आजमगढ़ ट्रिपल मर्डर केस: बुरी आत्मा भगाने रखी थी पूजा, पति ने पत्नी सहित दो पंडितों को मारी गोली
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां मंगलवार शाम एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी।
इतना ही नहीं इस खौफनाक कदम को उठाने के बाद आरोपी ने तीन मासूम बच्चों को एक कमरे में बंधक बना लिया था। पुलिस ने बच्चों को बचाने के लिए करीब सात घंटे तक कड़ी मशक्कत की, लेकिन अंत में हुई मुठभेड़ में आरोपी मारा गया। इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी के बेटे की भी जान चली गई है।
पूजा को लेकर शुरू हुआ था खूनी विवाद
आजमगढ़ के SSP डॉ. अनिल कुमार ने घटना के बारे में जानकारी दी। SSP ने बताया कि स्थानीय निवासी अरविंद सिंह मंगलवार शाम करीब छह बजे अपने घर वापस लौटा था।
घर पहुंचते ही उसने देखा कि उसकी 32 साल की पत्नी बबीता सिंह दो पुजारियों के साथ मिलकर घर में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करा रही थी।
सूत्रों के अनुसार घर में चल रहे इस धार्मिक कार्यक्रम को देखते ही अरविंद भड़क गया। उसने अपनी पत्नी और दोनों पुजारियों को गालियां देना शुरू कर दिया। जब पत्नी ने उसे पुजारियों का अपमान करने से रोका और विरोध किया, तो विवाद काफी बढ़ गया।
परिवार के लोगों को पहले से यह शक था कि अरविंद किसी बुरी आत्मा के साये में है। इसी वजह से उसकी मां और पत्नी ने मिलकर घर में इस विशेष पूजा का आयोजन कराया था।
मगर अरविंद इस पूजा से बेहद खफा था। गुस्से में आकर उसने अपना लाइसेंसी हथियार निकाला और सीधे अपनी पत्नी बबीता पर गोली चला दी।
इसके बाद उसने दोनों पुजारियों को भी गोली मार दी। गोलीबारी होते ही मौके पर मौजूद तीन लोग किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकले।
पुलिस को दी खुली चुनौती
तीनों लोगों की हत्या करने के बाद अरविंद ने खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया। इस कमरे में उसके अपने दो बच्चे और उसकी साली का एक बच्चा भी मौजूद था।
अरविंद ने तीनों बच्चों को बंधक (Hostage) बना लिया था। घटना की सूचना मिलते ही कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मकान को चारों तरफ से घेर लिया।
शुरुआत में पुलिस ने बड़ी समझदारी दिखाते हुए आरोपी से बातचीत का रास्ता चुना। अरविंद के परिवार वालों को भी बातचीत में शामिल किया गया ताकि वह शांत होकर बच्चों को छोड़ दे और सरेंडर कर दे।
दूसरी ओर अरविंद लगातार पुलिस और परिवार वालों को गोली मारने की धमकी देता रहा। उसने यह भी कहा कि अगर किसी ने अंदर आने की कोशिश की तो वह बच्चों को जान से मार देगा। उसने पुलिस से अगली सुबह तक इंतजार करने को कहा।
सात घंटे तक चला गतिरोध
वाराणसी जोन के ADG नवीन अरोड़ा ने बताया कि पुलिस टीम ने शुरुआत में काफी सब्र से काम लिया। करीब सात घंटे तक बातचीत के जरिए बच्चों को सही-सलामत बाहर निकालने की कोशिशें चलती रहीं।
जब आरोपी ने कमरे के अंदर से ही पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी, तब एसएसपी और एसओजी टीम के जवानों को दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना पड़ा।
कमरे में घुसने के लिए पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस के गोलों का भी सहारा लिया। अंदर पहुंचते ही अरविंद ने दोबारा पुलिस पर फायर झोंक दिया।
अपनी आत्मरक्षा और मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए पुलिस ने भी जवाबी गोलीबारी की। पुलिस की गोली लगने से अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल बेटे ने अस्पताल में तोड़ा दम
दरवाजा तोड़ने के बाद पुलिस ने सबसे पहले अरविंद के बेटे को बाहर निकाला। उसके बाद बाकी दोनों बच्चियों को भी सही-सलामत कमरे से बाहर लाया गया। कमरे से बाहर लाते ही पता चला कि बेटे को पहले से गोली लगी हुई थी।
पुलिस तुरंत तीनों बच्चों को अस्पताल लेकर गई। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन अरविंद के बेटे ने इलाज के दौरान ही दम तोड़ दिया। वहीं मुठभेड़ में घायल हुए आरोपी अरविंद की भी अस्पताल में मौत हो गई।
पुलिस अधिकारियों नेब ताया कि दोनों बच्चियां बुरी तरह सहमी हुई थीं। इतने घंटों तक कमरे में बंद रहने की वजह से वे भूख-प्यास और भारी मानसिक तनाव से जूझ रही थीं, जिनका अस्पताल में इलाज कराया गया।
पहले भी आक्रामक रहता था अरविंद का बर्ताव
एसएसपी के मुताबिक शुरुआती जांच-पड़ताल में यह बात सामने आई है कि अरविंद का रवैया अपने परिवार के साथ पहले भी काफी खराब और हिंसक रहता था। उसकी मां और पत्नी ने पहले भी उसके मारपीट करने और आक्रामक व्यवहार करने की शिकायत की थी।
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