15 फरवरी से पहले शुरू होगी भाजपा की आजीवन सहयोग निधि, चैक और डिजिटल पेमेंट ही मान्य

Ramanand Tiwari | Feb 08, 2026, 17:50 IST
bjp lifetime contribution
बीजेपी का आजीवन सहयोग निधि अभियान 15 फरवरी से शुरू होगा। इसमें अब केवल चेक और डिजिटल पेमेंट ही मान्य होंगे। पार्टी ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नकद चंदे पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

News in Short

  • भाजपा ने आजीवन सहयोग निधि अभियान में नकद चंदा लेने पर रोक लगाई।
  • अब चेक, UPI और ऑनलाइन ट्रांसफर से ही चंदा लिया जाएगा।
  • दिल्ली मुख्यालय ने प्रदेशों को इस बदलाव के निर्देश भेजे हैं।
  • कूपन सिस्टम बंद किया गया, पार्टी के खाते में सीधे रकम जाएगी।
  • नेताओं की चिंता, चेक बाउंस होने से परेशानी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

News in Detail

भारतीय जनता पार्टी की आजीवन सहयोग निधि का अभियान इस बार 15 फरवरी से पहले ही शुरू होने जा रहा है। लेकिन इस बार एक बड़ा बदलाव किया गया है। पार्टी के दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि अब इस अभियान में नकद चंदा बिल्कुल नहीं लिया जाएगा। यानी अब पार्टी को सहयोग देना है तो चैक या डिजिटल पेमेंट के जरिए ही देना होगा।



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दिल्ली से साफ निर्देश

पार्टी मुख्यालय ने सभी राज्यों को निर्देश भेज दिए हैं कि नकद पैसा नहीं लिया जाएगा, कूपन सिस्टम पूरी तरह बंद रहेगा। पैसा सीधे पार्टी के आधिकारिक खाते में जाएगा। पार्टी का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और हिसाब-किताब पूरी तरह साफ रहेगा।



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क्या है आजीवन सहयोग निधि?

भाजपा हर साल संगठन चलाने और गतिविधियों के लिए यह अभियान चलाती है। इसमें पार्टी कार्यकर्ता, व्यापारी और उद्योगपति, संगठन से जुड़े समर्थक,सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग और पार्टी को आर्थिक सहयोग देते हैं।



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पहले कैसे चलता था चंदा?

अब तक व्यवस्था कुछ ऐसी थी 20 हजार रुपये से ज्यादा की रकम चैक से 20 हजार रुपये तक की रकम नकद कूपन से प्रदेश संगठन कूपन छपवाता था और नकद कूपन से काम जल्दी और आसान हो जाता था।



अब क्या बदला है?

दिल्ली से आए नए निर्देश के बाद पूरा सिस्टम बदल गया है।


अब किसी भी रकम में नकद नहीं चलेगा।


चैक, UPI और ऑनलाइन ट्रांसफर ही मान्य होंगे।


कूपन छापने पर रोक लगा दी गई है।


ली गई रकम सीधे पार्टी के खाते में जाएगी।



किसे क्या जिम्मेदारी?

अभियान को सही ढंग से चलाने के लिए जिम्मेदारियां भी तय की जा रही हैं।


प्रदेश संगठन: निगरानी और रिपोर्टिंग।


जिला अध्यक्ष: जिला स्तर पर समन्वय।


मंडल अध्यक्ष: भुगतान की व्यवस्था।


बूथ स्तर के कार्यकर्ता: लोगों से संपर्क और सहयोग जुटाना।



हर राज्य में एक जैसा नियम

बीजेपी प्रदेश संगठन के सूत्रों के मुताबिक यह व्यवस्था पूरे देश में एक साथ लागू होगी। लिखित निर्देश आने के बाद पूरी कार्ययोजना बनेगी, पेमेंट की प्रक्रिया तय होगी। इसके बाद जवाबदेही भी साफ की जाएगी।



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नेताओं की चिंता भी सामने आई

हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि इससे जमीनी स्तर पर दिक्कतें बढ़ सकती हैं। उनकी चिंता है कि हर चैक का अलग हिसाब रखना पड़ेगा। बैंकिंग में समय और स्टाफ लगेगा। चैक बाउंस हुआ तो दोबारा दौड़ लगानी पड़ेगी। पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।



कूपन से काम था आसान

नेताओं का मानना है कि कूपन सिस्टम से काम जल्दी होता था। कागजी झंझट कम रहती थी। अभियान तेज़ी से आगे बढ़ता था। लेकिन अब पार्टी ने साफ कर दिया है कि सुविधा से ज्यादा पारदर्शिता जरूरी है।



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