ट्रेन के एसी कोच में चोरी कर रहे VIP: 1.27 करोड़ के बेडशीट, तौलिया, कंबल गयब
Amresh Kushwaha | Jul 13, 2026, 13:00 IST
ट्रेन के एसी कोच में चोरी कर रहे VIP
भारतीय रेलवे की एसी बोगियों से चार साल में 1.27 करोड़ बेडशीट, तौलिया, कंबल और तकिए चोरी हुए हैं। इससे ठेकेदारों को 104 करोड़ 51 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। जानें कौन सा डिवीजन सबसे ज्यादा प्रभावित है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भारतीय रेलवे की एसी बोगियों से लाखों बेडरोल आइटम चोरी हो रहे हैं।
- चार साल में 1.27 करोड़ बेडशीट, तौलिया और कंबल गायब हुए हैं।
- हर हजार VIP यात्रियों में एक व्यक्ति कोई न कोई सामान ले जाता है।
- इस चोरी से ठेकेदारों को 104.51 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
- यह नुकसान अक्सर कोच अटेंडेंट की सैलरी से वसूला जाता है।
रेलवे के सभी 69 डिवीजन में आरटीआई (Right to Information) आवेदन डाले गए थे। इनमें से 18 में से 16 जोन के 54 डिवीजन से जवाब मिला है। कुछ डिवीजन ने आंशिक जानकारी ही दी। यह डेटा जनवरी 2022 से मई 2026 तक का है। इस दौरान कुल एक करोड़ 27 लाख बेडरोल आइटम चोरी हुए। ज्यादातर चोरी वीआईपी यात्रियों ने ही की है, ऐसा अधिकारियों ने बताया है।
चोरी के आंकड़े साल दर साल बढ़ते गए हैं। साल 2022 से 2025 के बीच इसमें 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हालांकि रेलवे रोज जितना लिनन बांटता है, उसकी तुलना में यह आंकड़ा छोटा है। वहीं, यह आंकड़ा यात्रियों की आदतों की एक झलक जरूर दिखाता है।
तौलिया चोरी में सबसे आगे
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कौन से डिवीजन सबसे ज्यादा प्रभावित
मुंबई डिवीजन में आठ लाख 17 हजार आइटम चोरी दर्ज हुई। जोधपुर में यह आंकड़ा आठ लाख 09 हजार रहा। अहमदाबाद में छह लाख 94 हजार और दानापुर में पांच लाख 72 हजार आइटम चोरी हुए। बीकानेर में सबसे ज्यादा बेडशीट चोरी हुई, जो कुल चोरी का करीब आधा हिस्सा है।
दिल्ली और मुंबई समेत कई डिवीजन में तौलिया चोरी सबसे ज्यादा है। सोनपुर और बिलासपुर में तकिए के कवर सबसे ज्यादा चोरी हुए। जोधपुर में कंबल की चोरी सबसे ज्यादा दर्ज हुई है, जो वहां की कुल चोरी का 42 प्रतिशत है।
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किन डिवीजन में बढ़ी, किसमें घटी चोरी
दूसरी तरफ दिल्ली डिवीजन ने चोरी में सबसे बड़ी कमी दिखाई है। यहां चोरी में 79 प्रतिशत की गिरावट आई है। अहमदाबाद में यह गिरावट 83 प्रतिशत रही। समस्तीपुर डिवीजन में चोरी 86 प्रतिशत तक घट गई है। तिरुचिरापल्ली और पलक्कड़ डिवीजन से कोई चोरी दर्ज नहीं हुई है।
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ठेकेदार और कर्मचारी झेल रहे नुकसान
एक अटेंडेंट ने बताया कि हर महीने उसकी सैलरी से दो से तीन हजार रुपए काट लिए जाते हैं। मार्च और अप्रैल में उसकी ड्यूटी वाली बोगी से 17 बेडशीट, तीन कंबल और नौ तकिए गायब हुए थे। कई अटेंडेंट अब मांगने पर ही तौलिया देते हैं, ताकि नुकसान कम हो सके।
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रेलवे का पक्ष
रेलवे ने चोरी रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सीसीटीवी लगाना, कोच मित्र ऐप से निगरानी और स्टाफ की काउंसलिंग शामिल है। ठेकेदारों के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जा रहा है। भोपाल जैसे कुछ डिवीजन में हर कोच के लिए अलग एसी अटेंडेंट तैनात किया गया है। रेलवे बोर्ड के 2015 के निर्देश के अनुसार यात्रियों को उतरने से 30 मिनट पहले लिनन लौटाना जरूरी है।
आरपीएफ (Railway Protection Force) के मुताबिक लिनन चोरी रेलवे प्रॉपर्टी एक्ट के तहत गैर जमानती अपराध है। इसमें संदिग्ध यात्रियों के सामान की तलाशी ली जा सकती है। हालांकि आरटीआई से मिला डेटा भी पूरी तरह पूर्ण नहीं है। 14 डिवीजन ने सभी श्रेणी का डेटा नहीं दिया है। नौ डिवीजन ने चोरी की कीमत की जानकारी भी नहीं दी। इसका मतलब है कि असली नुकसान अनुमान से भी ज्यादा हो सकता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह रिपोर्ट किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बनाती, बल्कि सिस्टम की खामी दिखाती है। यह गरीब कोच अटेंडेंट की मजबूरी को भी सामने लाती है, जिनकी सैलरी से नुकसान वसूला जाता है। यह जानकारी संविधान में दी गई सूचना के अधिकार और जवाबदेही की भावना के अनुरूप है। पूरी रिपोर्ट तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है, किसी की निजता का उल्लंघन नहीं करती।
FAQ
- भारतीय रेलवे में चार साल में कितना लिनन चोरी हुआ है?
जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच रेलवे की एसी बोगियों से कुल 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम चोरी हुए हैं। इसमें बेडशीट, तौलिया, कंबल, तकिया और तकिए के कवर शामिल हैं। यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस की आरटीआई पड़ताल में सामने आई है। - कौन सा रेलवे डिवीजन सबसे ज्यादा लिनन चोरी से प्रभावित है?
बीकानेर डिवीजन सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां चार साल में 25.76 लाख आइटम चोरी हुए। इसके बाद रांची और दिल्ली डिवीजन का नंबर आता है। बीकानेर में 2022 से 2025 के बीच चोरी करीब चार गुना बढ़ी है। - भारतीय रेलवे में लिनन चोरी का नुकसान कौन उठाता है?
लिनन चोरी का नुकसान सबसे पहले ठेकेदारों की बिलिंग से वसूला जाता है। इसके बाद ठेकेदार यह रकम अक्सर कोच अटेंडेंट की सैलरी से काट लेते हैं। चार साल में यह कुल नुकसान करीब 104.51 करोड़ रुपए आंका गया है।
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