भारतीय सेना की नई यूनिफॉर्म: स्वदेशी बंदी जैकेट को मिली जगह, जानें क्या बदला
Jitendra Shrivastava | Jun 14, 2026, 16:52 IST
Photograph: (thesootr)
भारतीय सेना ने 174 पेज की नई आर्मी यूनिफॉर्म-2026 बुक जारी की। परेड में तलवार वैकल्पिक हुई, बंदी जैकेट फॉर्मल ड्रेस में शामिल। औपनिवेशिक दौर की परंपराएं खत्म की गईं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भारतीय सेना की 174 पेज की नई यूनिफॉर्म बुक।
- भारतीय सेना ने उतारे गुलामी के दौर के निशान।
- सेना की परेड में तलवार अब वैकल्पिक हो गई।
- बंदी जैकेट जवानों की अब फॉर्मल ड्रेस में शामिल।
- 246 जगहों के अंग्रेजी नाम भी बदले।
पहली बार स्वदेशी बंदी जैकेट को फॉर्मल सिविल ड्रेस में शामिल किया गया है। सेना का कहना है कि ये बदलाव भारत की आधुनिक सोच और राष्ट्रीय भावना को दर्शाते हैं।
indian army uniform (2)
सेना ने क्यों बदली यूनिफॉर्म
सेना का साफ कहना है कि इन बदलावों का मकसद परंपराओं को मिटाना नहीं है। बल्कि गुलामी के दौर की बची-खुची निशानियों को आधुनिक भारतीय सोच के अनुरूप बनाना है।
indian army uniform
तलवार और पाउच बेल्ट में बदलाव
रिव्यूइंग ऑफिसर अब परेड में तलवार नहीं रखेंगे। कुछ मैस ड्रेस के साथ इस्तेमाल होने वाली पाउच बेल्ट भी हटाई गई है। इसके अलावा 'रॉयल' जैसे पुराने शब्दों का इस्तेमाल भी बंद किया गया है।
बंदी जैकेट को पहली बार मिली जगह
इसे फुल स्लीव शर्ट, फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूतों के साथ पहना जा सकेगा। यह कदम खासा अहम है। अब तक औपचारिक मौकों पर सेना के जवान और अफसर पश्चिमी शैली की ड्रेस पहनते थे।
वर्दी पहनने के नए नियम
अधिकारी और जवान बिना इजाजत राजनीतिक, धार्मिक या प्रदर्शन की जगह, शादियों, निजी पार्टियों और पेड मीडिया इवेंट में वर्दी पहनकर नहीं जा सकेंगे।
2023 में भी हटाई थीं कई परंपराएं
246 जगहों के नाम भी बदले
दिल्ली कैंट में किर्बी प्लेस का नाम केनुगुरुसे विहार रखा गया। मॉल रोड का नाम बदलकर अरुण खेत्रपाल मार्ग किया गया। अंबाला, मथुरा, जयपुर, बरेली, महू, देहरादून और कोलकाता जैसी जगहों पर भी ब्रिटिश दौर के नाम हटाए गए।
कॉम्बैट यूनिफॉर्म का पेटेंट भी कराया
ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माना होगा। यह कदम नकली या अनधिकृत सैन्य वर्दी के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।
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भारत में सेना की नई यूनिफॉर्म और वैश्विक तुलना
नई यूनिफॉर्म में डिजिटल पैटर्न, हल्के फैब्रिक और बेहतर वेंटिलेशन जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिससे सैनिकों की कार्यक्षमता बढ़ सके। भारत का यह कदम किसी एक देश तक सीमित नहीं है।
दुनिया की कई प्रमुख सेनाएं समय-समय पर अपनी वर्दी में बदलाव करती रही हैं, खासकर बदलते युद्ध स्वरूप और तकनीक को देखते हुए।
भारत के संबंध में...
अमेरिका और NATO देश
इसका कारण था अलग-अलग भू-भाग में बेहतर छुपाव। Pentagon के अनुसार, नए पैटर्न ने अफगानिस्तान और इराक जैसे क्षेत्रों में सैनिकों की विजिबिलिटी को काफी कम किया।
ब्रिटिश सेना ने भी Multi-Terrain Pattern (MTP) को अपनाया, जो रेगिस्तान और जंगल दोनों में काम आता है। UK Ministry of Defence की रिपोर्ट में कहा गया कि यह यूनिफॉर्म विभिन्न ऑपरेशनल थिएटर्स के लिए ज्यादा उपयुक्त साबित हुई।
रूस और चीन का दृष्टिकोण
चीन ने People’s Liberation Army (PLA) की यूनिफॉर्म को डिजिटल छलावरण पैटर्न के साथ अपडेट किया है। चीनी रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, यह बदलाव आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर के अनुरूप है।
निष्कर्ष
FAQ
- भारतीय सेना की नई यूनिफॉर्म गाइडलाइन में सबसे बड़ा बदलाव क्या है?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि परेड में रिव्यूइंग ऑफिसर के लिए तलवार रखना अब अनिवार्य नहीं रहा। इसके अलावा स्वदेशी बंदी जैकेट को पहली बार फॉर्मल सिविल ड्रेस में शामिल किया गया है। 'आर्मी यूनिफॉर्म-2026' नाम की 174 पेज की नई बुक में ये सभी नियम दर्ज हैं। - क्या सेना ने तलवार का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया है?
नहीं, तलवार पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अब यह केवल परेड कमांडर, कंटिंजेंट कमांडर और कुछ निर्धारित अधिकारियों तक सीमित कर दी गई है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े समारोहों में इसका इस्तेमाल जारी रहेगा। - बंदी जैकेट क्या होती है और सेना में इसे क्यों शामिल किया गया?
बंदी जैकेट एक बंद गले वाली स्वदेशी भारतीय जैकेट है जो हमारी अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी है। इसे फुल स्लीव शर्ट, फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूतों के साथ पहना जा सकता है। सेना ने इसे औपनिवेशिक दौर की पश्चिमी शैली की जगह भारतीय पहनावे को बढ़ावा देने के लिए शामिल किया है।
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