भारत में सत्ता बदलने की कोशिश कौन कर रहा? देश के आंदोलनों को लेकर मोहन भागवत की तीखी टिप्पणी

Sandeep Kumar | Oct 20, 2026, 19:39 IST
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बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात पर मोहन भागवत का बड़ा बयान
बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात पर मोहन भागवत का बड़ा बयान

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। संघ स्थापना दिवस पर उन्होंने शस्त्र पूजन किया। इसके बाद कहा कि कुछ ताकतें सत्ता बदलकर अपने पिट्ठू बैठाना चाहती हैं। भागवत ने कहा कि आंदोलनों का मकसद समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने समाज में एकता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

भारत में बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की कोशिश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को अहम दावा किया। उनके मुताबिक भारत में बांग्लादेश जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने फ्रांस जैसे हालात का भी जिक्र किया। भागवत नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि दुनिया में कुछ शक्तियां भारत को दबाना चाहती हैं। उनका मकसद सत्ता बदलकर हालात सुधारना नहीं है। वे सत्ता परिवर्तन करके अपने पिट्ठू बैठाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को तोड़ना चाहते हैं। ऐसे लोगों को कुछ नेताओं का भी समर्थन मिलता है।

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By Aman Vaishnav
नागपुर में विजयादशमी के मौके पर RSS के 100 साल पूरे होने पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा गया है। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भाषण दिया। उन्होंने युवाओं में बढ़ते नशे को देश की बड़ी समस्या बताया और माता-पिता से बच्चों को अच्छे संस्कार देने की अपील की। साथ ही उन्होंने समाज की भलाई के लिए OTT प्लेटफॉर्म्स पर जरूरी नियम बनाने की मांग भी उठाई।
नागपुर में विजयादशमी के मौके पर RSS के 100 साल पूरे होने पर बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा गया है। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भाषण दिया। उन्होंने युवाओं में बढ़ते नशे को देश की बड़ी समस्या बताया और माता-पिता से बच्चों को अच्छे संस्कार देने की अपील की। साथ ही उन्होंने समाज की भलाई के लिए OTT प्लेटफॉर्म्स पर जरूरी नियम बनाने की मांग भी उठाई।

आंदोलन का मकसद समाधान हो

आंदोलन का असली मकसद क्या होना चाहिए? मोहन भागवत ने अपने संबोधन में इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि समस्याओं के कारण आंदोलन होते हैं। उनका उद्देश्य समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए। समाज में द्वेष और विभाजन पैदा करना आंदोलनों का मकसद नहीं होना चाहिए। कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जाता है। ऐसे में आंदोलन राजनीति का साधन बन जाते हैं। भागवत के मुताबिक समाज को केवल नेता नहीं चलाते। समाज की सक्रिय भागीदारी से भी समस्याओं का समाधान होता है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने पर आज मंगलवार, 20 अक्टूबर को नागपुर के रेशिमबाग मैदान में शताब्दी समापन कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। वहीं, संघ प्रमुख मोहन भागवत देश के अहम मुद्दों और युवाओं से जुड़े विषयों पर अपनी बात रख सकते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने पर आज मंगलवार, 20 अक्टूबर को नागपुर के रेशिमबाग मैदान में शताब्दी समापन कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। वहीं, संघ प्रमुख मोहन भागवत देश के अहम मुद्दों और युवाओं से जुड़े विषयों पर अपनी बात रख सकते हैं।

एकता और पूर्वजों पर भागवत का संदेश

मोहन भागवत ने लॉर्ड कर्जन के बंगाल विभाजन का उदाहरण दिया। कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया था। चार साल बाद इस फैसले को वापस ले लिया गया।

बंगाल का विभाजन पलटा, फिर 1947 में देश का विभाजन क्यों नहीं रुका? भागवत के मुताबिक इसका जवाब लोगों की सोच में छिपा था। लोगों के मन में अलगाव की भावना घर कर चुकी थी। अलग दिखने वाले लोगों को अलग मानने की सोच बन गई थी। भागवत ने कहा कि ऐसी शक्तियों के प्रभाव में आकर उत्तेजित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक एकता बनाए रखने से कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

