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जांजगीर पुलिस पलाश की तलाश में पहुंची इंदौर और उज्जैन, पीड़िता और गवाहों के बयान तथा साक्ष्यों से गहरी मुश्किल में पलाश

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Yagyawalkya Mishra
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जांजगीर पुलिस पलाश की तलाश में  पहुंची इंदौर और उज्जैन, पीड़िता और गवाहों के बयान तथा साक्ष्यों से गहरी मुश्किल में पलाश

JANJGIR-CHAMPA. बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के बेटे पलाश चंदेल की तलाश में जांजगीर चाँपा ज़िले की पुलिस ने मध्यप्रदेश के इंदौर और उज्जैन में भी दबिश दी है। लेकिन पलाश चंदेल का कुछ पता नहीं चल पाया है। वहीं पीड़िता के बयान, आरोप के समर्थन में प्रस्तुत भौतिक साक्ष्य के साथ साथ गवाहों ने महिला द्वारा लगाए आरोपों को पुष्टि दे दी है। राज्य की राजनीति में बीजेपी को बैकफ़ुट पर ले जाने वाले इस मामले का सूत्रपात बीते 19 जनवरी को हुआ, जबकि महिला की FIR राजधानी के महिला थाने में दर्ज हुई और केस डायरी जांजगीर पुलिस को भेज दी गई।

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पलाश की तलाश जारी





नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के बेटे पलाश चंदेल के खिलाफ विवाह का झाँसा देकर बलात्कार करने और गर्भपात भी कराए जाने का आरोप पीड़िता ने लगाया है। पीड़िता की एफ़आइआर ज़ीरो पर राजधानी के महिला थाने में दर्ज की गई थी। इस एफ़आइआर में अनुसूचित जनजाति आयोग की भुमिका भी बताई जाती है। महिला ने अपने साथ हुए घटना की शिकायत आयोग में भी की थी। पलाश चंदेल की तलाश में जांजगीर पुलिस ने पलाश के घर पर भी दबिश दी थी। पुलिस टीम मध्यप्रदेश के इंदौर और उज्जैन भी पहुँची थी, लेकिन पलाश चंदेल का कहीं पता नहीं चला है।





पीड़िता के बयान और साक्ष्यों से और गहरी मुश्किल में फँस सकते हैं पलाश

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33 वर्षीय पलाश चंदेल पर अनाचार और गर्भपात का आरोप लगाने वाली 40 वर्षीया महिला जांजगीर में ही शिक्षिका है।वह मूलतः सरगुजा इलाक़े की निवासी है। जांजगीर पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज किया और भौतिक साक्ष्यों को भी बरामद किया है। इन भौतिक साक्ष्यों में डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अन्य साक्षियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। बताया जा रहा है कि, अब तक जो भौतिक साक्ष्यों हासिल करने के साथ साथ गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं उससे पलाश चंदेल के लिए स्थिति और पेचीदा हो गई है।





19 जनवरी को FIR और 20 को बीजेपी कार्यसमिति की बैठक थी





इस मामले में बीजेपी बैकफ़ुट पर आ गई है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल की ओर से इस मामले में अब तक कोई बयान नहीं आया है। प्रदेश की सियासत में यह मसला कांग्रेस के लिए मुफ़ीद हमले की वजह साबित हुआ है। ग़ौरतलब इस मामले में कार्रवाई की तारीख़ें हैं। पीड़िता लंबे अरसे से कार्रवाई के लिए भटक रही थी। लेकिन उसके प्रकरण में क़ानूनी कार्रवाई हुई 19 फ़रवरी को, जबकि अगले दिन अंबिकापुर में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक थी। नेता प्रतिपक्ष के रुप में नारायण चंदेल की पदस्थापना के पहले इस मामले में कार्रवाई कछुए की मंथर गति से चल रही थी। इस पूरे मामले में कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में नारायण चंदेल का पुतला फूंका और सोशल मीडिया पर भी जमकर निशाना साधा। बीजेपी इस मामले में जवाब देने की स्थिति में नहीं दिखी। सीएम भूपेश बघेल ने भी इस घटना को आदिवासी महिला पर अत्याचार के रुप में लाते हुए सवाल किया कि, आख़िर बीजेपी चुप क्यों हैं। जबकि समूची बीजेपी चुप थी, तब ही बीजेपी में प्रदेश के सबसे बड़े चेहरे डॉ रमन सिंह ने बयान दिया कि यह व्यक्तिगत मसला है। लेकिन मसला थम नहीं रहा है। हसदेव नदी में रोज़ पानी बह रहा है और बीजेपी के लिए ख़ासकर नारायण चंदेल के लिए राजनैतिक मुश्किलें और चुनौती भी बढ़ रही है।



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