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Mumbai. महाराष्ट्र के नांदेड़ में डॉ. शंकरराव चव्हाण मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पताल में 30 सितंबर की रात से अब तक मरीजों की मौतों का सिलसिला जारी है। बीते 72 घंटे में 38 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 16 बच्चे थे। 70 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है, इनमें 38 नवजात हैं। मामले में अस्पताल के डीन डॉ. श्याम वाकोड़े और एक डॉक्टर पर धारा 304 में केस दर्ज किया गया है। इधर बॉम्बे हाई कोर्ट ने नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर के सरकारी अस्पतालों में मौतों को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा- अस्पतालों में दवाओं की कमी होने का कारण हमें मंजूर नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार से गुरुवार तक हेल्थ बजट का ब्योरा मांगा है। इस मामले पर आज (5 अक्टूबर) को सुनवाई होने वाली है।
राज्य सरकार ने बनाई 3 सदस्यों वाली जांच समिति
अस्पताल की बदहाली को लेकर महाराष्ट्र सरकार में ही मतभेद सामने आया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सब ठीक होने का दावा किया है, वहीं चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने स्टाफ की कमी की बात मानी है। विपक्ष ने भी अस्पताल में दवाओं व स्टाफ की कमी और उपकरण बंद होने के आरोप लगाए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति ने मंगलवार से ही काम शुरू कर दिया है। दूसरी ओर गुरुवार (5 अक्टूबर) को नांदेड़ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 21 साल की महिला और उसके नवजात शिशु की मौत पर नांदेड़ ग्रामीण पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद इलाज के अभाव में मां-बच्चे की मौत
नांदेड़ के कंधार की अंजलि वाघमारे को 30 सितंबर को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। डॉक्टर ने बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए ब्लड बैग और कुछ दवाएं मंगवाईं। इस पर 45 हजार का खर्च आया, लेकिन इलाज नहीं हुआ। न तो वहां डॉक्टर थे और ना ही कोई नर्स। अंजलि के पिता ने इसकी शिकायत डीन डॉ. श्याम वाकोड़े से की, लेकिन शिकायत है कि उन्होंने उसे भगा दिया। इसके बाद अंजलि के बच्चे की उसी दिन मौत हो गई। सही इलाज न मिलने के कारण 4 अक्टूबर को अंजलि ने भी दम तोड़ दिया। अंजलि के पिता ने आरोप लगाया था कि इन दोनों मौतों के लिए डॉ. श्याम वाकोड़े और उनके सहयोगी जिम्मेदार थे, इसलिए ग्रामीण पुलिस ने धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया।
शिवसेना सांसद हेमंत पाटिल ने डीन से साफ करवाया था टॉयलेट
इससे पहले, 3 अक्टूबर की शाम शिवसेना सांसद हेमंत पाटिल नांदेड के अस्पताल पहुंचे और मौत के मामले पर नाराजगी जताते हुए डीन एसआर वाकोड़े से टॉयलेट साफ करवाया। घटना का फोटो और वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने हेमंत पाटिल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
शंकरराव चव्हाण में 70 मरीजों की हालत गंभीर, अस्पता में जगह नहीं
नांदेड़ के शंकरराव चव्हाण सरकारी अस्पताल में जिन 38 लोगों की मौत हुई, उनमें 16 बच्चे थे। इस अस्पताल में 30 सितंबर की रात से मौतों का सिलसिला जारी है। यहां अभी भी 70 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है, इनमें 38 नवजात हैं। फिलहाल अस्पताल में 138 नवजातों का इलाज चल रहा है। नांदेड अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई में 65 बच्चे भर्ती हैं, जबकि क्षमता केवल 24 बच्चों की है। हॉस्पिटल में 500 बेड की व्यवस्था है, लेकिन 1200 मरीज भर्ती हैं।
42 बेड की व्यवस्था, स्टाफ की छुट्टियां रद
मरीजों के परिजन का आरोप है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही की वजह से मरीजों की मौत हो रही है। शंकरराव चव्हाण अस्पताल के अधीक्षक डॉ. गणेश मनुरकर ने बताया कि गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए खास प्रयास किए जा रहे हैं। नवजातों के लिए 42 बेड की व्यवस्था की गई, जो स्टाफ छुट्टी पर हैं उन्हें वापस बुलाया गया है। बाकी स्टाफ की छुट्टियां रद कर दी गई हैं।
70-80 किमी के दायरे में एक सरकारी अस्पताल
अस्पताल के डीन ने बताया था कि पिछले 24 घंटों में 6 लड़के और 6 लड़कियों की मौत हुई है। हम थर्ड लेवल के देखभाल केंद्र हैं और 70 से 80 किलोमीटर के दायरे में एकमात्र सरकारी अस्पताल हैं। इसलिए दूर-दूर से मरीज हमारे पास आते हैं। डीन ने बताया कि हमें हाफकिन नाम के एक संस्थान से दवाइयां खरीदनी थीं, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
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