राहुल गांधी की सराकर से बड़ी मांग, बोले- पीएम मोदी छात्रों से माफी मांगें
समझें क्या है पूरा मामला
- राहुल गांधी ने बुधवार शाम इंदिरा भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
- उन्होंने कथित पुलिस बर्बरता का एक वीडियो दिखाया।
- राहुल ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और पीएम से माफी मांगी।
- इससे एक दिन पहले पीएम आवास के बाहर बड़ा प्रदर्शन हुआ था।
- पीएम मोदी ने पेपर लीक को घोर पाप बताया था।
बुधवार शाम दिल्ली के इंदिरा भवन में सियासी हलचल तेज रही। कांग्रेस नेता राहुल गांधी वहां प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे। इसकी शुरुआत में उन्होंने एक वीडियो दिखाया। यह वीडियो कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ा हुआ था। राहुल गांधी ने दावा किया कि छात्रों को बेरहमी से पीटा गया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने कोई अपराध नहीं किया था। उनके मुताबिक छात्र सिर्फ शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। छात्र सिर्फ शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहते थे। यह पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नीट पेपर लीक विवाद पर केंद्रित रही।
राहुल की तीन मांगें
इसके बाद राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन मांगें रखीं।
पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की थी। उन्होंने कहा कि यह मांग पूरी तरह जायज है।
दूसरी मांग लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की थी।
तीसरी मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की थी। राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
परिवारों पर बोझ का आरोप लगाया
राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं में व्यवस्था के प्रति गुस्सा है। उनके मुताबिक सरकार अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट देने वाले परिवार भारी रकम खर्च करते हैं। उनके मुताबिक यह रकम करीब 1.32 लाख करोड़ रुपए है। जबकि देश का शिक्षा बजट करीब 1.40 लाख करोड़ रुपए है। राहुल गांधी ने इसे परिवारों से हो रही लूट बताया। उन्होंने कहा कि छात्र पहले से भारी तनाव में रहते हैं। उनके मुताबिक कई छात्र इस दबाव में अपनी जान भी गंवा चुके हैं। राहुल गांधी ने एक दावा भी किया। उनके मुताबिक पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हो चुके हैं। उनके मुताबिक इससे करीब 7.5 करोड़ परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली है।
पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे थे विपक्षी नेता
राहुल गांधी की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अचानक नहीं हुई। इससे एक दिन पहले मंगलवार को बड़ा धरनाप्रदर्शन हुआ था। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे। साथ में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद रहे। यह पूरा प्रदर्शन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ। धरने से पहले राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। उन्होंने संसद में नीट पेपर लीक पर चर्चा कराने की मांग रखी थी। यह प्रदर्शन जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़ा था। एक दिन पहले वहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान पत्थरबाजी की घटना भी सामने आई थी। राहुल और प्रियंका गांधी आरएमएल अस्पताल गए। वहां उन्होंने पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों से मुलाकात की। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की आवाज दबाई नहीं जानी चाहिए।
हिरासत में रहे राहुल, प्रियंका, अखिलेश
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह भी लोक कल्याण मार्ग पहुंचे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बातचीत की। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान पुलिस ने राहुल गांधी को हिरासत में भी लिया। कांग्रेस के कई अन्य नेता भी हिरासत में लिए गए बताए गए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल से हिरासत को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी चिंता नहीं है। उन्होंने बताया कि हिरासत के दौरान उनके मुंह से खून निकला था। फिर भी उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी परवाह नहीं है। उनके मुताबिक ध्यान सिर्फ छात्रों के मुद्दे पर रहना चाहिए। राहुल गांधी ने जितेंद्र सिंह के बयान को अप्रासंगिक भी बताया।
मोदी ने पेपर लीक को बताया घोर पाप
इस पूरे विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बात एनडीए संसदीय दल की बैठक में कही गई। उन्होंने नीट पेपर लीक को घोर पाप बताया। पीएम मोदी ने कहा कि मामला सामने आते ही सरकार ने कार्रवाई की। उनके मुताबिक इस मामले में 13 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सभी आरोपियों को जेल भी भेजा जा चुका है। पीएम मोदी ने दोषियों को सख्त सजा देने की अपील भी की। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस पर अपनी बात रखी। रिजिजू ने कहा कि छात्रों का भविष्य बचाने के लिए दोबारा परीक्षा कराई गई। उनके मुताबिक परीक्षा के नतीजों में भी कोई देरी नहीं हुई।
देशभर में हुआ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन
इस प्रदर्शन का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र में भी कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी हुई। नागपुर और वर्धा में विदर्भ के कई नेता हिरासत में लिए गए। इनमें भंडारा गोंदिया के सांसद प्रशांत पडोले शामिल बताए गए हैं। रामटेक के सांसद श्याम बर्वे का नाम भी सामने आया है। इसके अलावा एनएसयूआई (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के कई पदाधिकारी भी शामिल थे। कांग्रेस का कहना है कि यह कार्रवाई असंवैधानिक तरीके से हुई। पार्टी ने कहा कि सरकार विरोध की आवाज को दबाना चाहती है।
आगे क्या होगा
नीट पेपर लीक का मुद्दा अब संसद तक पहुंच चुका है। मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार इस पर चर्चा की मांग कर रहा है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने भी संसद में यह मुद्दा उठाया। कांग्रेस पहले ही साफ कर चुकी है कि वह पीछे नहीं हटेगी। पार्टी का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर सरकार अपनी कार्रवाई को पर्याप्त बता रही है। आने वाले दिनों में संसद में इस पर और हंगामा हो सकता है। छात्र संगठन भी जंतर मंतर पर प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार आगे क्या रुख अपनाती है।
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