सीजेआई सूर्यकांत की सलाह: फैमिली कोर्ट में न पहनें काले चोगे, पुलिस भी यूनिफार्म में न आए- बच्चे डर जाते हैं
अदालतों का नाम आते ही जेहन में काले चोगे, पुलिस की वर्दी और एक भारी-भरकम माहौल की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या यह माहौल उन मासूम बच्चों के लिए सही है जो अपने माता-पिता के विवादों के बीच अनजाने में अदालत पहुंच जाते हैं?
सोमवार, 16 मार्च को CJI सूर्यकांत ने इसी मनोवैज्ञानिक डर की ओर ध्यान खींचते हुए कुछ अहम सुझाव दिए हैं।
काले चोगे और वर्दी से सहम जाते हैं बच्चे- CJI
दिल्ली में नए फैमिली कोर्ट परिसर के एक समारोह में सीजेआई सूर्यकांत ने बुनियादी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि फैमिली कोर्ट के पुरानी कार्यशैली में बदलाव की सख्त जरूरत है।
उनके अनुसार, जजों और वकीलों के जरिए पहने जाने वाले काले कपड़े बच्चों के मन में एक अनजाना खौफ पैदा करते हैं। सीजेआई ने सुझाव दिया कि फैमिली कोर्ट में पीठासीन अधिकारियों और वकीलों को अपनी निर्धारित वर्दी में नहीं आना चाहिए, ताकि बच्चे सहज महसूस कर सकें।
पुलिस की वर्दी भी बनती है डर की वजह
सीजेआई ने केवल वकीलों के ही नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारियों के पहनावे पर भी बात की है। उन्होंने कहा है कि पुलिस अधिकारियों को भी वर्दी में नहीं आना चाहिए। बच्चे अक्सर कानूनी उलझनों और पारिवारिक कलह के सबसे बुरे शिकार होते हैं।
ऐसे में पुलिस और अदालती पोशाक का कड़ा माहौल उनके मन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने एक नया विचार विकसित करने पर जोर दिया जहां माहौल मानवीय संबंधों को सुधारने वाला हो।
फैमिली कोर्ट नहीं, अब पारिवारिक समाधान केंद्र कहिए
सुप्रीम कोर्ट केसीजेआई सूर्यकांत ने केवल पहनावे पर ही नहीं, बल्कि इन अदालतों के नाम और उद्देश्य पर भी एक नया नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि इन न्यायालयों का उद्देश्य तर्क-वितर्क के जरिए मानवीय संबंधों को मजबूत करना है। तो क्या हम इन्हें पारिवारिक समाधान केंद्र (Family Settlement Centres) नहीं कह सकते?
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