मिसाइल-रॉकेट से लेकर गन सिस्टम का फायर पावर बढ़ा रही सेना, अब 100 मेड-इन-इंडिया एलसीए मार्क 1ए फाइटर जेट खरीदने की तैयारी

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Pratibha Rana
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मिसाइल-रॉकेट से लेकर गन सिस्टम का फायर पावर बढ़ा रही सेना, अब 100 मेड-इन-इंडिया एलसीए मार्क 1ए फाइटर जेट खरीदने की तैयारी

New Delhi. पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर बढ़ती सामरिक चुनौतियों के साथ युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी आर्टिलरी फायर पावर को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की पहल तेज कर दी है। चीन से लगी उत्तरी सीमाओं पर आधुनिक 155 एमएम गन सिस्टम की तैनाती के बाद अपने सभी तोपों और बंदूकों को इसी रेंज में लाने का फैसला किया है। दूसरी ओर, भारतीय वायुसेना अब 100 मेड-इन-इंडिया एलसीए मार्क 1ए फाइटर जेट खरीदने जा रही है। LCA मार्क-1A, तेजस एयरक्राफ्ट का एडवांस वर्जन है। इसमें अपग्रेडेड एवियॉनिक्स और रडार सिस्टम लगे हैं। ऐसे में अब वायुसेना की ताकत और बढ़ जाएगी।

तेजस का एडवांस वर्जन है LCA मार्क 1A फाइटर जेट

भारतीय वायुसेना भी अपनी ताकत बढ़ाने जा रही है। सेना अब 100 मेड-इन-इंडिया एलसीए मार्क 1ए फाइटर जेट खरीदेगी। भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने स्पेन दौरे में इसकी घोषणा की। तेजस एयरक्राफ्ट का एडवांस वर्जन है एलसीए मार्क-1ए। इसमें अपग्रेडेड एवियॉनिक्स और रडार सिस्टम लगाए गए हैं। एयरफोर्स इससे पहले भी 83 एलसीए मार्क-1ए एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दे चुकी है। भारतीय वायुसेना का इन एयरक्राफ्ट को खरीदने का मकसद पुराने मिग-21 को रिटायर करना है। डील के लिए आधिकारिक प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय और नेशनल सिक्योरिटी स्टेकहोल्डर्स को भेजा जा चुका है।

बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें : क्षमता बढ़ाने पर जोर

सेना बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के लिए रेंज और लक्ष्य भेदने की सटीकता के लिहाज से क्षमता बढ़ा रही है। ब्रह्मोस मिसाइल की मारक रेंज बढ़ाने के बाद डीआरडीओ पिनाका मिसाइल रॉकेट की रेंज को दोगुने से लेकर चार गुना बढ़ाने के साथ अधिक घातक बनाने की तैयारी में जुट गया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारतीय सेना की नजर

भारतीय सेना रूस-यूक्रेन के युद्ध के अनुभवों पर निगाह रखते हुए भविष्य में युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए सामरिक क्षमता निर्माण पर भी काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, युद्ध में अब विशिष्ट नई तकनीकों से लैस हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए सभी तोपखाने और गन सिस्टम को उन्नत करने का फैसला लिया जा चुका है। सेना ने तय किया है कि 155 मिमी स्वचालित प्रणालियों और असेंबलियों के साथ सभी आर्टिलरी गन सिस्टम का मानक कैलिबर होगा। पिछले एक दशक में 155 मिमी गन सिस्टम और होवित्जर की खरीद के लिए चार अनुबंध किए जा चुके हैं।

हथियारों को बनाया जा रहा एडवांस

सेना इन प्रणालियों को पहले ही शामिल कर चुकी है और अब अधिक संख्या में रेजिमेंटों को इन तोपों से सुसज्जित किया जा रहा है। इस गन सिस्टम में धनुष, सारंग, अल्ट्रा लाइट होवित्जर (यूएलएच) और के-9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड गन शामिल हैं। धनुष तोपें बोफोर्स तोपों का इलेक्ट्रॉनिक अपग्रेड हैं।

सारंग तोप : 300 तोपों की खरीद का ऑर्डर, 25% मिले

सारंग तोपों को 130 मिमी से 155 मिमी कैलिबर तक उन्नत किया गया है। सेना की रेजिमेंट सात और पांच को पहले ही यूएलएच और स्व-चालित गन सिस्टम से सुसज्जित किया जा चुका है। 300 सारंग तोपों की खरीद का ऑर्डर सेना पहले ही दे चुकी है, जिसमें से 25 प्रतिशत उसे मिल चुके हैं। दो अन्य गन सिस्टम 155 मिमी/52 कैलिबर एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) और माउंटेड गन सिस्टम (एमजीएस) की खातिर भी 'प्रस्ताव के लिए अनुरोध' (आरएफपी) जारी कर दिए गए हैं।

