सपनों से दूर हो रही बेटियां, 12वीं तक आते-आते लड़कियां छोड़ रही पढ़ाई

Aman Vaishnav | Jul 28, 2026, 11:36 IST
Share
12वीं तक आते-आते लड़कियां छोड़ रही पढ़ाई
12वीं तक आते-आते लड़कियां छोड़ रही पढ़ाई

देश में सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी आई है। 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते हर दूसरी छात्रा की पढ़ाई छूट रही है। संसद में पेश शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • देश में सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार घट रही है।
  • पांच साल में 17 हजार141 सरकारी स्कूल कम हो गए हैं।
  • 12वीं तक पहुंचते पहुंचते लगभग आधी छात्राएं स्कूल छोड़ देती हैं।
  • एससी और एसटी बच्चों की स्कूली पहुंच भी तय लक्ष्य से पीछे है।
  • सरकार ने संसद में यह जानकारी लिखित जवाब में दी है।

स्कूलों की घटती संख्या

लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार देश में सरकारी स्कूलों की संख्या 2021-22 में 10 लाख 22 हजार 386 थी। यह संख्या 2025-26 में घटकर 10 लाख 5 हजार 245 रह गई है। यानी पांच साल के भीतर 17 हजार 141 सरकारी स्कूल कम हुए।

शिक्षा मंत्रालय ने यह आंकड़े संसद में एक सवाल के जवाब में साझा किए। सांसदों ने सरकारी स्कूलों की घटती संख्या पर सीधा सवाल पूछा था। जवाब में साफ हुआ कि हर साल स्कूलों की संख्या में गिरावट जारी है।

govt-schools-girl-students-drop-out-rate
govt-schools-girl-students-drop-out-rate


छात्राओं का स्कूल छोड़ना

आंकड़ों के मुताबिक 12वीं तक पहुंचने वाली लड़कियों की हिस्सेदारी 2025-26 में सिर्फ 55 प्रतिशत रही है। इसका मतलब है कि हर 100 लड़कियों में से केवल 55 ही 12वीं तक पढ़ाई जारी रख पाती हैं। बाकी लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं।

यह आंकड़ा रिटेंशन दर कहलाता है। रिटेंशन दर बताती है कि कितने बच्चे शुरुआती कक्षा से 12वीं तक टिके रहते हैं। लड़कियों के मामले में यह दर लड़कों की तुलना में अब भी कमजोर मानी जाती है।

govt-schools-girl-students-drop-out-rate
govt-schools-girl-students-drop-out-rate


एससी-एसटी बच्चों की स्थिति

9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई में एससी और एसटी बच्चों की पहुंच भी लक्ष्य से काफी दूर है। 2025-26 में इस स्तर पर एससी बच्चों का दाखिला यानी सकल नामांकन अनुपात (जीईआर – Gross Enrolment Ratio) 75.2 प्रतिशत रहा। वहीं एसटी बच्चों का यह आंकड़ा 71 प्रतिशत दर्ज हुआ।

govt-schools-girl-students-drop-out-rate
govt-schools-girl-students-drop-out-rate


एडमिशन के आंकड़े

सरकार द्वारा जारी तालिका के अनुसार अलग अलग स्तर पर दाखिले की स्थिति इस प्रकार रही।

प्री प्राइमरी से कक्षा 2 तक एससी बच्चों का एडमिशन 2024-25 में 38.8 प्रतिशत था। यह 2025-26 में बढ़कर 39.7 प्रतिशत हो गया। एसटी बच्चों में यही आंकड़ा 44.3 से बढ़कर 46.1 प्रतिशत पहुंचा।

कक्षा 3 से 5 तक एससी बच्चों का एडमिशन 99.8 से घटकर 95.0 प्रतिशत रह गया। एसटी बच्चों का आंकड़ा भी 101.7 से घटकर 100.0 प्रतिशत हुआ। कक्षा 6 से 8 तक भी दोनों वर्गों में मामूली गिरावट दर्ज हुई।

सबसे बड़ी चुनौती कक्षा 9 से 12 तक की है। यहां एससी बच्चों का एडमिशन 70.8 से बढ़कर 75.2 प्रतिशत हुआ। एसटी बच्चों का आंकड़ा 66.9 से बढ़कर 71.0 प्रतिशत पहुंचा। फिर भी यह राष्ट्रीय औसत से कम है।

govt-schools-girl-students-drop-out-rate
govt-schools-girl-students-drop-out-rate


सरकार का सुधार का दावा

सरकार का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले स्थिति में कुछ सुधार दर्ज हुआ है। 9वीं से 12वीं तक पहुंचने वाली लड़कियों और एससी एसटी बच्चों की संख्या में मामूली बढ़त देखी गई। 10वीं और 12वीं तक पढ़ाई जारी रखने वाली लड़कियों का अनुपात भी पहले से बेहतर हुआ है।

समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों को वित्तीय मदद दी जा रही है। इसमें स्कूलों के बुनियादी ढांचे, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और परिवहन सुविधा शामिल है। सरकार का दावा है कि इससे धीरे धीरे स्थिति सुधरेगी।

किन राज्यों में हालात खराब

कुछ राज्यों में स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा खराब है। मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों में 12वीं तक पहुंचने वाली छात्राओं की संख्या काफी कम है। इन राज्यों में सकल नामांकन अनुपात राष्ट्रीय औसत से नीचे है।

आंकड़े साफ बताते हैं कि माध्यमिक शिक्षा तक सभी बच्चे नहीं पहुंच पाते। खासकर दूरदराज और आदिवासी बहुल इलाकों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है। विशेषज्ञ इसे स्कूलों की कमी और आर्थिक तंगी से भी जोड़कर देखते हैं।

घटती स्कूलों की संख्या और छात्राओं के बीच में पढ़ाई छोड़ने की समस्या आपस में जुड़ी हुई मानी जा रही है। जानकार कहते हैं कि दूर स्कूल होने पर लड़कियों की पढ़ाई सबसे पहले प्रभावित होती है। आने वाले वर्षों में सरकार के सामने यह एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

ये खबरें भी पढ़िए...

स्कूल बंदी में मध्य प्रदेश सबसे आगे, हर दिन बंद हो रहे 7 स्कूल!

AICTE रिपोर्ट: देशभर में बंद हुए 58 इंजीनियरिंग कॉलेज, एमपी में 8 पर असर

एमपी में डिजिटल शिक्षा की स्थिति बदहाल, इंटरनेट तो छोड़ो...कई स्कूलों में बिजली तक नहीं

न कंप्यूटर, न इंटरनेट और न ही ढंग की व्यवस्था, कैसे एआई सीखेंगे एमपी के छात्र?

Tags:
  • शिक्षा मंत्रालय
  • सरकारी स्कूल
  • एससी-एसटी
  • माध्यमिक शिक्षा
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग

By Jitendra Shrivastava

Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती

By VINAY VERMA

मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता

By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar

नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि