Republic Day 2026: 1950 से 2026 तक, कुछ ऐसे बदला भारतीय गणतंत्र का आधुनिक सफर
गणतंत्र दिवस पर विशेष: 1950 में संविधान लागू होने से लेकर 2026 के डिजिटल युग तक। भारत एक गुलाम देश से ग्लोबल पावर बनने की ऐतिहासिक महागाथा लिख चुका है। ये सफर हमारे लोकतंत्र की मजबूती, संवैधानिक बदलावों और आधुनिक तकनीकी विकास के गौरवशाली तालमेल को बखूबी दर्शाता है।
1950 (first republic day) में गणतंत्र का जन्म हुआ। 26 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और भारत का अपना संविधान लागू हुआ। इसी दिन अशोक स्तंभ को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाकर भारत ने पूरी तरह से ब्रिटिश राज की बेड़ियां काट दी थीं।
1951 में ही पहला संविधान संशोधन हुआ। इसने दिखाया कि हमारा संविधान एक लिविंग डॉक्यूमेंट है जो वक्त के साथ बदल सकता है। 1976 में 42वें संशोधन द्वारा समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़कर इसकी बुनियादी ताकत को और बढ़ाया (गणतंत्र दिवस परेड) गया।
पहली परेड 1950 में इरविन स्टेडियम में हुई थी। लेकिन 1955 से राजपथ (अब कर्तव्य पथ) परेड का परमानेंट घर बन गया। साल-दर-साल इसमें भारतीय सेना की ताकत और राज्यों की सांस्कृतिक झांकियों ने दुनिया को भारत की विविधता दिखाई।
2014 के बाद गणतंत्र दिवस में डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया की झलक दिखने लगी। परेड में अब स्वदेशी मिसाइलें और लड़ाकू विमानों के साथ-साथ हमारी तकनीकी तरक्की का प्रदर्शन प्रमुख आकर्षण बन गया है।
हाल के वर्षों में गणतंत्र दिवस की परेड पूरी तरह नारी शक्ति को समर्पित रही है। 2024-25 के दौरान हमने देखा कि कैसे सेना की टुकड़ियों और झांकियों का नेतृत्व महिलाओं ने कर इतिहास रच दिया।
2026 तक भारत ने पुराने कोलोनियल कानूनों को पूरी तरह बदलकर भारतीय न्याय संहिता जैसे नए नियम लागू कर दिए हैं। अब हमारा गणतंत्र और भी ज्यादा पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस साल (2026) का गणतंत्र दिवस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतरिक्ष मिशन की उपलब्धियों को सेलिब्रेट कर रहा है। आज भारत केवल एक लोकतंत्र नहीं। बल्कि एक ग्लोबल टेक पावर के रूप में परेड में अपनी पहचान दिखा रहा है।