जहां थे 48 CA, वहां अंशुल ने कपड़े धोकर खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्य, जानें Quick Clean लॉन्ड्री स्टार्टअप की कहानी
Anjali Dwivedi | Mar 30, 2026, 16:46 IST
anshul gupta quick clean laundry success story
CA परिवार से ताल्लुक रखने वाले अंशुल गुप्ता ने अमेरिका से प्रेरणा लेकर भारत में प्रोफेशनल लॉन्ड्री इंडस्ट्री खड़ी कर दी। करीब 14 लाख से शुरू हुई Quick Clean आज 200 करोड़ रुपए की कंपनी बन चुकी है।
अंशुल गुप्ता के परिवार में कुल 48 सदस्य Chartered Accountant हैं। उन्होंने अमेरिका में प्रोफेशनल लॉन्ड्री सिस्टम देखकर भारत में यही शुरू किया। साल 2010 में 14 लाख की पूंजी से Quick Clean Laundry Systems शुरू हुई। आज कंपनी 36 शहरों में फैली है और 750 से ज्यादा लोग काम करते हैं। Quick Clean की मौजूदा वैल्यूएशन करीब 200 करोड़ रुपए है।
जब
दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार की कल्पना कीजिए, जहां घर के 48 सदस्य CA हों। हर तरफ बैलेंस शीट, ऑडिट और टैक्स की चर्चाएं। ऐसे माहौल में पला-बढ़ा एक लड़का, जिसका नाम है अंशुल गुप्ता। सबको उम्मीद थी कि वो भी वही रास्ता अपनाएंगे। लेकिन अंशुल के मन में कुछ और ही चल रहा था।
अंशुल खुद भी CA की पढ़ाई से जुड़े थे। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से उनकी शिक्षा हुई, लेकिन किताबों के बाहर की दुनिया उन्हें ज्यादा खींचती थी।
एक बार जब अंशुल अमेरिका गए, तो वहां उन्होंने कुछ ऐसा देखा जिसने उनकी सोच पलट दी। बड़े- बड़े कॉइन-ऑपरेटेड लॉन्ड्रोमैट चल रहे थे। होटल, अस्पताल और कंपनियां इन पर पूरी तरह निर्भर थीं।
अंशुल के मन में एक ही सवाल उठा, यह सिस्टम भारत में क्यों नहीं है? उन्होंने बाजार का गहरा अध्ययन किया। उन्हें पता चला कि भारत में लॉन्ड्री सेक्टर ज्यादातर असंगठित है। यहां एक बड़ी जरूरत थी और कोई ढंग का समाधान नहीं।
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साल 2010 में अंशुल गुप्ता ने अपने भाई अंकुर गुप्ता के साथ मिलकर गुरुग्राम से Quick Clean Laundry Systems की नींव रखी। यह भारत का पहला कॉइन-ऑपरेटेड लॉन्ड्रोमैट था। शुरुआती पूंजी महज 14 लाख रुपए थी। छोटी सी जगह, कुछ मशीनें और एक बड़ा सपना।
बेल्जियम की कंपनी Primus से 6 किलोग्राम क्षमता की 10 कॉइन-ऑपरेटेड मशीनें मंगवाई गईं। दिल्ली में दो आउटलेट खुले, हर एक करीब 500 वर्गफुट में। ग्राहकों को टोकन कॉइन दिया जाता था।
शुरुआत में लोगों को समझाना मुश्किल था। कपड़े धोने को लोग बिजनेस नहीं मानते थे। रिजेक्शन भी मिला, शक भरी निगाहें भी, मगर पर अंशुल डटे रहे।
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एक साल में 45
पहले ही साल में Quick Clean ने 45 फ्रेंचाइजी तक विस्तार कर लिया। यह किसी के लिए भी हैरान करने वाला था। धीरे-धीरे कंपनी ने अपनी पहचान बनाई। इसके बाद Electrolux Professional के साथ साझेदारी हुई।
एनर्जी-एफिशिएंट (Energy Efficient) गैस-बेस्ड मशीनें भारत लाई गईं। फिर Marriott और Taj जैसे बड़े होटलों तक सेवाएं पहुंचीं। भारतीय सैन्य अकादमी के लिए भी ऑन-प्रिमाइस लॉन्ड्री का बड़ा प्रोजेक्ट पूरा किया गया।
