अयोध्या राम मंदिर की दूसरी वर्षगांठ पर जानें कितना बदला प्रभु का धाम?

Kaushiki | Jan 22, 2026, 09:29 IST
ayodhya ram mandir
आज (22 जनवरी) राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ है। इस मैके पर आइए जानें मंदिर के बदलते स्वरूप, नई सुविधाओं और निर्माण की तकनीकी बारीकियों के बारे में।

अयोध्या में आज 22 जनवरी का दिन हर राम भक्त के लिए बहुत खास है। आज नवनिर्मित राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ मनाई जा रही है। 500 सालों के लंबे इंतजार के बाद ये सपना अब पूरी तरह साकार हो चुका है।



बीते दो वर्षों में राम जन्मभूमि परिसर का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। मंदिर अब पहले से कहीं ज्यादा भव्य और सुव्यवस्थित नजर आता है। आइए जानें कि इन दो सालों में राम मंदिर किसना बदल गया है।



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मंदिर का नया स्वरूप

प्राण प्रतिष्ठा के वक्त मुख्य मंदिर का कंस्ट्रक्शन पूरा नहीं हुआ था, लेकिन अब मंदिर का मेन स्ट्रक्चर और फर्स्ट फ्लोर बनकर तैयार हो चुका है। फर्स्ट फ्लोर पर प्रभु राम के पूरे परिवार की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।



मंदिर की ऊंचाई अब 161 फीट है, जो आकाश को छूने जैसी लगती है। इसके चारों ओर 800 मीटर लंबी एक बड़ी चारदीवारी बनाई गई है, जो न केवल सुरक्षा देती है, बल्कि मंदिर की खूबसूरती को भी बढ़ाती है।



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परिसर में स्थापित हुए अन्य प्रमुख देवी-देवता

राम मंदिर अब केवल एक मंदिर नहीं बल्कि एक बड़ा धार्मिक केंद्र है। मंदिर के चारदीवारी के भीतर छह और नए मंदिरों का निर्माण किया गया है। इसमें भगवान शिव, गणेश, सूर्यदेव, हनुमान, माता भगवती और अन्नपूर्णा के मंदिर शामिल हैं।



इन मंदिरों की वजह से भक्तों को एक ही जगह संपूर्ण दर्शन मिलते हैं। इसके अलावा महर्षि वाल्मीकि और शबरी माता के मंदिर भी बनकर तैयार हैं। ये मंदिर समाज के हर वर्ग को जोड़ने का एक बड़ा संदेश देते हैं।



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इंजीनियरिंग का बेमिसाल नमूना है राम मंदिर

राम मंदिर को बनाने में मॉडर्न साइंस और एंसिएंट आर्किटेक्चर का मेल है। इस मंदिर के निर्माण में एक भी लोहे की कील इस्तेमाल नहीं हुई है। लोहे का उपयोग न करने से मंदिर में कभी भी जंग नहीं लगेगी।



मंदिर की नींव को 56 परतों वाले विशेष पत्थरों से तैयार किया गया है। टाटा और एलएंडटी जैसी बड़ी कंपनियों ने मिलकर इसे मजबूती प्रदान की है। इंजीनियरों का ये दावा है कि यह मंदिर अगले एक हजार साल तक सुरक्षित खड़ा रहेगा।



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श्रद्धालुओं के लिए बढ़ाई गई आधुनिक सुविधाएं

बीते दो सालों में अयोध्या (Ayodhya Ramlala Pran Pratistha Ceremony)आने वाले भक्तों की संख्या करोड़ों में पहुंची है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सुविधाओं में बहुत बड़े बदलाव किए हैं। अब भक्तों के लिए 100 फीट चौड़ा राम जन्मभूमि पथ बनाया गया है।



धूप से बचने के लिए रास्ते में स्थायी कैनोपी और ठंडे पानी की व्यवस्था है। मंदिर परिसर में अब 25 हजार लोगों की क्षमता वाला सुविधा केंद्र मौजूद है। यहां सामान रखने के लिए लॉकर और आराम करने की जगह भी उपलब्ध है।



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वैश्विक पर्यटन और आस्था की नगरी

अयोध्या का राम मंदिर के कारण पूरी अयोध्या नगरी (अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा) का स्वरूप भी बदल गया है। यहां का रेलवे स्टेशन और इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब विश्व स्तर के बन चुके हैं। मंदिर परिसर के 107 एकड़ क्षेत्र में से 30 एकड़ में हरियाली है।



ये ग्रीन बेल्ट वातावरण (अयोध्या राम मंदिर का निर्माण) को शुद्ध और शांत बनाए रखने में मदद करती है। राम मंदिर अब सनातन संस्कृति और भारतीय वास्तुकला का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। आज की वर्षगांठ इसी गौरवमयी यात्रा के सफल दो वर्षों का उत्सव है।



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अयोध्या राम मंदिर का निर्माण

अयोध्या के भव्य राम मंदिर का निर्माण उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रभु श्री राम के जन्मस्थान पर हुआ है। इसका शिलान्यास 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।



सदियों लंबे कानूनी और धार्मिक संघर्ष के बाद, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद इसका निर्माण श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देखरेख में शुरू हुआ।



मंदिर का निर्माण प्राचीन नागर शैली में बिना लोहे के इस्तेमाल के किया गया है ताकि यह हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहे। 22 जनवरी 2024 को रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई, जो अब करोड़ों भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र बन चुका है।



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