NEW DELHI. नए संसद भवन उद्घाटन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका 26 मई को खारिज कर दी गई। अर्जी में नई संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कराने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी याचिकाओं को देखना हमारा काम नहीं। ऐसी चीजों में हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते। आप इस तरह से सुप्रीम कोर्ट ना आएं। हम आप पर जुर्माना नहीं लगा रहे।
याचिका में कहा गया था कि राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं। संविधान के अनुच्छेद 79 के मुताबिक राष्ट्रपति संसद का भी अनिवार्य हिस्सा हैं। लोकसभा सचिवालय ने उनसे उद्घाटन न करवाने का जो फैसला लिया है, वह गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई (रविवार) को नई संसद का उद्घाटन करेंगे।
संसद भारत का सर्वोच्च विधायी निकाय
याचिका में कहा गया है कि संसद भारत का सर्वोच्च विधायी निकाय है। भारतीय संसद में राष्ट्रपति और दो सदन (राज्यों की परिषद) राज्यसभा और जनता का सदन लोक सभा शामिल हैं। राष्ट्रपति के पास किसी भी सदन को बुलाने और सत्रावसान करने की शक्ति है। साथ ही संसद या लोकसभा को भंग करने की शक्ति भी राष्ट्रपति के पास है।
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संवैधानिक प्रमुख हैं राष्ट्रपति
याचिकाकर्ता वकील सीआर जया सुकीन ने अपनी याचिका में कहा था कि देश के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते राष्ट्रपति ही प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं। सभी बड़े फैसले भी राष्ट्रपति के नाम पर लिए जाते हैं। अनुच्छेद 85 के तहत राष्ट्रपति ही संसद का सत्र बुलाते हैं। संविधान के अनुच्छेद 87 के तहत हर साल के पहले सत्र यानी बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है। यानी उस सत्र के पहले दिन उनका संसद में अभिभाषण होता है। उसमें वह दोनों सदनों को संबोधित करते हैं। संसद से पारित सभी विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही कानून बनते हैं। इसलिए, राष्ट्रपति से ही संसद के नए भवन का उद्घाटन करवाया जाना चाहिए।
25 मई को याचिका दायर हुई थी
सर्वोच्च न्यायालय में गुरुवार 25 मई को एक जनहित याचिका दायर की गई थी। कहा गया है कि राष्ट्रपति को उद्घाटन समारोह से बाहर करके, सरकार ने भारतीय संविधान का उल्लंघन किया है। संविधान का सम्मान नहीं किया जा रहा है। इसमें मांग की गई है कि संसद के नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्वारा किया जाना चाहिए।
विपक्ष ने किया बहिष्कार
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को संसद की नई इमारत का उद्घाटन करेंगे, लेकिन उद्घाटन कार्यक्रम में ज्यादातर विपक्षी पार्टियां नहीं होंगी। अब तक 20 विपक्षी पार्टियां नई संसद के उद्घाटन के बहिष्कार का ऐलान कर चुकी हैं। विपक्ष की दलील है कि नई संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए ना कि प्रधानमंत्री को, वहीं बीजेपी विपक्ष की दलीलों को बेबुनियाद करार दे रही है।
1200 करोड़ में बनकर तैयार हुई नई संसद
पीएम नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को नए संसद भवन के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था। इस कार्य के लिए राज्यसभा और लोकसभा ने 5 अगस्त 2019 को आग्रह किया था। इसकी लागत 861 करोड़ रुपए आंकी गई थी, हालांकि बाद में इसके निर्माण की कीमत 1,200 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। संसद के नवनिर्मित भवन को गुणवत्ता के साथ रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है। 4 मंजिला संसद भवन में 1224 सांसदों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
ऐसी है नई इमारत
तिकोने आकार में बना नया संसद भवन 4 मंजिला है। पूरा कैम्पस 64,500 वर्ग मीटर के दायरे में फैला हुआ है। नए भवन में एक संविधान हॉल भी होगा, जिसमें भारतीय लोकतंत्र की विरासत को दिखाया जाएगा। इसके अलावा, इस संसद में संसद सदस्यों के लिए लाउंज, कई सारे कमेटी रूम, डायनिंग एरिया और पार्किंग स्पेस होगा। संसद भवन के 3 मेन गेट-ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्मा द्वार होंगे। वीआईपी, सांसदों और विजिटर्स की एंट्री अलग-अलग गेट से होगी। नए संसद भवन में लोकसभा के 888 और राज्यसभा के 300 सांसदों के बैठने की व्यवस्था की गई है। अगर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक होती है तो एक समय में इसमें 1,280 सांसद बैठ सकेंगे।