केरलम के स्कूलों में लिपस्टिक-फ्री कैंपस अभियान शुरू, जानें वजह

Anjali Dwivedi | Jun 17, 2026, 18:30 IST
लिपस्टिक-फ्री कैंपस अभियान
केरलम सरकार ने स्कूलों में कॉस्मेटिक उत्पादों पर रोक लगा दी है। लिपस्टिक, आईलाइनर में पारा और कैडमियम जैसी भारी धातुएं मिलीं है। कोल्लम से शुरू अभियान अब पूरे राज्य में फैलेगा।

केरल सरकार ने स्कूलों में कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल रोकने के लिए अभियान शुरू किया है। कोल्लम जिले के एक स्कूल से इसकी शुरुआत हुई है। कई कॉस्मेटिक उत्पादों में पारा और कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं पाई गई हैं। ये धातुएं बच्चों के शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। माता-पिता के लिए भी जागरूकता कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।



कैंसर के मामलों ने बजाई खतरे की घंटी

तिरुवनंतपुरम स्थित रीजनल कैंसर सेंटर ने कोल्लम, पन्नाकुलम और कोझिकोड जिलों में बच्चों के बीच आंत के कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की थी। यह आंकड़ा चिंता का बड़ा कारण बना। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की। पता चला कि कई बच्चे छुट्टियों के दौरान लिपस्टिक और मेकअप का सामान घर से स्कूल लाकर इस्तेमाल कर रहे थे।



लिपस्टिक-फ्री कैंपस की पहल

कोल्लम जिला बाल कल्याण समिति ने कोल्लम की मल्लपुरा हायर सेकंडरी स्कूल को पहला लिपस्टिक-फ्री कैंपस घोषित किया। मंत्री कैरी कुरेशिया श्रीकुमार ने इसका उद्घाटन किया। इस अभियान के तहत जिन स्कूलों में जागरूकता फैलाई जाएगी, उन्हें लिपस्टिक-फ्री कैंपस का दर्जा दिया जाएगा। धीरे-धीरे यह अभियान पूरे केरल के स्कूलों में फैलाया जाएगा।



किन उत्पादों में है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लिपस्टिक, आईलाइनर, ब्लशर और फेस क्रीम जैसे उत्पादों में पारा और कैडमियम जैसी भारी धातुएं पाई जाती हैं। ये धातुएं त्वचा के जरिए शरीर के अंदर जा सकती हैं।



एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों की त्वचा वयस्कों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। इससे ये जहरीले पदार्थ बच्चों के शरीर में जल्दी अवशोषित हो जाते हैं।



हार्मोन पर भी असर

इन उत्पादों का खतरा सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक इनमें मौजूद भारी धातुओं के अधिक संपर्क से हार्मोनल असंतुलन भी हो सकता है। यह लंबे समय में बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकता है। कम उम्र में इन उत्पादों का नियमित इस्तेमाल बच्चों को इन दुष्प्रभावों के प्रति और ज्यादा संवेदनशील बना देता है।



अभिभावकों के लिए भी कक्षाएं

अभियान में सिर्फ बच्चे ही नहीं, उनके माता-पिता भी शामिल होंगे। उनके लिए विशेष जागरूकता कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। कोल्लम जिला बाल कल्याण समिति के सचिव डॉ. शाइन देव ने बताया कि राज्य आयोग पहले ही इस रिपोर्ट को सौंप चुका है। आसपास के दुकानों की जांच कराई जाएगी। अभियान को पूरे राज्य में लागू करने की सिफारिश की गई है।



छात्रों की निगरानी से मिला सुराग

स्टूडेंट्स की गतिविधियों पर नजर रखने पर पता चला कि कई बच्चे छुट्टियों में लिपस्टिक और मेकअप का सामान घर से लाकर स्कूल में इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बाद विभाग ने यह अभियान तेज किया। स्कूल प्रशासन और शिक्षकों को भी इस बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है।



FAQ

  1. केरल में स्कूलों में कॉस्मेटिक बैन क्यों लगाया गया?
    केरल के कुछ जिलों में बच्चों में आंत के कैंसर के मामले बढ़ने के बाद जांच हुई। पता चला कि लिपस्टिक और मेकअप उत्पादों में पारा और कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं हैं। इन्हें रोकने के लिए स्कूलों में लिपस्टिक-फ्री कैंपस अभियान शुरू किया गया।
  2. लिपस्टिक-फ्री कैंपस अभियान क्या है?
    यह केरल सरकार का एक जागरूकता अभियान है जिसमें स्कूलों में कॉस्मेटिक उत्पादों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा रही है। कोल्लम जिले के स्कूल से इसकी शुरुआत हुई है। धीरे-धीरे यह अभियान पूरे केरल के स्कूलों में लागू किया जाएगा।
  3. बच्चों पर कॉस्मेटिक उत्पादों का क्या असर पड़ता है?
    बच्चों की त्वचा वयस्कों की तुलना में पतली और ज्यादा संवेदनशील होती है। इससे लिपस्टिक और आईलाइनर में मौजूद भारी धातुएं जल्दी शरीर में अवशोषित हो जाती हैं। इससे हार्मोनल असंतुलन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

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