भारतीय कंपनियां अब सीधे विदेशी शेयर बाजार में हो सकेंगी सूचीबद्ध, मंत्रालय ने धारा को अधिूसचित किया

author-image
Pratibha Rana
एडिट
New Update
 भारतीय कंपनियां अब सीधे विदेशी शेयर बाजार में हो सकेंगी सूचीबद्ध, मंत्रालय ने धारा को अधिूसचित किया

New Delhi. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय कंपनियों को कुछ शर्तों के साथ विदेशी शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने की अनुमति प्रदान कर दी है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनी कानून के तहत संबंधित धारा को अधिसूचित कर बड़ी राहत दी है। अब ऐसे में कई बड़ी कंपनियों के शेयर विदेशी बाजार में पकड़ बनाएंगे। इसे भारत सरकार का वैश्विक शेयर बाजार में बड़ा कदम बताया जा रहा है।

अब तक किस जरिए विदेशी शेयर बाजार में करते थे प्रवेश

वर्तमान में स्थानीय कंपनियां विदेशों में अमेरिकी डिपाजिटरी रिसीट (एडीआर) और ग्लोबल डिपाजिटरी रिसीट (जीडीआर) के जरिये सूचीबद्ध हो सकती हैं। हालांकि भारतीय कंपनियों को विदेशी शेयर बाजारों में प्रत्यक्ष रूप से सूचीबद्ध कराने के नियमों को अभी अधिसूचित किया जाना बाकी है। धारा पांच सार्वजनिक कंपनियों के कुछ वर्गों को विदेशी न्याय क्षेत्रों या ऐसे न्याय क्षेत्रों के तहत अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करने की अनुमति देता है।

कुछ पहलुओं पर मंथन जारी

13 अक्टूबर को एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा था कि मंत्रालय कंपनियों को प्रत्यक्ष तौर पर विदेशी शेयर बाजरों में सूचीबद्ध कराने के लिए नियम तैयार करने के लिए संभावित पात्रता मानदंड सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है।

कौन-कौन सी धारा में किया जा रहा अधिसूचित

मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को एक अधिसूचना में कहा, कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2020 (2020 का 29) की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार इसके द्वारा अक्टूबर 2023 के 30वें दिन को उस तारीख के रूप में निर्धारित करती है जिस दिन इस अधिनियम की धारा पांच के प्रावधान लागू होंगे। धारा पांच सार्वजनिक कंपनियों के कुछ वर्गों को अनुमति प्राप्त विदेशी न्यायक्षेत्रों या ऐसे अन्य न्यायक्षेत्रों में अनुमत स्टॉक एक्सचेंजों पर अपनी प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करने की अनुमति देता है।

सीतारमण ने जता दिए थे आसार

वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने 28 अक्टूबर को कहा था कि सरकार ने घरेलू कंपनियों को विदेश में सूचीबद्ध होने की अनुमति देने का फैसला किया है, ताकि उन्हें वैश्विक बाजारों से पूंजी हासिल करने में मदद मिल सके। इससे पहले मई 2020 में कोविड राहत पैकेज के हिस्से के रूप में इस कदम की घोषणा की गई थी।

फेमा सहित अन्य नियमों में बदलाव की आवश्यकता

लॉ फर्म सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर और हेड (कैपिटल मार्केट्स) यश अशर ने कहा, 'कंपनी कानून अब भारतीय कंपनियों को अपने शेयरों को अन्य विशिष्ट अधिकार क्षेत्रों में सूचीबद्ध कराने की अनुमति देता है। ऐसा करने के लिए फेमा सहित अन्य नियमों में बदलाव की आवश्यकता होगी। नियामकीय चिंताओं को पर्याप्त रूप से दूर किए जाने के बाद कुछ कंपनियां आईएनएक्स पर अपने इक्विटी शेयरों को आईएफएससी में सूचीबद्ध कराने पर भी विचार कर सकती हैं।

लैपटॉप आयात के लिए 110 आवेदनों को सरकार ने मंजूरी दी

सरकार ने लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य आईटी हार्डवेयर उत्पादों के आयात की मंजूरी के लिए अब तक मिले 111 आवेदनों में से लगभग 110 को मंजूरी दे दी है। आयात की मंजूरी पाने वाली कंपनियों में डेल इंटरनेशनल सर्विसेज इंडिया, एपीएल इंडिया, एचपी इंडिया सेल्स प्राइवेट लिमिटेड, लेनोवो (इंडिया), आसुस इंडिया, आईबीएम इंडिया, सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स, शाओमी टेक्नोलॉजी इंडिया, सिस्को कॉमर्स इंडिया, सीमेंस लिमिटेड और बॉश लिमिटेड शामिल हैं। दरअसल, सरकार ने पिछले महीने लैपटॉप और पर्सनल कंप्यूटर के आयात पर लगी पाबंदियों में बदलाव किया था।

decision of Ministry of Corporate Affairs Indian companies in foreign stock market ग्लोबल डिपाजिटरी रिसीट अमेरिकी डिपाजिटरी रिसीट कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय का फैसला भारतीय कंपनियां विदेशी शेयर बाजार में Global Depository Receipt American Depository Receipt
Advertisment