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Photograph: (the sootr)
RAIPUR. हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने नए अधिवक्ताओं को सपाट शब्दों में हकीकत बताई। “दीर्घ और फलदायी विधिक करियर का निर्वहन” विषय पर उन्होंने कहा कि न्यायालयीन प्रक्रिया भले प्रतिद्वंद्वितापूर्ण दिखे, मूल रूप से वह सहयोग से चलती है।
विश्वविद्यालय की नियमित दिनचर्या समाप्त होने की बात करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा-अब निर्णय स्वयं लेने हैं, मार्ग स्वयं बनाना है। प्रतिष्ठा किसी क्षणिक प्रसिद्धि से नहीं, समय-समर्पण-निरंतरता से अर्जित होती है।
सहयोग ही नींव
उन्होंने दोहराया कि प्रत्येक पक्ष के पीछे कनिष्ठ और वरिष्ठ अधिवक्ताओं, सहयोगियों तथा शोधकर्ताओं का सामूहिक श्रम होता है। “जैसे अनेक धाराएं मिलकर एक महान नदी बनाती हैं, वैसे ही विधि-जगत का प्रत्येक व्यक्ति न्याय की धारा को बल देता है।” आज का सहपाठी कल सहयोगी, प्रतिपक्षी या न्यायाधीश बन सकता है, इसलिए सम्मान और संवेदना को व्यावहारिक औज़ार समझो, न कि केवल आदर्श-वाक्य।
अपने प्रारंभिक अभ्यास-काल की घटना साझा कर उन्होंने बताया कि एक साधारण मार्गदर्शन कैसे वर्षों-वर्ष भरोसे में परिवर्तित हुआ। “यहां कोई सद्भावना व्यर्थ नहीं जाती, पर नई पीढ़ी इसे भुला रही है।” प्रगति का हिसाब महीनों में मत करो, उसे वर्षों-दशकों के पैमाने पर परखो। निरंतरता, परिश्रम और निष्पक्षता ही स्थायी मान दिलाएंगे।
समारोह में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं कुलाधिपति न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने 6 विद्या-वाचस्पति, 48 विधि-स्नातकोत्तर और एक सौ अड़तालीस कला-विधि स्नातक (ऑनर्स) समेत कुल 242 उपाधियां प्रदान कीं।
सीजेआई ने किया डिजिटल संग्रहालय का अवलोकन
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने रायपुर के आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में बने देश के पहले डिजिटल संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह जनजातीय संग्रहालय अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को जनजातीय इतिहास और संस्कृति से वाकिफ होना चाहिए।
चीफ जस्टिस ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अंदोलनों और शौर्य गाथाओं पर संग्रहालय में बने प्रत्येक गैलरी को निकट से देखा। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में जनजातीय आंदोलनों की स्मृतियां लोगों को शोषण एवं अन्याय के खिलाफ एक जुट होने और उसका प्रतिकार करने के लिए प्रेरित करेंगी।
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हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी
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