स्मार्टफोन में Aadhaar App अब जरूरी नहीं, सरकार ने क्यों बदला अपना फैसला?

Anjali Dwivedi | Apr 20, 2026, 11:53 IST
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सरकार ने स्मार्टफोन में आधार ऐप प्री-इंस्टॉल करने का प्रस्ताव वापस ले लिया है। टेक कंपनियों के विरोध और सुरक्षा चिंताओं के कारण UIDAI की इस योजना पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

News In Short

  • सरकार ने स्मार्टफोन में आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का अनिवार्य प्रस्ताव वापस लिया।
  • Apple, Google और Samsung जैसी कंपनियों ने प्राइवेसी और सुरक्षा का हवाला देकर असहमति जताई थी।
  • प्राधिकरण चाहता था कि आधार की पहुंच हर भारतीय तक आसानी से हो, जिससे वेरिफिकेशन सरल हो सके।
  • पिछले 2 साल में सरकार को 6 बार ऐसे ही तकनीकी विरोध के कारण अपने फैसले बदलने पड़े हैं।
  • कंपनियों के अनुसार, जरूरी सरकारी ऐप्स डिवाइस की परफॉरमेंस और डेटा सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।

News In Detail

भारत सरकार ने स्मार्टफोन में आधार ऐप (Aadhaar App) को लेकर चल रही बहस खत्म कर दी है। सरकार ने अपना वह प्रस्ताव वापस ले लिया है, जिसमें हर नए फोन में आधार ऐप पहले से डालना जरूरी होने वाला था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन कंपनियों और सरकार के बीच लंबी खींचतान चली, जिसके बाद मंत्रालय ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।



UIDAI ने क्या पहल शुरू की

इस साल की शुरुआत में, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को एक सुझाव दिया था। UIDAI चाहता था कि Apple, Google और Samsung जैसे बड़े स्मार्टफोन निर्माता अपने डिवाइस में आधार ऐप पहले से अपलोड करके दें।



इस पहल का मुख्य उद्देश्य 12 अंकों वाली इस डिजिटल पहचान की पहुंच को और अधिक सुगम बनाना था, जो फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन जैसी बायोमेट्रिक तकनीक पर आधारित है।



सुरक्षा और लागत के नाम पर अड़ी कंपनियां

मंत्रालय द्वारा इस प्रस्ताव का बारीकी से रिव्यू किया गया, लेकिन टेक कंपनियों का रुख कड़ा था। Apple और Samsung जैसी कंपनियों ने विशेष रूप से डिवाइस की सुरक्षा और उपयोगकर्ता की गोपनीयता को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं।



कंपनियों का तर्क था कि अनिवार्य ऐप डालने से न केवल डिवाइस की सुरक्षा में जोखिम बढ़ सकता है, बल्कि इससे उत्पादन लागत में भी इजाफा होने की संभावना है। इसी विरोध के चलते मंत्रालय ने अंत में इस योजना को रद्द करने का फैसला किया।



दो साल में छह बार पीछे हटी सरकार

दिलचस्प बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले दो वर्षों के भीतर यह छठी बार है जब सरकार ने स्मार्टफोन्स में सरकारी ऐप्स को अनिवार्य रूप से शामिल करने की कोशिश की और उसे नाकामयाबी मिली। हर बार डिवाइस निर्माताओं ने कंपैटिबिलिटी और तकनीकी बाधाओं का हवाला देकर इन प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया है।



संचार साथी की कहानी क्या है

दिसंबर के महीने में भी एक ऐसा ही वाक्या सामने आया था। उस वक्त सरकार ने स्मार्टफोन में टेलीकॉम सुरक्षा संचार साथी ऐप (Sanchar Saathi) को अनिवार्य करने का निर्देश दिया था। लेकिन उद्योग जगत के भारी विरोध और सुरक्षा चिंताओं के कारण कुछ ही दिनों के भीतर उस फैसले को भी पलटना पड़ा था।



वर्तमान में 1.34 अरब से ज्यादा भारतीय बैंकिंग और एयरपोर्ट एंट्री जैसी सेवाओं के लिए आधार का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन अब इसके ऐप के लिए उन्हें इसे मैन्युअल रूप से ही डाउनलोड करना होगा।



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