आईआरएस एकता विश्नोई, रिटायरमेंट की उम्र में पावरलिफ्टिंग से जीता गोल्ड मेडल

Anjali Dwivedi | Mar 07, 2026, 18:43 IST
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52 वर्षीय आईआरएस अधिकारी एकता विश्नोई 160 किलो डेडलिफ्ट कर बुढ़ापे को मात दे रही हैं। उन्होंने 45 की उम्र में वेट लिफ्टिंग कर इंटरनेशनल चैंपियन बनीं। आइए जानते हैं उनकी जर्नी के बारें में...

उम्र महज एक आंकड़ा है, इस बात को आईआरएस अधिकारी एकता विश्नोई ने सच कर दिखाया है। एकता आज 52 साल की उम्र में पेशेवर पावरलिफ्टर के रूप में देश का नाम रोशन कर रही हैं। वह 160 किलो का डेडलिफ्ट उठाकर फिटनेस के नए मानक स्थापित कर रही हैं। एकता मानती हैं कि वेट लिफ्टिंग ही बुढ़ापे को रोकने का सबसे कारगर तरीका है।



45 की उम्र में बदली अपनी तकदीर

एकता की दिनचर्या पहले बच्चों को स्कूल भेजने और दफ्तर की भाग-दौड़ तक सीमित थी। सात साल पहले उन्होंने खुद की सेहत को प्राथमिकता देने का कड़ा फैसला लिया। विश्नोई ने 45 साल की उम्र में पहली बार जिम में कदम रखा था। उनके मुताबिक, 40 के बाद महिलाओं के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बहुत जरूरी है। अब वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए कई गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं।



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पसीने से निखरता है असली रूप-रंग

एकता किसी भी मौसम में पार्क के टिन शेड में अपना अभ्यास नहीं छोड़ती हैं। वह 130 किलो स्क्वैट और 72.5 किलो बेंच प्रेस आसानी से कर लेती हैं। उनके लिए वेट ट्रेनिंग ही सबसे बेहतरीन एंटी-एजिंग थैरेपी साबित हुई है। वह कहती हैं कि उन्हें किसी बोटॉक्स या महंगी क्रीम की जरूरत नहीं है। मांसपेशियों की मजबूती से उनका शरीर अब पहले से बेहतर काम करता है।



बीमारियों से कोसों दूर है यह खिलाड़ी

एकता का मानना है कि जिम जाने से उनकी हड्डियां और मांसपेशियां काफी मजबूत हुई हैं। रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौर में भी वह पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करती हैं। उन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेसर जैसी कोई भी गंभीर बीमारी नहीं है। उनके बैच के अधिकांश साथी आज लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं। वहीं एकता की सारी मेडिकल रिपोर्ट आज भी पूरी तरह सामान्य आती हैं।



वजन उठाने से जुड़े मिथकों को तोड़ा

अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि वजन उठाने से वे पुरुषों जैसी दिखने लगेंगी। एकता ने इस पुराने मिथक को सिरे से खारिज कर दिया है। वह कहती हैं कि महिलाओं के शरीर की बनावट पुरुषों से काफी अलग होती है। भारी वजन उठाने के बाद भी उनका स्त्रीत्व और रूप-रंग बरकरार है। वह महिलाओं को तथ्यों पर विश्वास करने और जिम जाने की सलाह देती हैं।



आधी उम्र के एथलीटों को चुनौती

50 साल की उम्र में विश्नोई ने अपनी आधी उम्र की लड़कियों को कड़ी टक्कर दी। उन्होंने 165 किलो डेड लिफ्ट के साथ सिल्वर और समग्र फ्लोरिडा में कांस्य पदक जीता। इन भारी वजन के साथ उन्होंने मास्टर-2 श्रेणी के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए।



इससे पहले भी विश्नोई ने राष्ट्रीय और एशियाई चैंपियनशिप में कई गोल्ड मेडल जीते हैं। उनके इन ऐतिहासिक स्मारकों के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन्हें नॉमिनेटेड किया था। इतना ही नहीं, वह सिर्फ एक एथलीट के रूप में ही नहीं, बल्कि एक प्रशासक के रूप में भी अपनी पहचान बना रही हैं।



एक्सपर्ट क्या कहते हैं

डॉक्टरों के मुताबिक, 40 के बाद हड्डियों का घनत्व (Bone Density) तेजी से घटने लगता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग इस गिरावट को रोकने और शुगर लेवल नियंत्रित करने में मदद करती है। एकता शुरुआती लोगों को हल्के वजन से अभ्यास शुरू करने की सलाह देती हैं। वह कहती हैं कि शुरुआत में किसी अच्छे कोच का मार्गदर्शन जरूर लें। गलत मुद्रा में वजन उठाने से शरीर में चोट लगने का डर रहता है।



महिला दिवस पर महिलाओं को संदेश

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस(Women's Day) के अवसर पर एकता विश्नोई एक मिसाल हैं। वह साबित करती हैं कि महिलाएं हर उम्र में खुद को गढ़ सकती हैं। घर और दफ्तर की दोहरी जिम्मेदारी के बीच खुद को भूलना ठीक नहीं है। एकता के अनुसार, असली महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) शारीरिक और मानसिक मजबूती में छिपा है। एकता 52 की उम्र में उनका जज्बा आज करोड़ों महिलाओं को प्रेरित कर रहा है।



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