शंकराचार्यों में विवाद नहींं, प्रशासन माफी मांगे तो विवाद खत्म: शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती

Kaushiki | Jan 27, 2026, 16:23 IST
Dwarka Shankaracharya Sadanand
स्वामी सदानंद सरस्वती ने प्रयागराज विवाद को धर्म का अपमान बताते हुए मंत्रियों की अपील ठुकराई। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को वैध और सत्ता लोभी संतों को नकली बताया। आइए जानें द सूत्र को दिए इंटरव्यू में उन्होंने क्या कहा।

डॉ ब्रजेश शर्मा @ नरसिंहपुर



प्रयागराज में ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य और प्रशासन के बीच उपजे तनाव ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। इस विवाद को सुलझाने के लिए कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने द्वारका के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती से मध्यस्थता की गुहार लगाई। इसे उन्होंने सीधे तौर पर ठुकरा दिया है।



द्वारका के शंकराचार्य ने इस विवाद को धर्म का अपमान बताते हुए हस्तक्षेप से साफ इनकार कर दिया। 'द सूत्र' को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने इसे सीधे तौर पर धर्म का अपमान बताया।



उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की वैधता पर उठ रहे सवालों को सिरे से खारिज किया। साथ ही, सत्ता के लालच में गुटबाजी करने वाले संतों को कड़ी फटकार भी लगाई। आइए जानें 'द सूत्र' को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने क्या कहा-



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प्रशासन माफी मांग ले, तो मामला सुलझ सकता है

जब केंद्र सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने स्वामी सदानंद सरस्वती से इस विवाद को शांत कराने की अपील की, तो उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया।



उन्होंने कहा: "यह सीधे तौर पर धर्म के अपमान का मामला है। प्रशासन ने प्रयागराज में ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य के साथ जो व्यवहार किया है, वह अपराध है। इसमें मैं हस्तक्षेप नहीं करूंगा। अगर प्रशासन माफी मांग ले, तो मामला सुलझ सकता है।"



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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद पर सवाल

जो लोग स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्वयंभू कहते हैं, उन्हें जवाब देते हुए द्वारका के शंकराचार्य ने कहा:



शंकराचार्य का पद परंपरा और उत्तराधिकार से मिलता है। हमारे गुरुदेव ने अपने जीवनकाल में केवल दो लोगों को दंड संन्यास की दीक्षा दी थी। एक मैं और दूसरे अविमुक्तेश्वरानंद।





उनका पट्टाभिषेक श्रृंगेरी के वरिष्ठ शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ जी ने विधिवत किया है। जब परंपरा के मुताबिक एक शंकराचार्य दूसरे का समर्थन और अभिषेक कर रहा है, तो स्वयंभू होने का प्रश्न ही नहीं उठता।



Swami Sadanand Saraswati , Dwarka Shankaracharya pith | Yam Nachiketa conversation | Mrityu Prasna


संतों के दो गुटों में बंटने पर

संतों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप पर उन्होंने कड़ा प्रहार किया। कहा कि- आज कई संत सत्ता के दबाव में हैं या सरकार से लाभ लेने की लालसा रखते हैं।



वे सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए विवाद कर रहे हैं। जो सत्ता के दबाव में आ जाए, वह संत नहीं हो सकता। संत का लक्ष्य ईश्वर की भक्ति और सत्य की प्राप्ति होनी चाहिए, उसे किसी से कोई अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए।



पुरी के असली शंकराचार्य कौन?

देश की विभिन्न पीठों पर दो-दो दावेदारों के सवाल पर उन्होंने साफ कहा:



स्वामी निश्चलानंद सरस्वती (जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती)ही असली हैं। पुरी पीठ के एकमात्र मान्य शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी हैं। वे वेदों, शास्त्रों और वैदिक गणित के प्रकांड विद्वान हैं।



उन्होंने आरोप लगाया कि अधोक्षजानंद नामक व्यक्ति को शासन- प्रशासन के लोग ही फर्जी तरीके से प्रचारित कर रहे हैं। जैसे देश में दो प्रधानमंत्री या दो राष्ट्रपति नहीं हो सकते, वैसे ही एक पीठ पर दो शंकराचार्य नहीं हो सकते।



PM Narendra Modi took blessings from Dwarka Shankaracharya Swami Sadanand Saraswati ji Maharaj | कौ


चारों शंकराचार्यों के बीच एकता

शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने अंत में यह संदेश दिया कि चारों पीठों के शंकराचार्यों के बीच कोई मतभेद नहीं है। तीनों शंकराचार्य एक साथ हैं। पुरी के शंकराचार्य भी माघ मेले के दौरान संपर्क में रहे।



विवाद बाहरी शक्तियों और प्रशासनिक गलतियों के कारण पैदा किया जा रहा है। अगर प्रशासन माफी मांग ले तो सभी तरह की तनातनी और विवाद शांत हो जाएगा।



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कौन हैं स्वामी सदानंद सरस्वती

द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का जन्म 1958 में नरसिंहपुर के बरगी गांव में हुआ। उनका बचपन का नाम रमेश अवस्थी था। मात्र 12 साल की उम्र में वे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की शरण में आ गए। बनारस में 8 वर्षों तक उन्होंने वेद-पुराणों का अध्ययन किया। उसके बाद 2003 में उन्हें दंड दीक्षा मिली। इसके बाद वे सदानंद सरस्वती कहलाए। गुरु के आदेश पर 1990 से द्वारका में कार्यरत स्वामी जी हिंदी, संस्कृत और गुजराती सहित कई भाषाओं के विद्वान और एक दर्जन पुस्तकों के लेखक हैं।



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