मोबाइल ने बदला क्लास 4 के बच्चे का व्यवहार, बहन के साथ न्यूड मिला, टीचर को भी नहीं छोड़ा
गोरखपुर में एक परिवार उस समय परेशान हो गया, जब कक्षा-4 में पढ़ने वाले बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखने लगा। बच्चा कुछ महीनों से मोबाइल के लिए जिद करने लगा था। वह छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा भी हो जाता था। परिवार को अंदाजा नहीं था कि मोबाइल पर उसकी गतिविधियां इतनी चिंताजनक हो चुकी हैं।
बच्चे की मां के मुताबिक, एक दिन उन्होंने उसे सात साल की बहन के साथ न्यूड हालत में देखा। इसके बाद परिवार ने बच्चे का मोबाइल चेक किया। उसमें पोर्न चल रही थी। यह देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए।
घटना के बाद परिवार ने बच्चे को डांटने या सजा देने के बजाय उसकी स्थिति समझने की कोशिश की। बताया गया है कि बच्चे को बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर है और उसका इलाज चल रहा है।
ऑनलाइन क्लास के लिए मिला था मोबाइल
स्कूल में भी सामने आए थे चिंताजनक संकेत
जानकारी के अनुसार, करीब दो महीने पहले स्कूल से परिवार को बुलाया गया था। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि बच्चे के पास एक शिक्षिका से जुड़ी आपत्तिजनक तस्वीरें और अनुचित ड्रॉइंग मिली थीं।
स्कूल में दूसरे बच्चों से भी उसके व्यवहार के बारे में पूछा गया था। परिवार के अनुसार, बच्चों ने उसके अनुचित बातचीत करने की शिकायत की।
इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने परिवार को बच्चे की काउंसलिंग और इलाज कराने की सलाह दी। बाद में बच्चे का स्कूल से नाम भी काट दिया गया।
परिवार के लिए यह सिर्फ शरारत नहीं, मदद की जरूरत का संकेत था
बच्चे के व्यवहार से परिवार के सामने कई सवाल खड़े हो गए। मां के लिए यह समझना मुश्किल था कि जो बच्चा कुछ समय पहले तक सामान्य था, उसके व्यवहार में अचानक इतना बदलाव कैसे आ गया।
परिवार का कहना है कि बच्चे को डांटने के बजाय अब उसके इलाज पर ध्यान दिया जा रहा है। उसका शाहपुर में इलाज चल रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव को केवल जिद या शरारत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मोबाइल, इंटरनेट और बिना निगरानी के ऑनलाइन कंटेंट तक पहुंच भी बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे मामलों में माता-पिता को बच्चे से शांत तरीके से बात करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाल मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद लेनी चाहिए।
क्या है बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर?
बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर यानी BPD एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है। इसमें व्यक्ति की भावनाओं, रिश्तों और खुद को लेकर सोच में काफी उतार-चढ़ाव हो सकता है।
इसमें मूड तेजी से बदलना, बहुत ज्यादा गुस्सा या दुख महसूस करना और रिश्तों में अस्थिरता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
लेकिन किसी बच्चे के व्यवहार के आधार पर खुद से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि उसे BPD है। बच्चों में ऐसे व्यवहार के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। सही कारण केवल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की जांच के बाद ही पता चल सकता है।
बच्चों में किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
बच्चे के व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव दिखाई दे तो माता-पिता को ध्यान देना चाहिए।
लगातार चिड़चिड़ापन, अचानक बहुत ज्यादा गुस्सा या उदासी चिंता का संकेत हो सकता है। बच्चे का खुद को सबसे अलग रखना भी ध्यान देने वाली बात है।
मोबाइल को लेकर जरूरत से ज्यादा जिद करना और उसे छिपाकर इस्तेमाल करना भी अभिभावकों के लिए संकेत हो सकता है।
बच्चे की उम्र के हिसाब से अनुचित या असामान्य बातें करना भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसे किसी भी संकेत का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को कोई मानसिक बीमारी है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि बच्चे को समझने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने की जरूरत हो सकती है।
बच्चों को डांटने से पहले उनकी बात समझना जरूरी
इस मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि बच्चे के व्यवहार को देखकर परिवार सिर्फ गुस्सा नहीं हुआ। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि आखिर बच्चे के व्यवहार में इतना बदलाव क्यों आया।
आज बच्चों की जिंदगी में मोबाइल और इंटरनेट बहुत जल्दी शामिल हो रहे हैं। इसलिए माता-पिता के लिए केवल मोबाइल देना ही काफी नहीं है। बच्चे मोबाइल पर क्या देख रहे हैं, कितनी देर देख रहे हैं और किस तरह की चीजों तक उनकी पहुंच है, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है।
बच्चे के किसी गलत व्यवहार को सही नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन अगर उसके पीछे कोई मानसिक या व्यवहार संबंधी समस्या है, तो उसे समय पर पहचानकर मदद देना भी उतना ही जरूरी है।
किसी बच्चे को उसके व्यवहार के कारण हमेशा के लिए 'बुरा बच्चा' मान लेना समस्या का समाधान नहीं है। सही समय पर समझ, निगरानी और विशेषज्ञ की मदद उसके भविष्य के लिए ज्यादा जरूरी है।
FAQ
- 1. बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव क्यों आ सकता है?
मोबाइल, इंटरनेट, पारिवारिक माहौल, तनाव या दूसरी मानसिक और व्यवहार संबंधी वजहें हो सकती हैं। - 2. बच्चों में मोबाइल की ज्यादा लत के क्या संकेत हैं?
मोबाइल हमेशा अपने पास रखना, छीनने पर गुस्सा करना और छिपकर इस्तेमाल करना संकेत हो सकते हैं। - 3. क्या बच्चों में हर असामान्य व्यवहार का मतलब मानसिक बीमारी है?
नहीं। सही कारण जानने के लिए विशेषज्ञ की जांच जरूरी होती है। - 4. बच्चों को इंटरनेट से सुरक्षित कैसे रखें?
मोबाइल पर पैरेंटल कंट्रोल लगाएं, स्क्रीन टाइम तय करें और बच्चे की ऑनलाइन गतिविधियों पर उम्र के हिसाब से नजर रखें।
ये खबरें भी पढ़ें...
मोबाइल की लत से बच्चों को बचाएगा माइनर मोड, जानें क्या है
मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए बाउंसर तैनात कर रहे पैरेंट्स, जानें वजह
गेम ओवर: मोबाइल की लत ने ली 12 साल के बच्चे की जान...
बगोरखपुर | UP News | बच्चों में मोबाइल की लत | बच्चों की मोबाइल की लत | मोबाइल की लत छुड़ाने | मोबाइल की लत News