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Uttarkashi. उत्तराखंड के उत्तरकाशी में टनल धंसने के बाद 41 मजदूर पिछले 9 दिन से फंसे हुए हैं। देश-विदेश के विशेषज्ञ नई-नई तरकीब लगा रहे हैं, वहीं रेस्क्यू टीम दिन-रात उन्हें निकालने में लगी है, हालांकि अब तक सफलता नहीं मिली है। इस बीच सोमवार (20 नवंबर) को 6 इंच की नई पाइपलाइन से पहली बार इन मजदूरों तक खाना पहुंचाने में कामयाबी मिली है। रेस्क्यू टीम ने इसी पाइप से इन मजदूरों को बोतल में गर्म खिचड़ी भेजी है। इतने दिनों से सही अच्छे से खाना नहीं मिल पाने से वे कमजोर हो चुके हैं।
सिर्फ खिचड़ी ही क्यों?
टनल में फंसे हुए 41 मजदूरों के लिए हेमंत नाम के रसोइये ने खिचड़ी बनाई है। उन्होंने बताया, नौ दिनों में यह पहली बार है कि मजदूरों के लिए गर्म खाना भेजा गया है। हेमंत ने जानकारी दी कि हम सिर्फ खिचड़ी ही भेज रहे हैं। हमें केवल वही खाना बनाना है, जिसकी हमें सिफारिश की गई है। इसमें आलू के टुकड़े, दलिया और खिचड़ी भेजी जाएगी। डॉक्टर की सलाह लेकर इन मजदूरों के स्वास्थय का ख्याल रखते हुए उन्हें खाना भेजा गया है।
हाई कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से 48 घंटे में मांगा जवाब
टनल में फंसे मजदूरों का मामला अब कोर्ट में पहुंच चुका है। उत्तराखंड हाई कोर्ट में सभी मजदूरों को जल्दी बाहर निकालने को लेकर जनहित याचिका दायर की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से 48 घंटे के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 22 नवंबर की तारीख तय की है। कोर्ट ने मिनिस्ट्री ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, सचिव लोक निर्माण विभाग, केंद्र सरकार, नेशनल हाइवे विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है।
एनजीओ का आरोप : सरकार मजदूरों की जान पर खिलवाड़ कर रही
जानकारी अनुसार, समाधान एनजीओ कृष्णा विहार देहरादून ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा है कि उत्तरकाशी के सिलक्यारा में पिछले 12 नवंबर से 41 मजदूर टनल के अंदर फंसे हुए हुए हैं, लेकिन प्रदेश और केंद्र सरकार उनको अभी तक बाहर निकालने में अफसल साबित हुई है। सरकार व कार्यदायी संस्था टनल में फंसे लोगों की जान पर खिलवाड़ कर रही है। मजदूरों को जल्द बाहर निकाला जाए।
याचिका में कहा- ठीक से नहीं की गई टनल स्थान की भूगर्भीय जांच
एनजीओ ने याचिका में कहा, हर दिन उनको निकालने के लिए नए नए जुगाड़ खोजे जा रहे हैं, जिस वजह से इन मजदूरों की जान खतरे में पड़ी है, उन पर आपराधिक मुदकमा दर्ज किया जाए। पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी से कराई जाए। याचिका में यह भी कहा कि टनल के अंदर काम शुरू होने से पहले मजदूरों को जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाए, जैसे रेस्क्यू पाइप, जनरेटर, मशीन और अन्य सामान। टनल के निर्माण के वक्त क्षेत्र की भूगर्भीय जांच ढंग से नही की गई। इसकी वजह से इन मजदूरों की जान खतरे में पड़ी। लगातार लापरवाही बरती जा रही है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बनाई गई नई रणनीति
रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए टीम ने नई रणनीति बनाई है। इसके तहत आठ एजेंसियां- NHIDCL, ONGC, THDCIL, RVNL, BRO, NDRF, SDRF, PWD और ITBP एक साथ 5 तरफ से टनल में ड्रिलिंग करेंगी। आरवीएनएल जरूरी सामान को पहुंचाने के लिए एक और वर्टिकल पाइपलाइन पर काम कर रहा है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कई सरकारी एजेंसियां जुटी हुई हैं और उन्हें अलग-अलग काम सौंपे गए हैं। ये एजेंसियां मजदूरों की सुरक्षित निकासी के लिए अथक प्रयास कर रही हैं।
मशीन के सामने ये रोड़ा
नेशनल हाइवेज और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के डायरेक्टर अंशू मनीष खालगो ने बताया, मशीन 23 मीटर पर रुकी हुई है, क्योंकि उसके आगे बड़ा सा बॉर्डर आ गया है। हमारी पहली प्राथमिकता है कि यह अंदर हार्ड फूड पहुंचाया जाए, मजदूर तक आज प्रॉपर खाना भेजा जाएगा।
सुरंग के बाहर बनाया गया मंदिर
जहां एक ओर मजदूरों को सुरंग से निकालने का काम जारी है तो वहीं दूसरी ओर लोगों ने सुरंग के बाहर अस्थाई मंदिर बना दिया है, जहां मजदूरों को निकालने के लिए स्थानीय लोग और उनके परिजन पूजा-अर्चना कर रहे हैं। रोज दीपक लगाने के साथ पूजन किया जा रहा है।
टनल के अंदर एक मजदूर को अस्थमा दूसरे को शुगर
टनल के अंदर फंसे मजदूर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के हैं। इनमें से एक मजदूर को अस्थमा और दूसरे मजदूर को शुगर की बीमारी भी है। उन्हें पाइप के जरिए रोजाना दवाई भी भेजी जा रही है.
काम छोड़कर बाहर भागे, रेस्क्यू में जुटे अन्य मजदूरों में दहशत
सिल्क्यारा टनल के भीतर फंसे 41 मजदूरों को बचाने की मशक्कत कर रहे मजदूर भीतर का नजारा देख कर खुद ही दहशत में आ गए और काम छोड़कर टनल से बाहर निकल गए। काम कर रहे मजदूरों ने कंपनी अधिकारियों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है। एनएचआईडीसीएल टनल के भीतर मजदूरों के लिए एस्केप टनल बना रहा है। जिसका काम अंतिम चरण में है। बता दें कि सुरंग के भीतर की मिट्टी कई जगह पर काफी भुरभुरी है और कई जगहों पर हल्का पानी भी भरा हुआ है। जिसकी वजह से भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है। उत्तरकाशी में पिछले हफ्ते आए भूकंप के झटके के बाद टनल के अंदर भी चट्टान चटकने की आवाज आई थी, जिससे काम कर रहे मजदूरों में डर का माहौल था, वहीं सोमवार को टनल के भीतर का मंजर देखकर यहां काम कर रहे मजदूर डर गए। उन्हें खुद के यहां फंसने का डर सताने लगा। जिस पर वे काम छोड़कर बाहर आ गए। उन्होंने बचाव अभियान के दौरान सुरक्षा इंतजाम और पुख्ता करने की मांग की।
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