एग्जिट पोल vs असली नतीजे: बंगाल से केरल तक, कितनी सच्ची थी भविष्यवाणी?
Pawan Modiya | Apr 29, 2026, 16:50 IST
Photograph: (the sootr)
पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के 2011, 2016 और 2021 विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल और असली नतीजों की तुलना बताती है कि बंगाल में एग्जिट पोल सबसे ज्यादा फेल रहे, जबकि असम और केरल में दिशा अक्सर सही रही।
समझें क्या है पूरा मामला
एग्जिट पोल: रोमांच और सवाल
पश्चिम बंगाल: पोल फेल
2021 में सबसे बड़ा उलटफेर हुआ। ज्यादातर सर्वे में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) और भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा (Bharatiya Janata Party) के बीच कड़ी टक्कर बताई गई थी। लेकिन जब नतीजे आए तो तस्वीर एकदम अलग थी। तृणमूल(tmc)ने 213 सीटें जीतीं और भाजपा को सिर्फ 77 सीटें मिलीं। यह एग्जिट पोल की सबसे बड़ी नाकामी थी।
2016 में भी एजेंसियों ने तृणमूल की जीत तो भांप ली, लेकिन जीत की ताकत को बहुत कम आंका। असली नतीजे आए तो तृणमूल 211 सीटें ले गई। 2011 में एग्जिट पोल ने तृणमूल और उसके गठबंधन को मिलाकर करीब 180-182 सीटें दी थीं और लेफ्ट को 100 से ज्यादा। लेकिन तृणमूल अकेले 184 सीटें ले आई और लेफ्ट 62 पर सिमट गई। यानी बंगाल में तीनों बार एग्जिट पोल जमीनी हकीकत से काफी दूर रहे।
असम: पोल पास हुए
2011 में थोड़ी गड़बड़ी जरूर थी, लेकिन अंत में कांग्रेस ने सरकार बनाई। उस चुनाव में भाजपा को महज पांच सीटें मिली थीं। कुल मिलाकर असम में एग्जिट पोल ने भरोसा बनाए रखा।
तमिलनाडु: उलटा-पलटा खेल
2011 में तो हालत और भी अजीब थी। अलग-अलग एजेंसियों ने एआईएडीएमके को 105 से लेकर 176 तक सीटें दीं। डीएमके को 54 से 130 तक के अनुमान मिले। यानी एजेंसियां खुद आपस में एकमत नहीं थीं। नतीजे आए तो एआईएडीएमके ने 203 सीटें जीतीं और डीएमके गठबंधन 31 पर सिमट गया।
केरल: दिशा सही, पर आंकड़े चूके
पुडुचेरी: छोटा राज्य, साफ तस्वीर
2021 में एग्जिट पोल ने एनडीए (NDA - National Democratic Alliance) को बढ़त दी थी और नतीजे सटीक निकले। 2016 में कांग्रेस और डीएमके गठबंधन की जीत का अनुमान था और वही हुआ। 2011 में एजेंसियों ने सत्ता विरोधी लहर भांप ली थी और जब नतीजे आए तो एन रंगास्वामी की सरकार चली गई। पुडुचेरी के मामले में एग्जिट पोल का रिकॉर्ड बेहतर रहा है।
पांच राज्यों का लेखा-जोखा
2011 में एंटी-इन्कम्बेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर कई राज्यों में पकड़ में आई थी। लेकिन जीत का पैमाना कई जगह गलत निकला। सबसे बड़ा अंतर तमिलनाडु में था। पश्चिम बंगाल में बदलाव की दिशा भले सही थी, लेकिन जीत का आकार बहुत कम आंका गया। अब देखना यह है कि 2026 के एग्जिट पोल पिछले रिकॉर्ड को तोड़ पाते हैं या फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जाती है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
3 जरूरी FAQ
एग्जिट पोल (Exit Poll) एक सर्वे होता है जो मतदान केंद्र से बाहर निकले मतदाताओं से उनकी वोटिंग के बारे में पूछकर तैयार किया जाता है। इसमें एजेंसियां हजारों मतदाताओं से सवाल पूछती हैं और उनके जवाबों के आधार पर अनुमान लगाती हैं कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं। यह एक वैज्ञानिक तरीका है, लेकिन इसमें मतदाताओं का सच बताना जरूरी है। अगर लोग सही जवाब नहीं देते या सैंपल साइज कम हो, तो नतीजे गलत हो सकते हैं। भारत में पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मतदाता अक्सर एग्जिट पोल सर्वेयर को सही जानकारी नहीं देते, इसीलिए वहां एग्जिट पोल अक्सर फेल होते हैं।
सवाल 2: क्या एग्जिट पोल हमेशा सच होते हैं?
नहीं, एग्जिट पोल हमेशा सच नहीं होते। ये केवल अनुमान होते हैं। पश्चिम बंगाल 2021 इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां ज्यादातर एजेंसियों ने तृणमूल और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर बताई थी, लेकिन असल में तृणमूल ने 213 सीटें जीत लीं। इसी तरह तमिलनाडु 2016 में पोल गलत निकले। एग्जिट पोल की सटीकता राज्य की राजनीतिक जटिलता, मतदाताओं की ईमानदारी और एजेंसी के सैंपल साइज पर निर्भर करती है।
सवाल 3: किन राज्यों में एग्जिट पोल सबसे ज्यादा सटीक रहे हैं?
पिछले तीन चुनावों के रिकॉर्ड के आधार पर असम में एग्जिट पोल सबसे ज्यादा सटीक रहे हैं। 2016 और 2021 दोनों में यहां के नतीजे एग्जिट पोल के करीब रहे। केरल और पुडुचेरी में भी दिशा आमतौर पर सही रही, भले ही सीटों की संख्या में थोड़ा अंतर रहा। तमिलनाडु का रिकॉर्ड मिला-जुला है और पश्चिम बंगाल का रिकॉर्ड सबसे कमजोर है, जहां तीनों चुनावों में एग्जिट पोल और असली नतीजों में बड़ा फर्क रहा।
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