महानगरों में सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर भारी वसूली, फंसे 1.26 लाख करोड़ रुपए
समझें क्या है पूरा मामला
- देश के टॉप 6 महानगरों में किराएदारों के 1.26 लाख करोड़ रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट में फंसे हैं।
- मुंबई में सबसे ज्यादा 41 हजार 156 करोड़ रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा हैं।
- पिछले एक साल में औसत रूम रेंट करीब 10% बढ़ा है।
- बेंगलुरू में 75% किराएदारों को ज्यादा डिपॉजिट के कारण पसंद का घर नहीं मिल पाया।
- जेन-Z किराएदार सबसे तेजी से घर बदल रहे हैं।
देश के बड़े शहरों में किराए पर रहना अब आसान नहीं रहा। हर महीने का किराया तो एक बोझ है ही, सिक्योरिटी डिपॉजिट भी अब बड़ी चिंता बन गया है। मकान खाली करने पर यह रकम वापस मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
रियल एस्टेट कंसल्टिंग प्लेटफॉर्म नोबरोकर की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के छह बड़े महानगरों में किराएदारों के करीब 1.26 लाख करोड़ रुपए मकान मालिकों के पास सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा हैं। इनमें मुंबई, बेंगलुरू, दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे शामिल हैं।
किस शहर में कितना फंसा पैसा
मुंबई इस मामले में सबसे आगे है। यहां किराएदारों के 41 हजार 156 करोड़ रुपए मकान मालिकों के पास जमा हैं। बेंगलुरू दूसरे नंबर पर है, यहां यह आंकड़ा 31 हजार 628 करोड़ रुपए है।
दिल्ली में 24 हजार 054 करोड़ रुपए, चेन्नई में 17 हजार 346 करोड़ रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में फंसे हैं। हैदराबाद में यह राशि 6 हजार 843 करोड़ रुपए और पुणे में 5 हजार करोड़ रुपए है।
बेंगलुरू में सबसे बड़ी शिकायत
बेंगलुरू में हालात कुछ ज्यादा ही मुश्किल हैं। यहां 75% किराएदारों ने कहा कि ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगे जाने की वजह से उन्हें पसंद का घर नहीं मिला। यह आंकड़ा देश के सभी महानगरों में सबसे अधिक है।
दिल्ली-एनसीआर में स्थिति थोड़ी बेहतर है। यहां करीब 58% किराएदारों को लीज खत्म होने के बाद पूरा डिपॉजिट वापस मिल गया। लेकिन करीब 30% किराएदारों की रकम में कुछ कटौती की गई। वहीं 12% किराएदारों को इस मुद्दे पर गंभीर विवाद का सामना करना पड़ा।
जेन-जेड बार-बार बदलते घर
इस रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात भी सामने आई। 18 से 24 साल के युवा किराएदार बाकी उम्र वर्गों के मुकाबले करीब डेढ़ गुना ज्यादा घर बदलते हैं। इनमें से 30% किराएदार हर 6 से 12 महीने में घर बदल लेते हैं।
25 से 35 साल की उम्र वालों में सिर्फ 10% ही इतनी जल्दी घर बदलते हैं। 35 से 54 साल की उम्र में भी यही आंकड़ा 10% के आसपास है। वहीं 55 साल से ज्यादा उम्र के 62% किराएदार तीन साल या उससे ज्यादा समय तक एक ही घर में रहते हैं।
किराया बना सबसे बड़ा खर्च
शहरों में रहने वाले ज्यादातर किराएदारों के मासिक बजट में किराया ही सबसे बड़ा खर्च है। करीब आधे किराएदार अपनी आय का 30% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ किराए पर खर्च कर देते हैं। हालांकि यह बोझ हर शहर में अलग-अलग है।
