Andaman Nikobar Former chief secretary जितेंद्र नारायण की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। job for sex racket मामले में मिले अहम सुबूत।
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अंडमान के पूर्व चीफ सेक्रेटरी के घर में लाई गईं थी 20 से अधिक महिलाएं, नौकरी के बदले सेक्स’ रैकेट का अंदेशा, SIT को मिले सुबूत

Vivek Sharma
Oct 27, 2022 01:16 PM

ANDAMAN NIKOBAR. सामूहिक बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले में अंडमान निकोबार द्वीप के पूर्व मुख्य सचिव, जितेंद्र नारायण और श्रम आयुक्त आरएल ऋषि के खिलाफ एसआईटी को सबूत मिले हैं। आरोपों  की जांच कर रही एसआईटी को सेक्स रेकैट के सबूत मिले हैं। जितेंद्र नारायण पर 21 वर्षीय एक युवती ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। यह सबूत कथित जॉब-फॉर-सेक्स रैकेट की ओर इशारा करते हैं। एसआईटी ने मुख्य गवाह के बयान भी दर्ज किए हैं।  जांच अधिकारियों को पता चला है कि 20 से अधिक महिलाओं को उनके साल भर के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर पोर्ट ब्लेयर में नारायण के आवास पर ले जाया गया और उनमें से कुछ को यौन शोषण के एवज में नौकरी भी दी गई। नारायण के 28 अक्टूबर को एसआईटी के सामने पेश होने की उम्मीद है। कोलकाता हाई कोर्ट ने उनकी उपस्थिति के लिए अंतिम तिथि निर्धारित की है। 

17 अक्टूबर को किया था सस्पेंड

नारायण को 17 अक्टूबर को गृह मंत्रालय के आदेश पर निलंबित कर दिया गया था और 14 नवंबर तक उनको अंतरिम जमानत दी गई थी। वहीं एल ऋषि को भी निलंबित कर दिया गया है और पोर्ट ब्लेयर में जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनके नाम पर गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। 18 अक्टूबर को, अंडमान और निकोबार पुलिस की एक टीम दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ नई दिल्ली में नारायण के आवास पर पहुंची और उन्हें एसआईटी के सामने पेश होने का नोटिस दिया। जब वह अपने आवास पर नहीं थे, तब पुलिस टीम ने लैपटॉप और मोबाइल फोन सहित इलेक्ट्रॉनिक सबूत एकत्र किए और फोरेंसिक जांच के लिए पोर्ट ब्लेयर ले गए। 


पीड़ित महिला ने एसआईटी को दिए सबूत

पीड़ित महिला ने एसआईटी को जो सबूत दिए हैं उसके मुताबिक आरोप सही होने की तरफ इशारा कर रहे हैं। दोनों अधिकारियों के कॉल डेटा रिकॉर्ड आपस में मैच हो रहे हैं। मुख्य सचिव के घर में मौजूद सीसीटीवी कैमरा सिस्टम के डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) की हार्ड डिस्क को पूरी तरह से डिलीट कर दिया गया है। पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी और एक स्थानीय सीसीटीवी विशेषज्ञ ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के कथित डिलीट होने की पुष्टि की है।

सबूतों के साथ छेड़छाड़

जितेंद्र नारायण की जमानत याचिका के खिलाफ बहस करते हुए, अंडमान और निकोबार को ओर से वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के सामने कहा था कि पीड़ित के बयान की एक ‘संरक्षित गवाह’ और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से पुष्टि हुई है। 20 अक्टूबर को आए आदेश में ये भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता जितेंद्र नारायण की ओर से सबूतों से कई बार छेड़छाड़ भी की गई है।

नारायण ने आरोपों से किया इंकार

वहीं इन सब आरोपों से इंकार करते हुए नारायण ने गृह मंत्रालय और अंडमान निकोबार प्रशासन को पत्र भी लिखा. इसमें कहा है कि उनके खिलाफ ये एक साजिश है और दावा किया कि उनके पास विशिष्ट सामग्री है जो मामले की नकली प्रकृति को साबित करती है। अधिकारी ने FIR में दी गई दो तारीखों में से एक पर पोर्ट ब्लेयर में अपनी मौजूदगी को चुनौती दी है और नई दिल्ली में अपनी उपस्थिति दिखाने के लिए हवाई टिकट और नियुक्ति कार्यक्रम का हवाला दिया है। दूसरी ओर बुधवार को उनके वकीलों ने उस सबूत को नष्ट करने की आशंका के साथ सत्र न्यायालय में एक याचिका दायर की। 

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