अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार 2026: रॉबर्ट हॉल और माइकल वुडफोर्ड को मिला सम्मान, जानें क्यों चुने गए दोनों अर्थशास्त्री
Sumit Kumar | Oct 12, 2026, 17:21 IST
अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार 2026 रॉबर्ट ई. हॉल (टाई पहने) और माइकल वुडफोर्ड (सफेद शर्ट में) को मिला है।
Nobel Prize in Economics 2026: अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार 2026 के विजेताओं की घोषणा सोमवार को की गई। अमेरिकी अर्थशास्त्री रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड को यह सम्मान संयुक्त रूप से मिला है। दोनों ने अर्थव्यवस्था में आने वाले उतार-चढ़ाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण शोध किया है। इनके शोध से सरकारों और केंद्रीय बैंकों को आर्थिक नीतियां बनाने में मदद मिली है।
क्यों मिला दोनों अर्थशास्त्रियों को नोबेल?
इसका मतलब अर्थव्यवस्था में आने वाली तेजी और मंदी को समझना और नियंत्रित करना है। दोनों ने बताया कि लोगों के खर्च करने से अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है। कंपनियों के निवेश और उत्पादन से जुड़े फैसले भी देश की आर्थिक स्थिति बदलते हैं।
BREAKING NEWSThe Royal Swedish Academy of Sciences has decided to award the 2026 Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel to Robert E. Hall and Michael Woodford “for microeconomic foundations of macroeconomic stabilisation.”#NobelPrize https://t.co/2i7ktB1Q2b
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 12, 2026
आर्थिक संकट से निपटने में कैसे मिलेगी मदद?
ऐसे हालात में सरकारों और केंद्रीय बैंकों को आर्थिक फैसले लेने पड़ते हैं। रॉबर्ट हॉल और माइकल वुडफोर्ड के शोध से इन फैसलों का असर समझने में मदद मिलती है।
इससे आर्थिक संकट के दौरान सही नीतियां बनाने का मजबूत आधार मिलता है।
नोबेल समिति ने दोनों के शोध पर क्या कहा?
दुनिया भर की सरकारें और केंद्रीय बैंक ऐसे आर्थिक मॉडल का इस्तेमाल करते हैं। इनकी मदद से आर्थिक संकट और अचानक आने वाले बदलावों को समझा जा सकता है।
नोबेल समिति के मुताबिक दोनों अर्थशास्त्रियों ने आर्थिक उतार-चढ़ाव कम करने में योगदान दिया है। इनके शोध से ऊर्जा संकट जैसी परिस्थितियों का सामना करने में भी मदद मिलती है।
कौन हैं रॉबर्ट हॉल और माइकल वुडफोर्ड?
माइकल वुडफोर्ड (Michael Woodford) अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आर्थिक नीतियों और अर्थव्यवस्था की स्थिरता से जुड़े विषयों पर शोध किया है।
पुरस्कार (Economics Nobel Prize) की घोषणा के बाद वुडफोर्ड ने न्यूयॉर्क से नोबेल समिति से फोन पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मिलना उनके लिए एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर है।
आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है यह रिसर्च?
ब्याज दरें बढ़ने से होम लोन और दूसरे कर्ज भी महंगे हो सकते हैं। वहीं आर्थिक मंदी आने पर कंपनियों का कारोबार और लोगों की नौकरियां प्रभावित होती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में सरकार और केंद्रीय बैंक कई तरह की आर्थिक नीतियां बनाते हैं। इन नीतियों के संभावित असर को समझने में दोनों अर्थशास्त्रियों का शोध मददगार है।
अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की शुरुआत कब हुई?
अल्फ्रेड नोबेल ने डायनामाइट का आविष्कार किया था और मूल पांच नोबेल पुरस्कार स्थापित किए थे। इनमें चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र शामिल किए गए थे।
अर्थशास्त्र का पुरस्कार शुरुआत में घोषित मूल पांच नोबेल पुरस्कारों का हिस्सा नहीं था। इसके बावजूद इसे हर साल बाकी नोबेल पुरस्कारों के साथ ही प्रदान किया जाता है।
दोनों विजेताओं को कितनी पुरस्कार राशि मिलेगी?
हर साल नोबेल पुरस्कार वितरण समारोह 10 दिसंबर को आयोजित किया जाता है। इसी तारीख को साल 1896 में अल्फ्रेड नोबेल का निधन हुआ था।
पिछले साल किन अर्थशास्त्रियों को मिला था नोबेल?
उनके शोध में बताया गया था कि नई तकनीक आर्थिक विकास को कैसे बढ़ावा देती है। नए उत्पाद और आविष्कार लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार आर्थिक स्थिरता से जुड़े शोध के लिए दिया गया है।
इससे पहले चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के पुरस्कार घोषित हो चुके हैं। अर्थशास्त्र के पुरस्कार के साथ ही साल 2026 की नोबेल घोषणाएं पूरी हो गई हैं।
MP पुलिस के दो अधिकारियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी, DSP रेणु मुराव और TI नीरज वर्मा UN पुलिस मिशन में देंगे सेवाएं
By Anshika Singh Chauhan
छग के वोट चोरी की शिकायत पर हाईकोर्ट सख्त, आदेश को दबाकर बैठा है स्वास्थ्य विभाग, सचिव के खिलाफ अवमानना की तैयारी
By VINAY VERMA
बांसवाड़ा में 40 हजार की रिश्वत लेते होमगार्ड ड्राइवर गिरफ्तार, CJM कोर्ट का रीडर भी पकड़ा गया
By Ashish Bhardwaj
एमपी में 235 पुलिस इंस्पेक्टर रैंक के प्रमोशन की तैयारी, पीएचक्यू ने मांगी विभागीय जांच, नोटिस, चालान की जानकारी
By Sanjay Gupta
छत्तीसगढ़ की राजनीति में धर्म का तड़का, संतों की शरण में बीजेपी सरकार,चुनाव से पहले राम का काम
By Arun Tiwari
जोधपुर नगर निगम का 21 लाख का टेंडर निरस्त, जांच के बाद आयुक्त राहुल जैन ने लिया फैसला
By Jyoti Mahender Bhardwaj
NEET UG Counselling: छत्तीसगढ़ में MBBS की 206 और BDS की 225 सीटें खाली, चूके तो जब्त होगी सिक्योरिटी राशि
By Umeshwari Baghel