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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस. हर दौर में महिलाओं ने सम्मान अर्जित किया है और अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। फिर भी उन्हें अभी बहुत आगे जाना है। 21वीं सदी का यह आधुनिक विश्व भी अभी पूरी तरह तैयार नहीं है कि वह सभी मनुष्यों, विशेषकर महिलाओं को हर क्षेत्र में समान अवसर और समान सम्मान दे सके।
एक महिला का संघर्ष अक्सर उसके जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। गर्भ में रहते हुए ही उसके अस्तित्व को लेकर नकारात्मक सोच उसे घेर लेती है। शायद यही कारण है कि एक लड़की बचपन से ही अधिक सजग और समझदार बन जाती है।
इस दुनिया में कदम रखते ही परिस्थितियां उसे जीवन के हर क्षेत्र में मजबूत बनने के लिए प्रेरित करती हैं...कभी अपनी इच्छा से और कभी परिस्थितियों की मजबूरी से। आज, इस महिला दिवस पर मैं वर्तमान और आने वाली सभी पीढ़ियों की महिलाओं से कहना चाहती हूं कि अपनी कामयाबियों के लिए दूसरों से प्रमाण-पत्र मांगना बंद कीजिए।
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1947 में जब देश को स्वतंत्रता मिली थी तो वह स्वतंत्रता केवल पुरुषों के लिए नहीं थी। फिर आज भी महिलाओं की स्वतंत्रता उनकी पसंद, उनके फैसले क्यों परिवार या समाज के अन्य सदस्यों द्वारा तय किए जाते हैं? अपने अनुभवों के आधार पर मैं कुछ ऐसी बातों को रेखांकित करना चाहती हूं जो महिलाओं और पुरुषों दोनों के व्यक्तिगत विकास में सबसे बड़ी बाधा बनती हैं।
जिज्ञासा और तर्कशीलता विकसित करें
हर चीज को जैसे है, वैसे ही स्वीकार करने के बजाय सवाल पूछें कि ऐसा क्यों है? इसे किसी और तरीके से क्यों नहीं किया जा सकता? यही जिज्ञासा वैज्ञानिक और तार्किक सोच को जन्म देती है, जो विकास की पहली सीढ़ी है।
अपने मानसिक दायरे को मजबूत बनाइए
जब व्यक्ति अपनी मानसिक सीमाओं की रक्षा नहीं कर पाता तो वह छोटी-छोटी और निरर्थक बातों से भी प्रभावित हो जाता है। मजबूत मानसिकता आपको कमजोर बनाने वाली चीजों से बचाती है।
बाहरी सजावट से अधिक अपनी पहचान को महत्व दें
समाज ने लंबे समय तक महिलाओं को केवल सुंदरता और सजावट तक सीमित करने की कोशिश की है। सौंदर्य और बुद्धिमत्ता का मेल जैसी बातें भी कई बार महिलाओं को केवल बाहरी रूप तक सीमित कर देती हैं। जबकि इतिहास में कई महान वैज्ञानिक खोजों के पीछे महिलाओं का योगदान रहा है। हमें यह समझना होगा कि हमारा असली मूल्य केवल बाहरी रूप नहीं, बल्कि हमारी सोच, प्रतिभा और व्यक्तित्व है।
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आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के साथ सक्रिय भी बनें
आज कई महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, फिर भी निवेश और आर्थिक निर्णयों में उनकी सक्रियता कम दिखाई देती है। आर्थिक जागरूकता और आत्मनिर्भरता महिलाओं को घरेलू हिंसा और शोषण से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कानूनी अधिकारों का उपयोग करें
कानून महिलाओं को संपत्ति में अधिकार देता है, लेकिन कई बार समाज में उसका सही तरीके से पालन नहीं होता। यदि इन अधिकारों को ईमानदारी से लागू किया जाए, तो दहेज जैसी कई समस्याओं को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अपनी क्षमता पर विश्वास करें
एक महिला मां बनने की प्रक्रिया में गर्भधारण के क्षण से ही जिम्मेदारी उठाने लगती है, फिर भी उसे अक्सर यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह कमजोर है या अपने निर्णय खुद नहीं ले सकती। यह सोच बदलने की आवश्यकता है।
अपनी कहानी स्वयं लिखें
महिलाओं के बारे में लिखी गई अधिकांश किताबें और शोध पुरुषों द्वारा लिखे गए हैं। इसलिए जरूरी है कि महिलाएँ स्वयं अपने अनुभवों, विचारों और जीवन की कहानियाँ लिखें।
अपने अधिकार मांगना नहीं, उन्हें अपनाना सीखें
अधिकार केवल मांगने से नहीं मिलते, बल्कि उन्हें समझकर और आत्मविश्वास के साथ अपनाने से मिलते हैं। अपने भीतर विश्वास जगाइए। आप उतनी ही सक्षम और शक्तिशाली हैं, जितना आपने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा।
एक-दूसरे के लिए भरोसे का आधार बनें
हर महिला को दूसरी महिलाओं के लिए भरोसे और प्रेरणा का स्रोत बनना चाहिए, ताकि वे बिना किसी संकोच के एक-दूसरे का सहारा बन सकें। अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें। अपनी सीमाएं तय करें, अपने निर्णय स्वयं लें और उनके परिणामों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करें। खुद को स्वीकार करें, खुद के प्रति दयालु रहें और अपने अस्तित्व का सम्मान करें।
समस्या के समाधान तक चर्चा जरूरी
महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा केवल महिलाओं के बीच ही करने के बजाय, उन लोगों के साथ भी करनी चाहिए जहां से समस्याएं उत्पन्न होती हैं, अर्थात् व्यापक रूप से पुरुषों के साथ। अक्सर देखा जाता है कि महिलाओं से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा सिर्फ महिलाओं के बीच ही होती है, जिससे समस्या का वास्तविक समाधान नहीं निकल पाता।
वास्तव में, महिलाओं की समस्याएं या उनके सामने आने वाली बाधाएं केवल महिलाओं की ही नहीं, बल्कि पुरुषों की भी समस्याएं हैं। जब घर से ही अत्यधिक कठोर या एकतरफा पुरुषवादी व्यवहार शुरू होता है, तो यह बच्चों, चाहे वे लड़के हों या लड़कियां दोनों के समग्र विकास में बाधा बनता है। हम अक्सर समस्याओं की जड़ तक जाने के बजाय केवल उनके ऊपर-ऊपर ही बात करते रहते हैं, जिसके कारण वही समस्याएं बार-बार पैदा होती रहती हैं।
व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि हमारे आसपास मौजूद कई समस्याएं उन लोगों के कारण पैदा होती हैं जो स्वयं गलत या अधूरी परवरिश (अच्छे पालन-पोषण की कमी) का परिणाम होते हैं। इसलिए यदि हमें समाज को बेहतर बनाना है, तो हमें समस्याओं के मूल कारण...अर्थात् सही सोच और सही परवरिश पर ध्यान देना होगा।
अंत में, मैं सभी महिलाओं से यही कहना चाहूंगी कि खुद की प्रशंसा करना सीखिए, खुद को पहचानिए और अपने सर्वश्रेष्ठ रूप को सामने लाइए। जीवन में उस बाज (ईगल) की तरह बनिए, जो बारिश से बचने के लिए आश्रय नहीं खोजता, बल्कि बादलों से भी ऊंचा उड़ जाता है।
इस महिला दिवस पर यही संकल्प लें कि अपनी शक्ति को पहचानें, अपने अधिकारों को अपनाएँ और अपनी उड़ान को कभी सीमित न होने दें।
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