यह तब था जब Quick Clean सिर्फ कपड़े धोने की कंपनी नहीं रही। अंशुल ने महसूस किया कि अस्पतालों में लिनेन (Linen) यानी चादरें, तकिए के कवर और यूनिफॉर्म की सफाई सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी है।
अंशुल गुप्ता ने खुद कहा, जब बात किसी मरीज या ग्राहक की हो, तो समझौते की कोई गुंजाइश नहीं। लिनेन की गुणवत्ता और स्वच्छता को उन्नत प्रक्रियाओं, नई रसायन विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
Alkemi Growth Capital की संस्थापक अल्का गोयल ने कहा कि यह निवेश स्वास्थ्य सेवा के मानकों और संक्रमण रोकथाम को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। उन्नत लॉन्ड्री समाधान अस्पताल में होने वाले संक्रमणों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
Blue Ashva Capital के संस्थापक सत्य बंसल ने कहा कि होटलों के लिए लॉन्ड्री-एज-ए-सर्विस (Laundry-as-a-Service) एक जरूरी लेकिन गैर-मुख्य गतिविधि है, और Quick Clean की बाजार में मजबूत स्थिति इसे इस क्षेत्र में भुनाने के लिए अच्छी स्थिति में रखती है।
आज Quick Clean 36 शहरों में फैली हुई है। टीम में 750 से ज्यादा अनुभवी प्रोफेशनल हैं। कंपनी का सालाना रिकरिंग रेवेन्यू (ARR - Annual Recurring Revenue) 80 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।
कंपनी की मौजूदा वैल्यूएशन 200 करोड़ रुपए है। हाल ही में Quick Clean ने Alkemi Growth Capital और Blue Ashva Capital की अगुवाई में 50 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाई। इसके साथ ही 10 करोड़ रुपए की क्रेडिट लाइन भी मिली।
कंपनी ने Electrolux Professional, Trevil, Rinnai जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों को भारत लाने का काम भी किया। Quick Clean देश का एकमात्र राष्ट्रीय ब्रांड है जिसका इतना व्यापक नेटवर्क है।
अंशुल की कहानी सिर्फ एक बिजनेस की सफलता नहीं है। यह एक ऐसे इंसान की कहानी है जिसने परिवार की उम्मीदों और समाज के दबाव के बावजूद अपना रास्ता खुद चुना। जहां 48 CA थे, वहां उन्होंने मशीनों और साबुन के बुलबुलों में अपना भविष्य देखा।
भारत में इस समय 2.75 लाख स्टार होटल रूम और 14.5 लाख अस्पताल बेड हैं। इन सबके लिए प्रोफेशनल लिनेन मैनेजमेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है। अंशुल ने उस बाजार को पहले देखा जो दूसरों को नजर नहीं आया था। कभी-कभी सबसे बड़ा मौका वहीं होता है, जहां लोग देखना नहीं चाहते।
अंशुल गुप्ता की कहानी युवा भारतीयों के लिए एक जरूरी संदेश है। ऐसे समय में जब अधिकांश युवा सरकारी नौकरी या पारंपरिक करियर की ओर दौड़ते हैं, यह कहानी बताती है कि रोजमर्रा की जरूरतों में भी करोड़ों का बिजनेस छुपा हो सकता है।
Quick Clean ने सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं बनाया, बल्कि एक पूरी इंडस्ट्री को संगठित करने का काम किया। यह कंपनी अस्पतालों में संक्रमण रोकने में भी भूमिका निभा रही है, जो सीधे जन-स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है।
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जब CA परिवार में लॉन्ड्री का सपना पला
अंशुल खुद भी CA की पढ़ाई से जुड़े थे। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से उनकी शिक्षा हुई, लेकिन किताबों के बाहर की दुनिया उन्हें ज्यादा खींचती थी।
