प्याज-लहसुन को तामसिक बताने वाली याचिका पर वकील को CJI सूर्यकांत की फटकार
Anjali Dwivedi | Mar 09, 2026, 19:19 IST
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9 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने प्याज-लहसुन को तामसिक बताने वाली याचिका पर वकील को फटकार लगाई। सीजेआई ने इसे जैन समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला और अदालतों पर बोझ बढ़ाने वाला कदम बताया।
अदालतों में आमतौर पर गंभीर कानूनी मामले सुलझाए जाते हैं। लेकिन जब कोर्ट में कोई ऐसी याचिका लेकर पहुंचे कि प्याज-लहसुन तामसिक भोजन है या नहीं। तब न्यायधीशों का नाराज होना लाजिमी है।
आज सोमवार 9 मार्च, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसा ही अजीबो गरीब मामला सामने आया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने वकील को जमकर फटकार लगाई है। साथ ही उन्होंने पूछा कि वे जैन समुदाय की भावनाएं क्यों आहत करना चाहते हैं?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, एडवोकेट सचिन गुप्ता ने खुद पक्षकार के तौर पर एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की थी। उनकी मांग थी कि सुप्रीम कोर्ट एक विशेष कमेटी बनाने का निर्देश दे, जो इस बात की जांच करे कि क्या वाकई प्याज और लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि जैन समुदाय के लोग प्याज, लहसुन और जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियों को तामसिक मानकर नहीं खाते हैं। उन्होंने इसमें मौजूद नकारात्मक तत्वों की जांच की भी अपील की थी।
जब सीजेआई सूर्यकांत ने इस अजीबोगरीब मांग पर नाराजगी जताई, तो वकील सचिन गुप्ता ने इसे एक गंभीर समस्या करार दिया। उन्होंने दलील दी कि गुजरात में एक दंपति का तलाक (Divorce) सिर्फ इसलिए हो गया कि भोजन में प्याज का इस्तेमाल किया गया था।
हालांकि, बेंच वकील की इन दलीलों से बिल्कुल भी सहमत नहीं दिखी। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि इस तरह की याचिकाएं अदालतों का कीमती समय बर्बाद करती हैं और न्यायिक बोझ बढ़ाती हैं।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत का गुस्सा साफ नजर आया। उन्होंने कहा कि आधी रात को बिना होश में पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या वकील साहब। साथ ही वकील को चेतावनी देते हुए सीजेआई ने कहा, अगर अगली बार आप इस तरह की कोई याचिका लेकर आए, तो आप देखेंगे कि हम क्या कर सकते हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 32 का उपयोग इस तरह के गैर-जरूरी और धार्मिक भावनाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता एक वकील न होते, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाता।
दिलचस्प बात यह है कि एडवोकेट सचिन गुप्ता ने इसी दिन तीन और जनहित याचिकाएं भी पेश की थीं।
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आज सोमवार 9 मार्च, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में कुछ ऐसा ही अजीबो गरीब मामला सामने आया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने वकील को जमकर फटकार लगाई है। साथ ही उन्होंने पूछा कि वे जैन समुदाय की भावनाएं क्यों आहत करना चाहते हैं?
प्याज-लहसुन तामसिक भोजन पर जांच की मांग
याचिकाकर्ता का तर्क था कि जैन समुदाय के लोग प्याज, लहसुन और जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियों को तामसिक मानकर नहीं खाते हैं। उन्होंने इसमें मौजूद नकारात्मक तत्वों की जांच की भी अपील की थी।
प्याज की वजह से टूट गया घर
हालांकि, बेंच वकील की इन दलीलों से बिल्कुल भी सहमत नहीं दिखी। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि इस तरह की याचिकाएं अदालतों का कीमती समय बर्बाद करती हैं और न्यायिक बोझ बढ़ाती हैं।
प्याज-लहसुन पर PIL देख भड़के CJI सूर्यकांत
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 32 का उपयोग इस तरह के गैर-जरूरी और धार्मिक भावनाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता एक वकील न होते, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाता।
एक के बाद एक तीन और याचिकाएं खारिज
- पहली याचिका शराब और तंबाकू में हानिकारक तत्वों के नियमन को लेकर थी।
- दूसरी याचिका में संपत्ति का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने की मांग थी।
- तीसरी याचिका शास्त्रीय भाषाओं की घोषणा से संबंधित थी।
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