चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून की सुनवाई से हटे CJI सूर्यकांत, बोले- बिना भावी चीफ जस्टिस वाली बेंच में सुना जाए मामला

Amresh Kushwaha | Mar 21, 2026, 10:51 IST
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जानें क्यों उन्होंने खुद को सुनवाई से अलग किया और क्या है 2023 का विवादित कानून...

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पारदर्शिता और नैतिकता की एक नई मिसाल पेश करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शुक्रवार, 20 मार्च को एक बड़ा फैसला लिया है।



उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस सूर्यकांत का मानना है कि इस संवेदनशील मामले की सुनवाई ऐसी बेंच को करनी चाहिए, जिसमें भविष्य का कोई संभावित मुख्य न्यायाधीश शामिल न हो।



हितों के टकराव से बचने की अनूठी पहल

सुनवाई की शुरुआत में ही सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में उन पर हितों के टकराव का आरोप लग सकता है। चूंकि विवाद का मुख्य केंद्र बिंदु ही नियुक्ति समिति से CJI के पद को हटाना है, इसलिए उन्होंने गरिमा बनाए रखने के लिए इस केस से हटना ही उचित समझा।



जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की मौजूदगी वाली इस बेंच ने इस कदम के जरिए स्पष्ट कर दिया कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।



भविष्य के चीफ जस्टिस वाली बेंच पर रोक का सुझाव

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि इस मामले को एक ऐसी बेंच को सौंपा जाना चाहिए जिसमें कोई भी जज भविष्य में मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में न हो। इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने भी सहमति जताई।



उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि कानून सीधे तौर पर CJI की संस्थागत भूमिका (Institutional role) से जुड़ा है, इसलिए पक्षपात की किसी भी आशंका को खत्म करने के लिए यह फैसला जरूरी है। कोर्ट ने अब इस मामले को 7 अप्रैल को दूसरी बेंच के सामने सूचीबद्ध (Listed) करने का निर्देश दिया है।



क्या है 2023 का वह कानून जिस पर है विवाद?

यह पूरा विवाद दिसंबर 2023 में संसद द्वारा पारित उस कानून से शुरू हुआ, जिसने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया बदल दी। पुराने प्रावधान के अनुसार, चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI शामिल थे।



वहीं, नए कानून के तहत CJI को हटाकर उनकी जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल कर लिया गया है। कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एडीआर (ADR) जैसी संस्थाओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के उस फैसले का उल्लंघन बताया है, जिसमें निष्पक्षता के लिए CJI की मौजूदगी को अनिवार्य कहा गया था।



पुरानी व्यवस्था बनाम नई व्यवस्था

विवरणमार्च 2023 का सुप्रीम कोर्ट का फैसलादिसंबर 2023 का नया कानून
चयन समिति सदस्य 1प्रधानमंत्री (Prime Minister)प्रधानमंत्री (Prime Minister)
चयन समिति सदस्य 2विपक्ष के नेता (Leader of Opposition)विपक्ष के नेता (Leader of Opposition)
चयन समिति सदस्य 3भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री

केंद्र सरकार का बचाव: स्वतंत्रता केवल जज पर निर्भर नहीं

दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर इस कानून का पुरजोर बचाव किया है। सरकार का कहना है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता केवल किसी न्यायिक सदस्य (Judicial member) की मौजूदगी पर टिकी नहीं होती।



सरकार ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि 14 मार्च 2024 को दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जल्दबाजी में की गई थी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर रोक (Stay) लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन मामला संवैधानिक कसौटी पर अभी भी लटका हुआ है।



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