श्रीकृष्ण, युधिष्ठिर और दुर्योधन ने की हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग, बोले- बहू-बेटियों को बचाना है
News In Short
- प्रयागराज में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की कथा चल रही है।
- बीआर चोपड़ा की महाभारत के तीन प्रमुख कलाकार सभा में पहुंचे।
- श्रीकृष्ण, युधिष्ठिर और दुर्योधन ने मंच से संबोधित किया।
- तीनों ने हिंदू राष्ट्र बनाने और धर्म रक्षा पर बात की।
- दुर्योधन ने जबरन धर्म परिवर्तन से बचने की अपील की।
News In Detail
धीरेंद्र शास्त्री की सभा में पहुंचे महाभारत के सितारे
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा चल रही है। इन दिनों यह कथा खूब चर्चा में है। इसी कथा और सभा में बीआर चोपड़ा के मशहूर धारावाहिक महाभारत के तीन प्रमुख कलाकार मंच पर पहुंचे। युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान, श्रीकृष्ण का किरदार करने वाले नितीश भारद्वाज और दुर्योधन बने पुनीत इस्सर ने सभा को संबोधित किया।
तीनों ने हिंदू धर्म की रक्षा और हिंदू राष्ट्र के विषय पर अपनी बात रखी। उनके बयानों ने सभा में मौजूद लोगों का खासा ध्यान खींचा।
दुर्योधन बोले, सतर्क रहें
दुर्योधन का किरदार निभाने वाले पुनीत इस्सर ने कहा कि ऐसी सभाएं देखकर लगता है कि हिंदू जागृत है और हिंदू राष्ट्र जरूर बनेगा। उन्होंने माताओं, बहनों और भाइयों से अपील की कि अपने बच्चों को धर्म के बारे में जरूर बताएं। उन्होंने कहा कि जबरन धर्म परिवर्तन हो रहे हैं और बहू-बेटियों को बहलाया जा रहा है, इससे बचकर रहना चाहिए।
पुनीत ने यह भी कहा कि शास्त्र ज्ञान के साथ-साथ शस्त्र विद्या भी जरूरी है। उन्होंने सभी को नियमित व्यायाम करने पर भी जोर दिया।
धर्म विरोधियों का सत्यानाश हो- युधिष्ठिर
युधिष्ठिर यानी गजेंद्र चौहान ने मंच से कहा कि महाभारत सबने देखी लेकिन किया हमने। उन्होंने कहा कि धर्म के विरोध में काम करने वालों का सत्यानाश होना चाहिए। गजेंद्र ने महाभारत की एक पंक्ति का हवाला देते हुए कहा कि यदि देश को हिंदू राष्ट्र बनाना है तो यह याद रखें कि कोई भी पुत्र, पिता, परिवार, परंपरा या प्रतिज्ञा राष्ट्र से बड़ी नहीं हो सकती।
श्रीकृष्ण ने एक बार फिर दिया गीता का संदेश
श्रीकृष्ण की भूमिका के लिए मशहूर नितीश भारद्वाज ने कहा कि महाभारत आज भी चल रही है, बस अलग रूप में। उन्होंने कहा कि कलियुग में धर्म रक्षा की जरूरत फिर आ गई है। भगवद् गीता का श्लोक याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि धर्म रक्षा के समय मन में निराशा नहीं आनी चाहिए।
नितीश ने यह भी कहा कि हिंदू धर्म बांटने का काम नहीं करता और सबके बीच प्रेम होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर छत्रपति शिवाजी महाराज जैसा रूप भी धारण करना आता है।
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