ साफ करने लगे हैं।
इनका तरीका बड़ा दिलचस्प है। किसी वरिष्ठ अफसर को फोन लगाकर स्पीकर पर बात करवाते हैं और सामने वाले को अपनी गहरी पहुंच का भरोसा दिलाते हैं। फिर शुरू होता है मलाईदार पोस्टिंग का सपना।
हाल ही में दो डायरेक्ट आईएएस अफसरों को नगर निगम कमिश्नर बनवाने का झांसा देकर 20-20 लाख का झटका दे चुके हैं। बेचारे अफसर अब चुप हैं। शिकायत भी कैसे करें? पैसा अगर नंबर-1 का होता तो थाने में रिपोर्ट लिखवा देते। अब काले-पीले की कहानी किसे सुनाएं।
फिलहाल इतना ही… सत्ता और सिस्टम के गलियारों में चर्चाएं जारी हैं। अगले हफ्ते फिर मिलेंगे कुछ नई फुसफुसाहटों और दिलचस्प किस्सों के साथ- तब तक बोल हरि बोल…
द सूत्र पर पढ़िए बोल हरि बोल के अन्य कॉलम...
बोल हरि बोल: सत्ता के गलियारों से फुसफुसाहटें… नाम नहीं, सिर्फ इशारे
खाकी वाले साहब का गजब का नजराना, कांग्रेस में वो इस्तीफा और कौन बनेगा भोपाल का सरताज?
चर्च को चंदा दिला रहे कलेक्टर साहब, मंत्रालय वाले साहब मसाज के शौकीन और मंत्रीजी की चाहत अधूरी
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