कैंसर, रेबीज और हेपेटाइटिस की नकली दवाओं का भंडाफोड़, दिल्ली में 6 करोड़ की दवाएं जब्त
News in Short
- दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं के बड़े सिंडिकेट को पकड़ा।
- मुखर्जी नगर में अवैध मैन्युफैक्चरिंग और रीपैकेजिंग यूनिट चल रही थी।
- कैंसर, इंसुलिन, रेबीज और हेपेटाइटिस जैसी जीवन रक्षक दवाएं नकली बनाई जाती थीं।
- सरकारी अस्पतालों की दवाएं चुराकर फर्जी लेबल लगाकर बेची जाती थीं।
- चार आरोपी गिरफ्तार, लगभग 6 करोड़ रुपए की दवाएं और मशीनें जब्त हुईं।
News in Detail
दिल्ली में नकली दवाओं का पर्दाफाश
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े नकली दवा गिरोह को दबोच लिया है। यह गिरोह कैंसर, इंसुलिन, रेबीज और हेपेटाइटिस जैसी जीवन रक्षक दवाएं नकली रूप से तैयार कर बेच रहा था। पुलिस ने इस पूरे ऑपरेशन में लगभग 6 करोड़ रुपए की दवाएं और मशीनें जब्त की हैं। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था। यह एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट था जो दिल्ली-एनसीआर (National Capital Region) से लेकर पश्चिम बंगाल, असम और मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों तक नकली दवाओं की सप्लाई करता था।
मुखर्जी नगर में थी अवैध फैक्ट्री
पुलिस को पहले एक गुप्त सूचना मिली। सूचना थी कि उत्तरी दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में सरकारी दवाओं की रीपैकेजिंग और नकली लेबलिंग का काम हो रहा है। इस पर क्राइम ब्रांच ने इंद्र विकास कॉलोनी स्थित एक परिसर में छापा मारा।
वहां पुलिस को भारी मात्रा में नकली और सरकारी आपूर्ति वाली दवाएं मिलीं। इसके साथ ही पैकेजिंग मशीनें और फर्जी लेबल भी बरामद हुए। यह साफ था कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं, बल्कि एक पूरी तरह संगठित गिरोह का काम था। ऑपरेशन पूरी तरह सुनियोजित था।
कैसे होती थी ठगी
गिरोह का तरीका बेहद शातिराना था। आरोपी प्रयागराज के सरकारी अस्पतालों से दवाएं अवैध तरीके से हासिल करते थे। इन दवाओं पर 'सरकारी आपूर्ति - बिक्री के लिए नहीं' लिखा होता था। इन्हें दिल्ली लाया जाता था।
मुखर्जी नगर की अवैध यूनिट में पहले इन दवाओं के असली लेबल हटाए जाते थे। फिर उन पर फर्जी कमर्शियल लेबल चिपकाए जाते थे। उसके बाद इन्हें दिल्ली, पश्चिम बंगाल, असम और मणिपुर के खुले बाजारों में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। पुलिस को 'हवाला' के जरिए पैसों के लेनदेन के सबूत भी मिले हैं।
क्या-क्या हुआ जब्त ?
छापेमारी में जो सामान बरामद हुआ, वह किसी को भी चौंका दे। पुलिस ने लेनवाटिनिब की 14,000 से ज्यादा कैप्सूल जब्त कीं जो कैंसर के इलाज में काम आती हैं। इसके अलावा हेपबेस्ट की 7,900 टैबलेट और हेपेटाइटिस बी की 2,500 वैक्सीन भी मिलीं।
रेबीज से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले 953 वायल, मधुमेह के मरीजों के लिए जरूरी 315 इंसुलिन ग्लार्गिन कार्ट्रिज और जहरीले सांप के काटने पर दिया जाने वाला स्नेक वेनम एंटीसीरम इंजेक्शन भी बरामद हुए। एजिथ्रोमाइसिन की 6,000 टैबलेट, सेफिक्सिम की बड़ी खेप, 18,000 जीरोडोल-एसपी टैबलेट और 1,416 ह्यूमन एल्ब्यूमिन बोतलें भी पकड़ी गईं। इन सबकी कुल कीमत लगभग 6 करोड़ रुपए आंकी गई है।
गिरोह के 4 मुख्य आरोपी
पुलिस ने इस सिंडिकेट के चार मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। 56 साल के मनोज कुमार जैन इस पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड हैं। वे मुखर्जी नगर से ही पूरा काम चला रहे थे। हरियाणा के पंचकूला का रहने वाला 57 वर्षीय राजू कुमार भी इस गिरोह का अहम हिस्सा था।
प्रयागराज से दवाओं की अवैध सप्लाई की जिम्मेदारी 32 वर्षीय विक्रम सिंह उर्फ सन्नी और 35 वर्षीय वतन पर थी। ये दोनों प्रयागराज के रहने वाले हैं। पुलिस का मानना है कि इस सिंडिकेट में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।
किन कानूनों के तहत मामला दर्ज
दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS - Bharatiya Nyaya Sanhita) और औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 (Drugs and Cosmetics Act 1940) की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। चारों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं।
पुलिस अब उन सप्लायरों और वितरकों की तलाश कर रही है जो इस सिंडिकेट से जुड़े थे। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
जहरीला कफ सिरप कांड : जांच में मिले सबूत, परासिया के दो डॉक्टर गिरफ्तार
छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड : मासूमों की मौत के आरोपी डॉक्टर की हाईकोर्ट से जमानत खारिज