मुंबई में यह समस्या सबसे गंभीर है। यहां 25% किराएदार अपनी आय का आधे से ज्यादा हिस्सा किराए में देते हैं। 15% किराएदार आय का 41% से 50% तक किराए पर खर्च करते हैं। यानी मुंबई में करीब 4 में से 10 किराएदार आय का 40% से ज्यादा सिर्फ मकान पर खर्च कर रहे हैं।
घर खरीदने की लागत लगातार बढ़ रही है। इस वजह से भी कई लोग लंबे समय तक किराए पर रहने को मजबूर हैं। 30 साल के होम लोन की ईएमआई (EMI – Equated Monthly Installment) भी ज्यादातर शहरों में मौजूदा रूम रेंट से कहीं ज्यादा है।
छोटे फ्लैट में निवेशकों को फायदा
इस रिपोर्ट में निवेश के नजरिए से भी एक अहम बात सामने आई। 1बीएचके (BHK – Bedroom Hall Kitchen) और स्टूडियो अपार्टमेंट निवेशकों को बड़े फ्लैटों के मुकाबले ज्यादा रेंटल यील्ड दे रहे हैं। इनकी यील्ड करीब 4.8% है।
वहीं बड़े 4बीएचके मकानों में किराए से मिलने वाला रिटर्न 3% से भी कम है। यही वजह है कि कई निवेशक अब छोटे फ्लैट खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
एक साल में कितना बढ़ा किराया
पिछले एक साल में देश के टॉप 6 शहरों में औसत रूम रेंट करीब 10% बढ़ा है। सेविल्स इंडिया के मुताबिक मुंबई में किराया 2% से 12% तक बढ़ा है। बेंगलुरू में यह बढ़ोतरी 5% से 14% तक रही।
दिल्ली-एनसीआर में किराया 8% से 12% तक बढ़ा है। पुणे में यह बढ़ोतरी 5% से 8% और चेन्नई में 4% से 7% के बीच रही। कुल मिलाकर महानगरों में करीब 50% लोगों की आय का 30% से ज्यादा हिस्सा अब सिर्फ रूम रेंट में जा रहा है।
किराएदारों के लिए आगे क्या
बढ़ते किराए और फंसे डिपॉजिट की वजह से किराएदारों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं। जानकार मानते हैं कि इस मुद्दे पर स्पष्ट नियम बनाना जरूरी है। इससे किराएदार और मकान मालिक, दोनों के हितों की रक्षा हो सकेगी। तब तक किराएदारों को एग्रीमेंट की शर्तें ध्यान से पढ़ना ही सबसे बड़ा बचाव है।
FAQ
- देश में किराएदारों का कितना पैसा सिक्योरिटी डिपॉजिट में फंसा है?
देश के 6 बड़े महानगरों में किराएदारों के करीब 1.26 लाख करोड़ रुपए मकान मालिकों के पास सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा हैं। इसमें मुंबई की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। यह आंकड़ा नोबरोकर की रिपोर्ट पर आधारित है। - किस शहर में सबसे ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट फंसा है?
मुंबई में सबसे ज्यादा 41,156 करोड़ रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट फंसा है। इसके बाद बेंगलुरू का नंबर आता है, जहां यह रकम 31,628 करोड़ रुपए है। - पिछले एक साल में महानगरों में किराया कितना बढ़ा?
टॉप 6 शहरों में औसत रूम रेंट करीब 10% बढ़ा है। बेंगलुरू में सबसे ज्यादा 5% से 14% तक बढ़ोतरी दर्ज हुई। मुंबई में यह बढ़ोतरी 2% से 12% के बीच रही।
ये भी पढ़ें...
रेलवे का बड़ा तोहफा: इन यात्रियों को किराए में 75% तक की छूट, ऐसे करें अप्लाई
इंडिया में किसी मकान में किराए से 12 या 50 साल रहो, वो मकान किराएदार का नहीं...
एमपी में बढ़ेगा जल संकट? ज्यादा बारिश होने के बाद भी घट जाएगा नदियों का पानी!
आज एमपी को बड़ा रेलवे का तोहफा, एमपी के 13 रेलवे स्टेशनों का होगा रीडेवलपमेंट