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मकर संक्रांति का त्योहार
Makar Sankranti: मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य देव की उपासना और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक पावन उत्सव है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसे उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है। 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। आइए जानें मकर संक्रांति का महत्व।
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सौर परिवर्तन का पर्व
यह दिन खगोलीय रूप से बहुत खास है क्योंकि सूर्य उत्तर की ओर गमन करने लगते हैं। इससे दिन लंबे होने लगते हैं और ठिठुरती ठंड में कमी आने लगती है।
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स्नान और दान का महत्व
इस दिन लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। साथ ही गरीबों को तिल, गुड़, खिचड़ी और कंबल दान करना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य कर्म माना जाता है।
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नाम अनेक, भावना एक
मकर संक्रांति के पर्व को उत्तर भारत में खिचड़ी, पंजाब में लोहड़ी, गुजरात में सूर्य उत्तरायण, दक्षिण में पोंगल और असम में बिहू के नाम से एक ही उत्साह के साथ मनाते हैं।
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पतंगबाजी की परंपरा
गुजरात और राजस्थान में आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। ये धूप में समय बिताने और विटामिन-D लेने का एक वैज्ञानिक और मजेदार तरीका है।
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तिल-गुड़ का वैज्ञानिक मेल
आयुर्वेद के मुताबिक, सर्दियों में तिल-गुड़ का सेवन शरीर को अंदरूनी गर्मी देता है। इसलिए तिल-गुड़ लीजिए और मीठा-मीठा बोलिए की परंपरा निभाई जाती है।
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भीष्म पितामह और मोक्ष
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भीष्म पितामह ने देह त्यागने के लिए इसी दिन (उत्तरायण) का इंतजार किया था। ऐसा इसलिए, क्योंकि इसे मोक्ष प्राप्ति का समय माना जाता है।
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नई फसल का स्वागत
ये मौलिक रूप से किसानों का त्योहार है। इस दिन नई फसल के आगमन पर ईश्वर को भोग लगाया जाता है। धरती मां की पूजा कर खुशहाली मांगी जाती है। डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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