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New Delhi. पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को सभी राजनीतिक दलों ताकत झोंक दी है। मतदान की शुरुआत दो राज्यों से हो रही है। आज (7 नवंबर) को छत्तीसगढ़ में और मिजोरम में मतदान होंगे। छत्तीसगढ़ में पहले चरण के तहत 20 सीटों पर मतदान होगा तो वहीं मिजोरम की सभी 40 सीटों पर आज सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू हो गई है, जो शाम 4 बजे तक चलेगी। छत्तीसगढ़ की जिन सीटों पर आज मतदान होना है, उनमें से कई सीटें नक्सल प्रभावित बस्तर डिवीजन में हैं।
छत्तीसगढ़ : 20 में से 19 पर कांग्रेस का रहा था कब्जा
छत्तीसगढ़ की 10 सीटों मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंटा में मतदान सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है और ये दोपहर 3 बजे तक चलेगा। बची हुई 10 सीटों खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी, पंडरिया, कवर्धा, बस्तर, जगदलपुर और चित्रकोट में वोटिंग सुबह 8 बजे शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलेगी। जिन 20 सीटों पर 7 नवंबर को मतदान होना है, उनमें से 19 पर कांग्रेस का कब्जा है। पार्टी ने इन 19 में से दो सीटें उपचुनाव में जीती थीं।
पहला चरण : 223 उम्मीदवार मैदान में
छत्तीसगढ़ में पहले चरण में 223 उम्मीदवार मैदान में है, जिनमें से 25 महिलाएं हैं। इस चरण में राज्य के 40 लाख 78 हजार 681 मतदाता वोट डालेंगे। इनमें 19 लाख 93 हजार 937 पुरुष और 20 लाख 84 हजार 675 महिलाएं हैं। इसके अलावा 69 थर्ड जेंडर भी मतदान करने वाले हैं। 5,304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 25 हजार से ज्यादा चुनान कर्मचारी तैनात रहेंगे। इन 5,304 मतदान केंद्रों में से 2,431 में वेब कास्टिंग सुविधा रहेगी।
संवेदनशील इलाकों में हेलिकॉप्टर से भेजा दल
सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और नारायणपुर जिलों में 156 मतदान दलों को हेलिकॉप्टर से भेजा गया है। बाकी जिलों में 5,148 मतदान दलों को बसों से भेजा गया है। नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के 12 विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के 40 हजार सहित कुल 60 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इन 20 सीटों में से 12 अनुसूचित जनजाति और एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। सबसे ज्यादा उम्मीदवार (29) राजनांदगांव निर्वाचन क्षेत्र में हैं तो वहीं सबसे कम (7-7) चित्रकूट और दंतेवाड़ा सीटों पर हैं।
इन दिग्गजों की किस्मत का होगा फैसला
- कांग्रेस : सत्ताधारी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सासंद दीपक बैज (चित्रकूट), मंत्री कवासी लखमा (कोंटा), मोहन मरकाम (कोंडागांव), मोहम्मद अकबर (कवर्धा) और छविंद्र कर्मा (दंतेवाड़ा) से उम्मीदवार हैं। बता दें, छविंद्र कांग्रेस के दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा के बेटे हैं।
-बीजेपी : बीजेपी से पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह मैदान में हैं, जो खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन के खिलाफ राजनंदगांव से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा चार पूर्व मंत्री लता उसेंडी (कोंडागांव सीट), विक्रम उसेंडी (अंतागढ़), केदार कश्यप (नारायणपुर) और महेश गागड़ा (बीजापुर) से मैदान में उतरे हैं। इस चरण में पूर्व आईएएस अधिकारी नीलकंठ टेकाम केशकाल से चुनाव लड़ रहे हैं।
-आप : आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी भानुप्रतापपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
- निर्दलीय : विधायक अनूप नाग कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद अंतागढ़ सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
2018 के चुनाव में BJP को मिली थी कारारी हार
2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने इन 20 सीटों में से 17 पर जीत दर्ज की थी, वहीं बीजेपी ने दो और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने एक सीट पर विजय हासिल की थी। कांग्रेस के 2018 से लेकर 2023 तक के कार्यकाल में पार्टी के पास 90 में से 71 सीटें थीं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को करारी हार दी थी।
मिजोरम : 174 उम्मीदवार चुनाव मैदान में
11 लाख की आबादी वाले मिजोरम में 40 सीटों पर इस बार कुल 8.52 लाख लोग मतदान में हिस्सा लेंगे। इसमें 4.13 लाख पुरुष, 4.39 लाख महिला शामिल हैं। इस बार कुल 174 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) और कांग्रेस ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं जबकि बीजेपी सिर्फ 21 और 73 निर्दलीय या अन्य दलों के प्रत्याशी हैं।
मिजोरम में 23 सीटों पर लड़ रही BJP
मिजोरम में पूरी 40 सीटों पर आज एक ही चरण में मतदान होना है। यहां मुख्यमंत्री जोरमथांगा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), जोरम पीपल्स मूवमेंट (जेडपीएम) और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। बीजेपी 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जो पहले 39 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के चार उम्मीदवार भी मैदान में हैं। राज्य में AAP पहली बार चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा, 27 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं।
2018 में 10 साल बाद कांग्रेस ने गंवाई थी सत्ता
मिजोरम में इससे पहले 2018 के विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। 10 साल से सत्ता में काबिज कांग्रेस को हार मिली थी और मिजो नेशनल फ्रंट ने जिम्मेदारी संभाली थी।
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