पढ़ाई के लिए शादी टाल रही हैं भारतीय महिलाएं, बढ़ी औसतन उम्र, देखें SRS Marriage Report 2026
भारत में शादी को केवल मिलन नहीं बल्कि संस्कार मानते हैं। बदलते वक्त के साथ लोगों की सोच भी बदल गई है। हाल ही में शादी की उम्र पर नए आंकड़े आए हैं।
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम ने कई चौंकाने वाले तथ्य पेश किए हैं। अब बेटियों की शादी केवल परंपरा का हिस्सा नहीं रही। लड़कियां अब शिक्षा और करियर को अधिक जोर दे रही हैं।
आत्मनिर्भर बनने के बाद ही वे शादी का फैसला लेती हैं। कुछ राज्यों में महिलाएं बहुत देर से शादी कर रही हैं। वहीं कुछ इलाकों में पुरानी सामाजिक बेड़ियां अभी मौजूद हैं।
क्या कहता हैं SRS आंकड़ें
एसआरएस (SRS रिपोर्ट) की नई रिपोर्ट एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। अब भारत में बेटियों की शादी की उम्र (girls marriage age) बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार शादी की औसत उम्र 23 साल है।
सटीक तौर पर यह आंकड़ा अब 22.9 साल पहुंच गया है। यह समाज में आ रहे बड़े बदलाव का सुखद संकेत है। अब लोग बेटियों को बोझ मानने की पुरानी सोच छोड़ रहे हैं। लड़कियां अब शादी से पहले पढ़ाई और करियर पर ध्यान देती हैं।
माता-पिता भी अब बेटियों की शिक्षा को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। देर से शादी होने से महिलाएं अब ज्यादा आत्मनिर्भर बन रही हैं।
MP की लड़कियों ने माना 21 की उम्र ही सही
मध्यप्रदेश की ज्यादातर लड़कियां अब शादी की उम्र बढ़ाने के पक्ष में हैं। एक सर्वे के मुताबिक करीब 70 फीसदी महिलाएं नए कानून को सही मानती हैं। बड़े शहरों में तो 75 फीसदी युवतियों ने इस पर अपनी सहमति दी है। ग्रामीण इलाकों में भी 64 प्रतिशत महिलाएं इस बदलाव के साथ हैं। लड़कियों का मानना है कि 21 साल की उम्र ही सही है।
इससे उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने का पूरा मौका मिलेगा। साथ ही सही जीवनसाथी चुनने की समझ भी बेहतर तरीके से आएगी। सर्वे में 15 से 30 साल की युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
हालांकि करीब 29 फीसदी महिलाएं इस नए कानून के खिलाफ भी दिखीं। गांवों की कुछ लड़कियां आज भी 18 साल को सही मानती हैं। बैतूल और धार जैसे जिलों में भी भारी समर्थन देखने को मिला। राजगढ़ और मुरैना में भी आधे से ज्यादा महिलाएं इसके पक्ष में हैं।
राजस्थान में शादी की औसतन उम्र 22 साल
राजस्थान की महिलाएं मुख्य रूप से 20-23 साल की उम्र के आसपास शादी करती हैं। हालांकि, SRS रिपोर्ट के अनुसार राज्य में mean age at effective marriage राष्ट्रीय औसत (22.9 साल, 2023) के करीब या थोड़ा कम है।राजस्थानमें child marriage (18 से पहले) की दर अब West Bengal (6.3%) और Jharkhand (4.6%) जैसी टॉप states से कम है, यानी ज्यादातर महिलाएं 18+ उम्र में शादी कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ के आंकड़े
छत्तीसगढ़ की महिलाएं मुख्य रूप से 21-23 साल की उम्र में शादी करती हैं, पर SRS Statistical Report 2023 के अनुसार राज्य में 18 साल से कम उम्र में शादी की दर अभी भी अच्छी है (राष्ट्रीय औसत 2.1% के मुकाबले Chhattisgarh टॉप states में शामिल है)। राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की प्रभावी शादी की औसत उम्र (Mean Age at Effective Marriage) 22.9 साल (2023) है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह औसत राष्ट्रीय औसत से थोड़ा कम रहता है और ग्रामीण क्षेत्रों में और भी कम है।
जागरूकता का बढ़ता स्तर
पिछले एक दशक के डेटा की तुलना की जाए, तो यह साफ होता है कि शादियों की उम्र में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे का कारण 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान और महिलाओं की श्रम बल में बढ़ती भागीदारी (Women's Participation in Labor Force) को माना जा रहा है।
देर से शादी करने में कश्मीर सबसे आगे
रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़े उत्तर भारत से आए हैं। यहां शिक्षा और स्वावलंबन को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके कारण शादी की औसत उम्र काफी अधिक है।
- जम्मू और कश्मीर (Jammu-Kashmir): इस केंद्र शासित प्रदेश में महिलाएं औसतन 26.3 साल की आयु में शादी कर रही हैं, जो देश में सबसे अधिक है।
- दिल्ली (Delhi): देश की राजधानी में आधुनिक जीवनशैली और करियर की प्राथमिकता के चलते औसत उम्र 24.6 साल दर्ज की गई है।
- हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh): पहाड़ी राज्य हिमाचल इस सूची में तीसरे स्थान पर है, जहाँ औसत आयु 24.5 साल है।
कच्ची उम्र में हो रही शादी
उत्तर भारत से उलटा, देश के पूर्वी हिस्सों में आज भी बेटियों की शादी काफी कम उम्र में कर दी जाती है। इन राज्यों में सामाजिक परंपराएं और आर्थिक पिछड़ापन (Economic Backwardness) आज भी लड़कियों के विकास में बाधक बन रहे हैं।
| राज्य (State) | औसत शादी की उम्र (Average Marriage Age) |
| पश्चिम बंगाल | 21.3 साल |
| झारखंड | 21.5 साल |
| बिहार | 21.6 साल |
पूर्वी भारत के इन राज्यों में कम उम्र में शादी होने के पीछे की वजह जागरूकता की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में फैली पुरानी सामाजिक कुरीतियां हैं। यहां लड़कियों को जल्दी विदा करना आज भी एक सामाजिक जिम्मेदारी माना जाता है।
देर से शादी के फायदे
- बेहतर स्वास्थ्य: देर से शादी और गर्भधारण से मातृ मृत्यु दर (MMR) में कमी आती है।
- आर्थिक मजबूती: पढ़ाई पूरी कर नौकरी करने वाली महिलाएं परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा योगदान देती हैं।
- जागरूक निर्णय: परिपक्व उम्र में शादी करने वाली महिलाएं अपने जीवन और बच्चों के भविष्य के बारे में बेहतर निर्णय ले पाती हैं।
क्षेत्रीय भिन्नताओं का गहरा असर
शादी की उम्र का अंतर केवल एक आंकड़ा नहीं है। यह किसी क्षेत्र के सामाजिक विकास का असली पैमाना है। जिन राज्यों में लड़कियां देर से शादी करती हैं, वहां वे अधिक मजबूत बनती हैं।
शिक्षित होने से वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहती हैं। वे आर्थिक रूप से भी अपने पैरों पर खड़ी होती हैं। इसके उलट कम उम्र में शादी विकास को रोक देती है। इससे महिलाओं के आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो जाते हैं।
21 साल में शादी होने से उनकी संभावनाएं सीमित होती हैं। सरकार को अब पिछड़े राज्यों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
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