देशभर में अमूल के बाद अब Mother Dairy का दूध हुआ महंगा, जानें आपके क्षेत्र में कितने रुपए बढ़े

देश भर में अमूल दूध के दाम में बढ़ोतरी की गई है। साथ ही मदर डेयरी ने भी अपना दूध महंगा कर दिया है। दोनों ही कंपनियों ने अपने दूध की कीमत में 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।

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Sandeep Kumar
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लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे ( Lok Sabha Election Results 2024 ) कल यानी मंगलवार को आने वाले हैं, और इससे पहले ही महंगाई का तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, रविवार को अमूल दूध की कीमतों ( Amul Milk Price ) में इजाफा किया गया, तो अगले ही दिन सोमवार को मदर डेयरी ने भी अपना दूध महंगा ( Mother Dairy Milk Price Hike ) कर दिया है। दोनों ही कंपनियों ने अपने दूध की कीमत में 2 रुपए प्रति लीटर (Rs 2 per Litre) की बढ़ोतरी की है।

दो दिन में लगे महंगाई के 2 झटके



दो दिन में आम आदमी को दो बड़े झटके लगे हैं। पहले Amul Milk के दाम बढ़ाए गए और फिर Mother Dairy ने भी अपने दूध की कीमतों में इजाफा करने का ऐलान कर दिया। मदर डेयरी ने दिल्ली- एनसीआर (Delhi-NCR) के लिए दूध की कीमतों में वृद्धि की है। सभी पैकेज्ड मिल्क की कीमतों में 2 रुपए प्रति लीटर की इजाफा किया गया है। दूध के दाम की नई दरें 3 जून 2024 से लागू कर दी गई हैं। ताजा बदलाव के बाद अब आपको ये दूध नीचे दिए गए रेट पर मिलेगा।

अमूल दूध हुआ दो रुपए महंगा

अमूल दूध ( Amul milk ) के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन ( GCMMF) ने कहा है कि अमूल गोल्ड, अमूल शक्ति और अमूल फ्रेश की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। दूध की नई कीमत आज सुबह यानी 3 जून से लागू हो गई हैं। फेडरेशन ने रविवार ( 2 मई ) को लेटर जारी कर बताया कि, ऑपरेशन और प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने के कारण दूध के दाम बढ़ाए जा रहे हैं। बताया गया कि, इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण हमारी मेंबर यूनियनों ने किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 6-8% की बढ़ोतरी की है। अमूल उपभोक्ताओं की ओर से भुगतान किए गए प्रत्येक रुपए में से लगभग 80 पैसा दूध उत्पादकों को देता है।

पिछली बार फरवरी-2023 में बढ़ाए थे दाम

अमूल ने दूध की कीमतों में 15 महीने बाद बढ़ोतरी की है। इससे पहले फरवरी 2023 में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। दूध की कीमतें बढ़ाने को लेकर अमूल ने कहा था कि, 'पिछले साल की तुलना में पशु चारे की कीमत ही करीब 20% बढ़ चुकी है। इनपुट लागत में बढ़ने के कारण हमारी मेंबर यूनियन ने किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमतों में 2022 की तुलना में 8-9% की बढ़ोतरी की है।'

देखें कितने दाम बढ़े

amul milk price hike

अमूल का मॉडल तीन लेवल पर काम करता है

  1. डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी
  2. डिस्ट्रिक्ट मिल्क यूनियन
  3. स्टेट मिल्क फेडरेशन

 

 

लाखों लीटर दूध कैसे इकट्ठा होता है?



1. गुजरात के 33 जिलों में 18,600 मिल्क को-ऑपरेटिव सोसाइटीज और 18 डिस्ट्रिक्ट यूनियन हैं। इन सोसाइटीज से 36 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं, जो दूध का उत्पादन करते हैं।

2. दूध को इकट्ठा करने के लिए सुबह 5 बजे से ही चहल-पहल शुरू हो जाती है। किसान मवेशियों का दूध निकालते हैं और केन्स में भरते हैं। इसके बाद दूध को कलेक्शन सेंटर पर लाया जाता है।

3. सुबह करीब 7 बजे तक कलेक्शन सेंटर पर किसानों की लंबी लाइन लग जाती है। सोसाइटी वर्कर दूध की मात्रा को नापते हैं और फैट कंटेंट भी नापा जाता है। ये सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमेटेड होता है।

 4. हर किसान के दूध के आउटपुट को कंप्यूटर में सेव किया जाता है। किसानों की आमदनी दूध की मात्रा और फैट कंटेंट पर निर्भर करती है। किसानों को हर महीने एक निश्चित तारीख पर पेमेंट किया जाता है।

5. किसानों के लिए एक ऐप भी बनाया गया है, जिसमें उन्हें दूध की मात्रा और फैट से लेकर पेमेंट की जानकारी मिलती है। पेमेंट सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है।

अमूल से जुड़े अन्य तथ्य

1. अमूल के पिरामिड मॉडल में सबसे नीचे मिल्क प्रड्यूसर्स आते हैं। खर्च होने वाले हर एक रुपए में से करीब 86 पैसे उसके मेंबर को जाते हैं और को-ऑपरेटिव बिजनेस चलाने के लिए 14 पैसे रखे जाते हैं। क्वांटिटी ज्यादा होने से ये रकम बहुत बड़ी हो जाती है।

2. डिस्ट्रिक्ट मिल्क यूनियन का प्रमुख चेयरमैन होता है, जो हर महीने मीटिंग करता है। यहां ये लोग को-ऑपरेटिव बिजनेस का जायजा लेते हैं। इसमें एक्सपेंशन प्लान, नई मशीनरी खरीदने और सदस्यों को बोनस देने जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है।

3. प्रोडक्टिविटी में सुधार लाने के लिए मवेशियों की सेहत का ध्यान रखा जाना भी जरूरी है। इसलिए, को-ऑपरेटिव मेंबर को मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें मवेशियों की देख-रेख कैसे करें और अन्य चीजें बताई जाती हैं। ट्रेनिंग प्रोग्राम से किसानों की बड़ी मदद होती है।

4. मवेशियों को दिन में तीन बार चारा और न्यूट्रिएंट्स दिया जाता है। यहां कैटल फीड प्लांट लगाए गए हैं। प्रोटीन, फैट, मिनरल को मिलाकर मवेशियों के लिए चारा बनता है। चारे बनाने वाले प्लांट की मशीनरी को डेनमार्क से इंपोर्ट किया गया है।

5. किसानों के लिए सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की भी सुविधा है। को-ऑपरेटिव नए इक्विपमेंट खरीदने के लिए किसानों को सब्सिडी देती है। जैसे दूध निकालने वाली ऑटोमेटिक मशीन 40 हजार की आती है। सब्सिडी से इसका दाम आधा हो जाता है।

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