सेना के लिए उसकी हथियार प्रणाली की मारक क्षमता अहम

चीन से लगी उत्तरी सीमा पर एटीएजीएस एक ग्रीनफील्ड परियोजना है, जिसे डीआरडीओ और भारतीय निजी क्षेत्र की साझेदारी के माध्यम से विकसित किया गया है। बंदूक में गोला-बारूद लोड करने, बिछाने और फायर करने के लिए इलेक्ट्रिक ड्राइव सहित कई उन्नत विशेषताएं हैं। रूस-यूक्रेन जंग से साबित हुआ है कि आधुनिक हाइटेक युद्ध में भी सेनाओं के लिए उसकी हथियार प्रणाली की मारक क्षमता अहम है।

रूस ने रोजाना बरसाए 20 हजार गोले

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में 80% जानमाल की क्षति हथियारों-मिसाइलों के माध्यम से हुई है। आकलन के अनुसार, रूस ने जहां प्रति दिन करीब 20 हजार गोले बरसाए तो वहीं यूक्रेन ने भी चार से पांच हजार गोले फायर किए हैं। इसमें रूस के पांच हजार गन सिस्टम-रॉकेट ध्वस्त हुए हैं। इसको संज्ञान में लेते हुए भारतीय सेना ने 2042 तक अपने सभी गन सिस्टम को 155 मिमी तक कर देने पर अमल शुरू कर दिया है।

पिनाका के लिए गाइडेड एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट के परीक्षण की तैयारी

भविष्य की सामरिक चुनौतियों के लिहाज से मिसाइल-रॉकेट युद्ध संसाधनों को बहुआयामी बनाने पर सेना जोर दे रही है। इस क्रम में पिनाका के लिए गाइडेड एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट परीक्षण के अधीन है, जो 70 किलोमीटर तक के लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम होंगे।

ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज बढ़ाई

पिनाका की एक रेजिमेंट तैयार हो चुकी है और अतिरिक्त रेजिमेंटों को शामिल करने की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू होने की संभावना है। सेना का लक्ष्य पिनाका रॉकेट की रेंज को 120 से लेकर 300 किलोमीटर तक बढ़ाने का है और डीआरडीओ के साथ वह इस पर काम कर रही है। डीआरडीओ बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों दोनों के लिए रेंज और सटीक लक्ष्य भेदने की क्षमता भी बढ़ा रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज बढ़ा दी गई है तो वहीं अन्य मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने को लेकर काम जारी है।

LCA मार्क 1A फाइटर एयरक्राफ्ट: रिव्यू मीटिंग खरीदने का फैसला

100 और LCA मार्क 1A फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने का फैसला वायुसेना प्रमुख की अध्यक्षता में एक रिव्यू मीटिंग के बाद लिया गया है। मीटिंग में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अधिकारी भी शामिल थे। ये कंपनी ही इन फाइटर जेट को बनाकर डिलीवर करेगी। इस डील के पूरे होने के बाद भारत के पास अगले 15 सालों में 40 एलसीए तेजस, 180 से ज्यादा एलसीए मार्क-1ए और कम से कम 120 एलसीए मार्क-2 एयरक्राफ्ट होने की संभावना बन रही है।

भारत में बने हैं 65% से ज्यादा पुर्जे

भारत ने 83 एलसीए मार्क-1ए एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया था, जिनकी डिलीवरी फरवरी 2024 में हो सकती है। एलसीए मार्क-1ए के 65% से ज्यादा उपकरण भारत में बने हैं। इसे एयरोस्पेस में भारत की आत्मनिर्भरता और मेक-इन-इंडिया की तरफ बड़ा कदम माना जा रहा है।

सी-295 ट्रांसपोर्ट प्लेन लेने स्पेन गए हैं वायुसेना प्रमुख

एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी सी-295 ट्रांसपोर्ट प्लेन लेने के लिए स्पेन गए हैं। यहां उन्होंने 13 सितंबर को पहला सी-295 ट्रांसपोर्ट प्लेन रिसीव किया। यह एयरक्राफ्ट पिछले तीन दशकों से सेवा में लगे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एवरो-748 को रिप्लेस करने के लिए लाया जा रहा है। इस एयरक्राफ्ट को 25 सितंबर को गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। इसके बाद यह आगरा एयरबेस पर तैनात होगा।

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