संविधान दिवस: मोदी ने कहा- एक पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति में, ये चिंता की बात

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संविधान दिवस: मोदी ने कहा- एक पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति में, ये चिंता की बात

नई दिल्ली. 26 नवंबर को संविधान दिवस है। 1949 में आज ही के दिन संविधान को स्वीकार किया गया था। इस मौके पर संसद के सेंट्रल हॉल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा कि भारत एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहा है, जो संविधान को समर्पित लोगों के लिए चिंता का विषय है। पारिवारिक पार्टियां लोकतंत्र (Democracy) के प्रति आस्था रखने वालों के लिए चिंता का विषय हैं। कांग्रेस का नाम लिए बगैर पीएम ने कहा कि योग्यता (Merit) के आधार पर एक परिवार (One Family) से एक से अधिक लोग जाएं, इससे पार्टी परिवारवादी नहीं बन जाती, लेकिन एक पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति में है। एक राजनीतिक दल, पार्टी- फॉर द फैमिली, पार्टी- बाय द फैमिली...आगे कहने की जरूरत नहीं लगती।

अच्छा होता कि कर्तव्य पर बल दिया जाता

मोदी ने कहा कि जब राजनीतिक दल अपना लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो देते हैं तो संविधान की भावना को चोट पहुंचती है। जो दल स्वयं लोकतांत्रिक कैरेक्टर खो चुके हों, वो लोकतंत्र की रक्षा कैसे कर सकते हैं। महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन में आधिकारों को लिए लड़ते हुए भी, कर्तव्यों के लिए तैयार करने की कोशिश की थी। अच्छा होता अगर देश के आजाद होने के बाद कर्तव्य पर बल दिया गया होता।

जिन्होंने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, उन्हें नमन

मोदी ने ये भी कहा कि आज डॉ. अंबेडकर, राजेंद्र प्रसाद, पूज्य बापू को नमन करने का दिन है। आजादी के लिए जिन्होंने अपने आपको खपाया, उन सबको नमन करने का दिन है। आज 26/11 दुखद दिन है, जब देश के दुश्मनों ने देश के भीतर आकर मुंबई में आतंकी घटना को अंजाम दिया।  देश के सामान्य नागरिक की सुरक्षा की जिम्मेदारी के तहत हमारे वीर जवानों ने आतंकियों से लोहा लेते-लेते सर्वोच्च बलिदान दिया। आज उन बलिदानियों को भी आदर पूर्वक नमन करता हूं। 

संसद में मर्यादापूर्ण व्यवहार करें- स्पीकर

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि हमारे प्रगतिशील संविधान को दुनिया में हर जगह सम्मान व प्रेरणा के स्रोत के रूप में देखा जाता है। संविधान ने नागरिकों के लिए न्याय की व्यवस्था की है। संसद में हम देश की 135 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। यहां पर होने वाले चिंतन से जो अमृत निकलेगा, उसे आमजन के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। जरूरत इस बात की है कि संसद में हम मर्यादा का व्यवहार करें। 

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