पेट में कैंची भूल गए डॉक्टर, पांच साल के दर्द झेलने के बाद एक्स-रे ने खोला राज

Anjali Dwivedi | Feb 20, 2026, 19:07 IST
Photograph: (THESOOTR)
केरल के वंदनम मेडिकल कॉलेज में 2021 में सर्जरी हुई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने महिला के पेट में कैंची छोड़ दी। 5 साल दर्द सहने के बाद जब एक्स-रे किया गया, तब इसका खुलासा हुआ।

केरल के अलाप्पुझा से चिकित्सा लापरवाही का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पुन्नपराकी रहने वाली उषा जोसेफ नाम की महिला के पेट में सर्जरी के दौरान डॉक्टर कैंची भूल गए। यह लापरवाही इतनी गंभीर थी कि राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज को खुद इस मामले में दखल देना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें इस पूरे प्रकरण पर ऑफिसियल स्टेटमेंट जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा।



कब हुई थी यह घटना

यह घटना 5 मई 2021 को शुरू हुई। जब उषा जोसेफ ने अलाप्पुझा के वंदनम मेडिकल कॉलेज में गर्भाशय के ट्यूमर को हटवाने के लिए ऑपरेशन करवाया था। सर्जरी तो सफल रही, लेकिन उसके बाद से ही उषा के जीवन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्हें पेट में लगातार तेज और असहनीय दर्द रहने लगा। डॉक्टरों ने इसे सामान्य जटिलता बताकर दवाइयां दीं, जिन्हें उषा सालों तक खाती रहीं, पर दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा था।



सालों तक दर्द सहने के बाद हाल ही में उषा का एक्स-रे परीक्षण कराया गया। एक्स-रे रिपोर्ट सामने आने के बाद सबके होश उड़ गए। एक्स-रे इमेज में महिला के पेट के भीतर एक सर्जिकल कैंची (डॉक्टरों की लापरवाही) साफ नजर आ रही थी। इतने सालों से वह कैंची उनके शरीर के आंतरिक अंगों के बीच धंसी हुई थी। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।



महिला के पेट में थी कैंची- India TV Hindi


20 साल पुरानी सर्जरी का दिया तर्क

इस मामले में सर्जरी से जुड़ी डॉ. ललिताम्बिका ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने उषा का वह ऑपरेशन नहीं किया था। उनका तर्क है कि महिला ने करीब 20 साल पहले भी कुछ सर्जरी कराई थीं, मुमकिन है कि यह कैंची उसी समय शरीर में रह गई हो। डॉक्टर ने इसे व्यक्तिगत चूक के बजाय व्यवस्थागत खामी बताया और खुद को बेकसूर बताया।



किडनी स्टोन बताकर टाला गया दर्द

वहीं, उषा जोसेफ का पक्ष बिल्कुल अलग और मजबूत है। उनका कहना है कि 2021 वाली सर्जरी के अलावा उन्होंने जीवन में कभी कोई दूसरा ऑपरेशन नहीं कराया। उषा ने आरोप लगाया कि जब भी वे दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल गईं, डॉक्टरों ने उसे किडनी स्टोन बताकर टाल दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि एक डॉक्टर ने मामले को दबाने की कोशिश की और उन्हें घटना सार्वजनिक न करने की सलाह दी थी।



एक्सपर्ट टीम करेगी जांच

स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने शुक्रवार को इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार इसे अत्यंत गंभीरता से ले रही है। मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट उन्हें मिल चुकी है। मंत्री ने एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है, जो इस बात की बारीकी से जांच करेगा कि इतने सालों तक यह उपकरण शरीर में रहा और किसी को पता क्यों नहीं चला।



ये खबरें भी पढ़ें...



AI समिट में यूथ कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन, शर्ट उतारकर किया विरोध



शादी के कार्ड पर नाम को लेकर विवाद, तीन लोगों की हत्या, व्हाट्सऐप स्टेटस पर दी थी धमकी



सदियों पुरानी परंपरा पर उठे सवाल, बांके बिहारी मंदिर में दो गुटों में बहस, जानें जगमोहन विवाद?



नाबालिग छात्रा ने टीचर के बुरे व्यवहार की दास्तान सुनाई, परिवार के उड़े होश



Tags:
  • स्वास्थ्य विभाग
  • डॉक्टरों की लापरवाही
  • मेडिकल कॉलेज
  • लापरवाही
  • केरल