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New Delhi. केंद्र की मोदी सरकार टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों पर लगातार शिकंजा कसती जा रही है। ऐसे में अब देश के बाहर कालाधन भेजना आसान नहीं होगा। स्विस बैंक ने मोदी सरकार से भारतीय खाताधारकों का डेटा साझा किया है। स्विट्जरलैंड ने 104 देशों के साथ करीब 36 लाख वित्तीय खातों का विवरण भेजा है। भारत सरकार और स्विट्जरलैंड के बीच हुए समझौते के तहत लगातार पांचवीं बार स्विस बैंक ने यह अहम डेटा साझा किया है।
क्या होगा डाटा भेजने का फायदा
पहले स्विस बैंक किसी तरह का डेट साझा नहीं करता है। इससे ब्लैकमनी रखने वालों को बड़ी राहत थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। स्विस बैंक की ओर से डेटा साझा करने से सरकार को टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग वालों को पकड़ने में आसानी हो रही है। इसके माध्यम से आयकर और ईडी कई बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई करती है।
स्विस बैंक ने मुहैया कराई गई ये जानकारी
भारतीय अधिकारियों ने बताया, स्विस बैंक ने कुछ लोगों, कॉरपोरेट और न्यास (ट्रस्ट) से जुड़े खातों की जानकारी साझा की गई है। साझा किए गए डेटा में पहचान, खाता और वित्तीय जानकारी शामिल है। इसमें नाम, पता, निवास का देश और कर पहचान संख्या के साथ ही रिपोर्टिंग वाले, खाता शेष तथा केपीटल इंकम से संबंधित जानकारी शामिल है।
सूचना की गोपनीयता बरकरार
अधिकारियों ने बताया कि सूचना की गोपनीयता के चलते मिली जानकारी या किसी अन्य विवरण में शामिल राशि का खुलासा नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस डेटा का इस्तेमाल टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और आंतकवाद के फंडिंग सहित अन्य गैरकानूनी कामों की जांच के लिए किया जाएगा।
देशों के साथ वित्तीय खातों का ब्योरा साझा
स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार, सूचना के स्वत: आदान-प्रदान (एईओआई) पर वैश्विक मानक के ढांचे के भीतर 104 देशों के साथ वित्तीय खातों का ब्योरा साझा किया गया है। इस वर्ष कजाकिस्तान, मालदीव और ओमान को 101 देशों की पिछली सूची में जोड़ा गया।
इनकम टैक्स में गलत जानकारी देने वाले नपेंगे
अधिकारियों ने बताया कि वह अब यह सत्यापित कर पाएंगे कि क्या टैक्सपेयर्स ने अपने आयकर रिटर्न में अपने वित्तीय खातों की सही घोषणा की है। वित्तीय खातों की संख्या में करीब दो लाख की वृद्धि हुई है। सूचनाओं का आदान-प्रदान 78 देशों के साथ पारस्परिक था। 25 देशों के मामले में स्विट्ज़रलैंड ने जानकारी प्राप्त की, लेकिन खुद कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, क्योंकि ये (13) देश अबतक गोपनीयता तथा डेटा सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं या उन देशों (12) ने डेटा प्राप्त नहीं करने का विकल्प चुना है।
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