अमेरिकी दौरे ने बदली सोच
अंशुल के मन में एक ही सवाल उठा, यह सिस्टम भारत में क्यों नहीं है? उन्होंने बाजार का गहरा अध्ययन किया। उन्हें पता चला कि भारत में लॉन्ड्री सेक्टर ज्यादातर असंगठित है। यहां एक बड़ी जरूरत थी और कोई ढंग का समाधान नहीं।
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14 लाख से हुई शुरुआत
बेल्जियम की कंपनी Primus से 6 किलोग्राम क्षमता की 10 कॉइन-ऑपरेटेड मशीनें मंगवाई गईं। दिल्ली में दो आउटलेट खुले, हर एक करीब 500 वर्गफुट में। ग्राहकों को टोकन कॉइन दिया जाता था।
शुरुआत में लोगों को समझाना मुश्किल था। कपड़े धोने को लोग बिजनेस नहीं मानते थे। रिजेक्शन भी मिला, शक भरी निगाहें भी, मगर पर अंशुल डटे रहे।
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एक साल में 45 फ्रेंचाइजी
एनर्जी-एफिशिएंट (Energy Efficient) गैस-बेस्ड मशीनें भारत लाई गईं। फिर Marriott और Taj जैसे बड़े होटलों तक सेवाएं पहुंचीं। भारतीय सैन्य अकादमी के लिए भी ऑन-प्रिमाइस लॉन्ड्री का बड़ा प्रोजेक्ट पूरा किया गया।
अस्पताल और स्वास्थ्य क्षेत्र में कदम
अंशुल गुप्ता ने खुद कहा, जब बात किसी मरीज या ग्राहक की हो, तो समझौते की कोई गुंजाइश नहीं। लिनेन की गुणवत्ता और स्वच्छता को उन्नत प्रक्रियाओं, नई रसायन विज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
Alkemi Growth Capital की संस्थापक अल्का गोयल ने कहा कि यह निवेश स्वास्थ्य सेवा के मानकों और संक्रमण रोकथाम को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। उन्नत लॉन्ड्री समाधान अस्पताल में होने वाले संक्रमणों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
Blue Ashva Capital के संस्थापक सत्य बंसल ने कहा कि होटलों के लिए लॉन्ड्री-एज-ए-सर्विस (Laundry-as-a-Service) एक जरूरी लेकिन गैर-मुख्य गतिविधि है, और Quick Clean की बाजार में मजबूत स्थिति इसे इस क्षेत्र में भुनाने के लिए अच्छी स्थिति में रखती है।
कितने शहरों में फैली है कंपनी?
कंपनी की मौजूदा वैल्यूएशन 200 करोड़ रुपए है। हाल ही में Quick Clean ने Alkemi Growth Capital और Blue Ashva Capital की अगुवाई में 50 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाई। इसके साथ ही 10 करोड़ रुपए की क्रेडिट लाइन भी मिली।
कंपनी ने Electrolux Professional, Trevil, Rinnai जैसी वैश्विक तकनीकी कंपनियों को भारत लाने का काम भी किया। Quick Clean देश का एकमात्र राष्ट्रीय ब्रांड है जिसका इतना व्यापक नेटवर्क है।
भीड़ से अलग रास्ते की ताकत
भारत में इस समय 2.75 लाख स्टार होटल रूम और 14.5 लाख अस्पताल बेड हैं। इन सबके लिए प्रोफेशनल लिनेन मैनेजमेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है। अंशुल ने उस बाजार को पहले देखा जो दूसरों को नजर नहीं आया था। कभी-कभी सबसे बड़ा मौका वहीं होता है, जहां लोग देखना नहीं चाहते।
यह खबर क्यों जरूरी है?
Quick Clean ने सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं बनाया, बल्कि एक पूरी इंडस्ट्री को संगठित करने का काम किया। यह कंपनी अस्पतालों में संक्रमण रोकने में भी भूमिका निभा रही है, जो सीधे जन-स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है।
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