घर में साली के कंट्रोल से परेशान जज ने किया सुसाइड, कैसे दखलअंदाजी बनी जानलेवा
दिल्ली से एक बहुत ही दुखद खबर सामने आई है। कड़कड़डूमा कोर्ट के जज अमन कुमार शर्मा ने आत्महत्या कर ली। उनका शव शनिवार को उनके घर के बाथरूम में मिला। सिर्फ 30 साल की उम्र में उन्होंने यह कदम उठाया।
वे दिल्ली के पॉश इलाके ग्रीन पार्क में रहते थे। अमन और उनकी पत्नी दोनों ही कानून के जानकार थे। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। ऐसे मामलों में परिवार का निजी दखल बड़ा मुद्दा बनता है।
अक्सर लोग दूसरों के निजी मामलों में बहुत दखल देते हैं। ज्यादा दखलअंदाजी से मानसिक तनाव और दबाव बढ़ जाता है। किसी के निजी जीवन में घुसना खतरनाक हो सकता है। इससे रिश्तों में कड़वाहट और दूरियां आने लगती हैं। आइए जानते हैं कि कैसे अन्य व्यक्ति का दखल परिवार के निजी रिश्तों के लिए घातक बन सकता है।
सुसाइड से पहले आखिरी कॉल
जज अमन कुमार शर्मा मूल रूप से राजस्थान के अलवर के रहने वाले थे। उनके रिश्तेदारों ने जो खुलासे किए हैं,वे दिल दहला देने वाले हैं। बताया जा रहा है कि अमन पिछले कुछ समय से गंभीर मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह (Domestic Strife) से जूझ रहे थे।
अमन के एक रिश्तेदार ने बताया कि सुसाइड से एक रात पहले,यानी शुक्रवार रात करीब 10 बजे अमन ने अपने पिता को फोन किया था। फोन पर अमन काफी भावुक थे और उन्होंने रोते हुए कहा,"पापा, बहुत परेशान हूं, अब जीना मुश्किल हो गया है।"बेटे की आवाज में यह दर्द सुनकर पिता तुरंत अलवर से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। जब वे सुबह घर पहुंचे,तो वहां पति-पत्नी के बीच झगड़ा चल रहा था।
झगड़े के बाद अमन ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। काफी देर तक जब वे बाहर नहीं निकले, तो दरवाजा तोड़ा गया, जहां उनका शव फंदे से लटका मिला। अमन की पत्नी खुद जज हैं, जबकि उनकी साली (पत्नी की बहन) एक IAS अधिकारी हैं, जो वर्तमान में जम्मू में तैनात हैं।
एक 'साइलेंट किलर'
जज अमन शर्मा के मामले में रिश्तेदारों ने बताया कि अमन अपनी पत्नी के परिवार के अत्यधिक हस्तक्षेप (Interference) से परेशान थे। अमन ने अपने पिता को बताया कि पिछले दो महीनों से उसे परेशान किया जा रहा था। अमन का कहना था कि उसकी साली उसके घरेलू जीवन में दखल दे रही थी और उसके घर को कंट्रोल कर रही थी।
रिलेशनशिपएक्सपर्ट्स मानते हैं कि जब किसी तीसरे व्यक्ति (चाहे वह माता-पिता हों या भाई-बहन) का नियंत्रण आपके घर के फैसलों तक पहुंच जाता है, तो रिश्ता दम तोड़ने लगता है।
जांच के दायरे में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
सफदरजंग एन्क्लेव थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस सुसाइड मिस्ट्री (Suicide Mystery) को सुलझाने के लिएअमन के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है। पुलिस उनके कॉल रिकॉर्ड्स और व्हाट्सएप चैट्स खंगाल रही है।
ग्रीन पार्क स्थित घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है।पुलिस उनके सहकर्मियों और डीएलएसए (DLSA) के कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है।
ज्यादा दखलअंदाजी है जानलेवा
परिवार में बहारी व्यक्ति की ज्यादा दखलअंदाजी खतरनाक हो सकती है। पति-पत्नी के बीच की बातें जब बाहर जाती हैं, तो आपसी विश्वास (Trust) खत्म हो जाता है। अगर घर के छोटे-बड़े फैसले ससुराल पक्ष या बाहरी लोग लेने लगें, तो पार्टनर को कंट्रोलिंग की भावना आने लगती है।
जैसा कि अमन के केस में दिखा, जब कोई व्यक्ति हर समय किसी और के नियंत्रण में रहता है, तो वह 'घुटन' महसूस करने लगता है। जिसकी वजह से डिप्रेशन या सुसाइडल थोट्स आने लग जाते हैं।
कितना होना चाहिए हस्तक्षेप?
रिश्ते में परिवार का जुड़ाव होना अच्छी बात है, लेकिन इसकी एक लिमिट होनी चाहिए।
1. राय और आदेश के बीच का अंतर
परिवार के बड़े सदस्य अपनी सलाह दे सकते हैं, लेकिन उसे मानना या न मानना पूरी तरह पति-पत्नी का फैसला होना चाहिए। यदि सलाह 'आदेश' का रूप ले ले, तो यह हस्तक्षेप है।
2. झगड़ों का समाधान
पति-पत्नी के बीच के झगड़े तब तक उनके बीच रहने चाहिए जब तक वे शारीरिक हिंसा या गंभीर शोषण का रूप न ले लें। छोटे-मोटे मनमुटाव में ससुराल वालों का पक्ष लेना आग में घी डालने जैसा होता है।
3. निजता का सम्मान (Respect for Privacy)
शादी के बाद एक नया 'न्यूक्लियर' परिवार बनता है। इस परिवार के वित्तीय फैसले, करियर चॉइस और निजी समय में किसी भी तीसरे व्यक्ति की दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए।
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