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कहते हैं ना बचाने वाला बड़ा होता है। ऐसा ही कुछ किया है जबलपुर के डॉक्टर्स की टीम ने। जहां 20 दिन की मासूम को नया जीवन मिला। इस मासूम का दिल दांई ओर था तो पेट के अंग छाती पर चढ़े थे। इसलिए न दिल सही से धड़क रहा था और न ही फेफड़े काम कर रहे थे। और ऑक्सीजन लेवल भी गिरने लगा था।
मासूम को मिली नई जिंदगी
जबलपुर के 9 डॉक्टर्स की टीम ने इस मासूम को नई जिंदगी देने में पूरी जद्दोजहद लगा दी। 2 घंटे की बड़ी सर्जरी के बाद सभी अंगो का वापस सही जगह सेट किसया गया। पेट और छाती के बीच डिफेक्ट घुलनशील टांकों से रिपेयर किया गया।
मासूम को थी दुर्लभ बीमारी
एक जवान सतना में अपनी मासूम को लेकर अस्पताल पहुंचा तो यहां के डॉक्टर्स ने नवजात की क्रिटीकल कंडीशन बताकर हाथ खड़े कर दिए। क्योंकि इस मासूम का बांया फेफड़ा अविकसित था। उसे सांस लेने में दिक्कत थी। मासूम कंजेनिटल डायफ्रेगमेटिक हर्निया नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था। गर्भ में सही विकास न होने से इस तरह की समस्या आती है।
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