भ्रष्टाचार उजागर किया तो आईएफएस संजीव चतुर्वेदी की घट गई ग्रेडिंग

Amresh Kushwaha | Jun 22, 2026, 14:16 IST
आईएफएस संजीव चतुर्वेदी
आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार उजागर करने पर उनकी ACR ग्रेडिंग घटा दी गई है। CAT ने मामले में प्रिंसिपल सेक्रेटरी, चीफ सेक्रेटरी और PCCF को छह हफ्ते में जवाब देने का नोटिस भेजा है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने घोटाले उजागर किए थे।
  • उसके बाद उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट की ग्रेडिंग 9.74 से 9.30 कर दी गई है।
  • उन्होंने इसे बदले की कार्रवाई बताते हुए CAT में याचिका दायर की है।
  • CAT ने उत्तराखंड के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, चीफ सेक्रेटरी और PCCF को नोटिस भेजा है।
  • सभी को छह हफ्ते के भीतर जवाब देना है।

घोटाला उजागर किया, ग्रेडिंग घटा दी

उत्तराखंड में एक ईमानदार वन अधिकारी के साथ कुछ ऐसा हुआ जो चर्चा का विषय बन गया है। हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड फॉरेस्ट्री ट्रेनिंग एकेडमी के डायरेक्टर और सीनियर IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने दिसंबर 2024 में एक घोटाले का पर्दाफाश किया था।



इसके कुछ ही महीनों बाद उनकी एसीआर (ACR- Annual Confidential Report) यानी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट की ग्रेडिंग घटा दी गई थी। उन्होंने इसे सीधे बदले की कार्रवाई बताया और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT- Central Administrative Tribunal) का दरवाजा खटखटाया है।



CAT ने माना गंभीर मामला

19 जून को सुनवाई के दौरान CAT के ज्यूडिशियल मेंबर जस्टिस राजवीर सिंह वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (फॉरेस्ट) को नामजद नोटिस भेजा है। इसके साथ ही राज्य के चीफ सेक्रेटरी और प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (PCCF- Principal Chief Conservator of Forests) को भी नोटिस जारी किया गया है। तीनों को छह हफ्ते के भीतर जवाब देना होगा।



चतुर्वेदी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की अपनी ACR ग्रेडिंग को सीधे चुनौती दी है। उनकी ग्रेडिंग 9.74 से घटाकर 9.30 कर दी गई थी। उनका कहना है कि यह कटौती बिना किसी ठोस वजह के और गलत नीयत से की गई।



मुनस्यारी इको-हट में मिली थी गड़बड़ी

याचिका के मुताबिक दिसंबर 2024 में संजीव चतुर्वेदी ने मुनस्यारी में इको-हट निर्माण में हुई गड़बड़ियों पर जांच रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट में गंभीर आरोप थे। निर्माण सामग्री खरीदने के लिए नकली कंपनियों के कोटेशन का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा इको-हट से होने वाली कमाई को एक अनरजिस्टर्ड प्राइवेट कंपनी के बैंक खाते में ट्रांसफर करने का आरोप भी था।



चतुर्वेदी ने इस मामले की जांच सीबीआई (CBI- Central Bureau of Investigation) और ईडी (ED- Enforcement Directorate) से कराने की सिफारिश भी की थी। उनका आरोप है कि इसी के बाद उनके खिलाफ ACR ग्रेडिंग घटाने का कदम उठाया गया था।



पहले मिली थी तारीफ, अब दंड

आईएफएस संजीव चतुर्वेदी ने याचिका में अपनी पुरानी रिपोर्टिंग ऑफिसर की रिपोर्ट का भी जिक्र किया है। उस रिपोर्ट में उन्हें एक ईमानदार और इनोवेटिव अधिकारी बताया गया था। उन्होंने फॉरेस्ट मैनेजमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI- Artificial Intelligence) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया था।



बायोडायवर्सिटी संरक्षण के क्षेत्र में भी उनके काम की सराहना की गई थी। मुनस्यारी में राज्य का पहला बुरांश गार्डन बनाने का श्रेय भी उन्हें मिला था। वहीं, घोटाला उजागर करने के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।



FAQ

  1. ACR ग्रेडिंग क्या होती है और इसे घटाने से अधिकारी को क्या नुकसान होता है?
    ACR यानी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट किसी भी सरकारी अधिकारी के प्रदर्शन का आधिकारिक मूल्यांकन होती है। इसकी ग्रेडिंग अधिकारी के प्रमोशन, तैनाती और करियर पर सीधा असर डालती है।

ये खबरें भी पढ़िए...



आईएफएस विपिन कुमार पटेल ने इस्तीफा लिया वापस, पत्नी बोली- मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी



इस्तीफा देने वाले आईएफएस विपिन कुमार पटेल से जवाब तलब, कार्रवाई की चेतावनी



IFS मीट 2026 : सीएम मोहन यादव ने किया आईएफएस थीम गीत का विमोचन



नए साल पर तोहफा : 61 आईएएस, 40 आईपीएस, 11 आईएफएस का प्रमोशन



Tags:
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
  • उत्तराखंड
  • Central Administrative Tribunal
  • केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण
  • आईएफएस संजीव चतुर्वेदी