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Dehradun. मप्र समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ताकत झोंक दी है। मप्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रियंका गांडी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई दिग्गज नेता संभाएं और प्रचार में जुटे हैं। इस बीच खबर आई है कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी रविवार (5 अक्टूबर) को बाबा केदारनाथ की शरण में पहुंच रहे हैं। एक ओर चुनाव प्रचार चरम पर है और तभी राहुल की तीन दिवसीय केदारनाथ धाम की निजी आध्यात्मिक यात्रा के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति का दांव बता रहे हैं तो वहीं कांग्रेस इसे बाबा केदारनाथ के सिर्फ दर्शन की लालसा। मालूम हो, पीएम मोदी अक्सर केदारनाथ धाम जाते हैं और योग करते हैं।
कहीं मोदी के आक्रामक प्रचार का ये जवाब तो नहीं?
राहुल के इस दौरे को सॉफ्ट हिंदुत्व की कांग्रेस की रणनीति से जोड़ा जा ही रहा है, साथ में चुनावी राज्यों में प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के आक्रामक प्रचार के सामने राहुल की जवाबी राजनीति के रूप में देखा जा रहा है। बाबा केदार से गहरा जुड़ाव रखने वाले मोदी प्रतीकों की राजनीति के महारथी के रूप में कांग्रेस की कठिनाई बढ़ाते रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि हिंदुत्व के मुद्दे को कांग्रेस फिर हवा देने की तैयारी में है। इसमें राम मंदिर का एजेंडा भी शामिल रहेगा।
ऐसा है राहुल गांधी का कार्यक्रम
राहुल गांधी केदारनाथ धाम की तीन दिनी यात्रा के क्रम में दिल्ली से हवाई सेवा से रविवार को जौलीग्रांट हवाई अड्डे पहुंचेंगे। वहां से वह हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम जाएंगे। रविवार और सोमवार की रात्रि केदारनाथ में ही प्रवास करेंगे। राहुल के लिए रविवार को केदारनाथ में गढ़वाल मंडल विकास निगम का गेस्ट हाउस बुक कराया गया है। 7 नवंबर को दोपहर लगभग दो बजे केदारनाथ धाम से वापसी का कार्यक्रम है।
पांच राज्यों में से मप्र में कांग्रेस की अलग रणनीति
यह राहुल गांधी का निजी दौरा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव के बीच राहुल गांधी के एकाएक बाबा केदारनाथ के दर्शनों के लिए पहुंचने और तीन दिन वहीं ठहरने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तैर रही हैं। कांग्रेस मध्य प्रदेश में एंटी इनकंबेंसी तो राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपने नए लुभावने चुनावी वादों पर भरोसा कर रही है।
क्या यह सॉफ्ट हिंदुत्व का दांव?
पांचों राज्यों में चुनाव प्रचार चरम पर पहुंचने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के आक्रामक चुनाव प्रचार और हिंदुत्व को लेकर भाजपा के तीखे तेवरों ने कांग्रेस नेतृत्व को नए सिरे से रणनीति पर विचार करने को विवश कर दिया है। राहुल गांधी चुनाव के मौके पर बाबा केदारनाथ के शरणागत हुए हैं, वहीं प्रियंका भी मंदिरों में दर्शन कर रही हैं।
पहली बार केदारनाथ में ठहरेंगे राहुल
ऐसा पहली बार होगा, जब वह तीन दिन केदारनाथ में ही ठहरेंगे। राहुल इससे पहले अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में भी तीन दिनी प्रवास कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने बर्तन और जूते साफ किए। मंदिर परिसर में साफ-सफाई भी की थी। स्वर्ण मंदिर के बाद राहुल का यह अन्य धार्मिक स्थल पर तीन दिनी प्रवास का दूसरा कार्यक्रम है।
विरोधी दल इसे चुनाव प्रचार से राहु का पलायन बता रहे
विरोधी धड़ा राहुल की इस यात्रा को चुनाव प्रचार से उनके पलायन के रूप में देख रहा है। दूसरा पक्ष राहुल गांधी के धर्म स्थलों पर अधिक दिन तक प्रवास को सॉफ्ट हिंदुत्व के मोर्चे पर नई तस्वीर गढ़ने का प्रयास मान रहा है। कांग्रेस को इस कवायद से चुनावी राज्यों में क्या मिलेगा, यह चुनाव परिणाम से ही पता लगेगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में इसे लेकर खुशी दिखाई दे रही है, तो वहीं बीजेपी अब और हमलावर होने की रणनीति की तैयारी में है।
कांग्रेस ने बताया यह राहुल की निजी आध्यात्मिक यात्रा
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में भी राहुल गांधी के बाबा केदारनाथ दर्शन के कार्यक्रम को उनकी निजी आध्यात्मिक यात्रा बताया है। सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से यात्रा का सम्मान करते हुए उन्हें इसे एकांत में ही पूर्ण करने देने को कहा है। संपर्क करने पर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष मथुरादत्त जोशी ने राहुल गांधी की केदारनाथ यात्रा के कार्यक्रम की जानकारी होने की पुष्टि की।
पार्टी नेताओं से दूरी रख कार्यक्रमों में भी लेंगे भाग
केदारनाथ यात्रा के दौरान राहुल गांधी प्रदेश के पार्टी नेताओं से दूरी बनाए रखेंगे। उनके कार्यक्रम की पहले से जानकारी नहीं दी गई। इस कारण प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा पहले ही रविवार और सोमवार के अपने कार्यक्रम तय कर चुके हैं। वह रविवार को पौड़ी जिले में विभिन्न कार्यक्रम में भाग लेंगे। सोमवार को वह हल्द्वानी से अल्मोड़ा रवाना होंगे।
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