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BHOPAL. संघ प्रमुख मोहन भागवत 6 अक्टूबर को बालाघाट के कारंजा पहुंचेंगे। मोहन भागवत कारंजा दौरा देवरस स्मृति भवन के लोकार्पण का है। यहां बालासाहेब देवरस नेत्रालय भी शुरू होगा, जिसका संचालन माधव नेत्रालय से जुड़े तंत्र के जरिए बताया गया है। आयोजकों के अनुसार इसका मकसद ग्रामीण मरीजों तक आंखों का इलाज पहुंचाना है। डॉक्टरों और ऑपरेशन की व्यवस्था की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं है।
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सबके पूर्वज एक, साथ चलना जरूरी

"हम सभी के पूर्वज एक हैं और हमारी संस्कृति का मूल भी एक है।"
By: – मोहन भागवत, प्रमुख, आरएसएस
भागवत के मुताबिक अलग पहचान मिटाए बिना सबको साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय विचारों में दुनिया की समस्याएं सुलझाने की क्षमता है।

विकास हो, प्रकृति का नुकसान न हो

भागवत ने नेपाल में आई बाढ़ का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि विकास के लिए तकनीक को प्रोत्साहन देना जरूरी है। इसके साथ प्रकृति की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए।

भागवत ने तीन प्रमुख बातों पर जोर दिया। इनमें इकोनॉमी (अर्थव्यवस्था), इकोलॉजी (पर्यावरण) और एथिक्स (नैतिकता) शामिल हैं। उन्होंने विकास के दौरान इन तीनों के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही।

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भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में सीएम यूथ कॉन्क्लेव 2026 कार्यक्रम आज (6 अक्टूबर) है। इस दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव 20 हजार युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में युवाओं को जॉब, स्किल और स्टार्टअप की जानकारी दी जाएगी। इस इवेंट का खास फोकस AI, ड्रोन और EV जैसे क्षेत्रों पर होगा।
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विजयादशमी पर शस्त्र पूजन

कार्यक्रम में मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया। संघ स्थापना दिवस हर साल विजयादशमी पर मनाया जाता है। संघ विजयादशमी (RSS Vijayadashami) का यह आयोजन संघ की स्थापना की याद दिलाता है। आरएसएस की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी।

श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में आंदोलन

श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश के आंदोलन सत्ता परिवर्तन के उदाहरण हैं। इन तीनों देशों में अलग-अलग कारणों से सत्ता बदली।

श्रीलंका में 2022 का अरागलया आंदोलन

श्रीलंका में 2022 के दौरान गंभीर आर्थिक संकट पैदा हुआ। देश में ईंधन, भोजन और दवाइयों की कमी होने लगी। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हुए।

इस आंदोलन को अरागलया नाम दिया गया। 9 जुलाई 2022 को प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति आवास में घुस गए। इसके बाद गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर चले गए।

उन्होंने 14 जुलाई 2022 को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में संसद ने रानिल विक्रमसिंघे को राष्ट्रपति चुना। इस सत्ता परिवर्तन के पीछे आर्थिक संकट और महंगाई प्रमुख कारण थे। जरूरी वस्तुओं की कमी और जनआक्रोश भी इसकी वजह बने।

नेपाल में 2008 तक कैसे बदली सत्ता?

नेपाल में सत्ता परिवर्तन कई चरणों में हुआ। साल 2006 में देश में बड़ा जनआंदोलन हुआ। इस आंदोलन के बाद राजा ज्ञानेंद्र की प्रत्यक्ष सत्ता खत्म हुई। इसके बाद राजनीतिक दलों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की दिशा में कदम उठाए।

28 मई 2008 को संविधान सभा ने राजशाही समाप्त कर दी। इसके साथ ही नेपाल गणराज्य बन गया। बाद के वर्षों में गठबंधन टूटने के कारण सरकारें बदलती रहीं। लोकतंत्र की मांग और राजनीतिक अस्थिरता इसके प्रमुख कारण रहे।

बांग्लादेश में प्रदर्शन के बाद बदली सरकार

बांग्लादेश में 2024 के दौरान सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दौरान हिंसा हुई और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। धीरे-धीरे छात्र आंदोलन सरकार विरोधी प्रदर्शन में बदल गया।

5 अगस्त 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना पद से हट गईं। इसके बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत चली गईं। 8 अगस्त 2024 को नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। इस सत्ता परिवर्तन के पीछे आरक्षण विरोधी छात्र आंदोलन प्रमुख कारण था। सरकारी कार्रवाई, हिंसा और जनअसंतोष भी इसके कारण रहे।
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