संसद में उठेगा बड़ा सवाल: जस्टिस यशवंत वर्मा रिपोर्ट मानसून सत्र में होगी पेश
समझें क्या है पूरा मामला...
- मानसून सत्र में पेश होगी वर्मा की जांच रिपोर्ट।
- इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा जस्टिस वर्मा विवाद।
- ओम बिरला बोले, रिपोर्ट सत्र में रखी जाएगी।
- हटाने का प्रस्ताव अब भी अटका, कानूनी पेच बरकरार।
- जले नोटों वाले मामले में अब संसद लेगी फैसला।
जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में पेश की जाएगी। यह जानकारी उन्होंने पश्चिम बंगाल के विधायकों के एक कार्यक्रम में दी।
तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट
ओम बिरला के मुताबिक जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली समिति ने उन्हें रिपोर्ट सौंप दी है। यह समिति जस्टिस वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही थी। रिपोर्ट पेश होने के बाद आगे का फैसला सदन खुद करेगा।
पहले दिन ही पेश हो सकती है रिपोर्ट
माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट सत्र के पहले ही दिन सदन में रखी जा सकती है। ओम बिरला ने यह भी बताया कि सत्ताधारी दल और विपक्ष, दोनों के सांसदों ने वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे।
इस्तीफे के बाद भी उलझा है मामला
जस्टिस वर्मा ने इस साल अप्रैल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। लेकिन उन्हें हटाने का प्रस्ताव अब भी कानूनी तौर पर अस्पष्ट स्थिति में अटका है। हैरानी की बात यह है कि इस्तीफे के बावजूद उनका नाम इलाहाबाद हाईकोर्ट के पोर्टल पर कार्यरत जजों की सूची में बना हुआ है।
जांच समिति ने काम नहीं रोका
सूत्रों के मुताबिक इस्तीफे के बावजूद जांच समिति ने अपना काम पूरा किया। समिति ने अपनी जांच के नतीजे ओम बिरला को सौंप दिए। एक सूत्र ने बताया कि यह कानूनी तौर पर अभी भी अस्पष्ट स्थिति बनी हुई है।
आग में मिली थी बड़ी रकम
यह पूरा मामला पिछले साल मार्च में उस समय सामने आया था, जब जस्टिस वर्मा के बंगले में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे इमरजेंसी रिस्पॉन्स अधिकारियों को आउटहाउस में जले हुए करेंसी नोटों के बंडल मिले थे। उस समय वे दिल्ली हाईकोर्ट में जज थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे गए थे वर्मा
घटना सामने आने के बाद जस्टिस वर्मा को उनके मूल हाईकोर्ट, यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया था। उनके खिलाफ प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस के राहुल गांधी समेत बीजेपी के रवि शंकर प्रसाद और अनुराग ठाकुर जैसे 146 से ज्यादा सांसद शामिल थे।
वर्मा ने खुद को बताया बेगुनाह
तत्कालीन सीजेआई (CJI – Chief Justice of India) संजीव खन्ना की इन-हाउस जांच समिति और बाद में ओम बिरला की समिति के सामने वर्मा ने खुद को बेगुनाह बताया था। उनका कहना था कि उन्हें कोई जानकारी नहीं थी कि उनके घर पर इतनी बड़ी रकम कैसे पहुंची।
अब सबकी नजर मानसून सत्र पर टिकी है। रिपोर्ट पेश होने के बाद यह साफ होगा कि संसद इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है।
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