Alfred Nobel Biography: कैसे एक धमाके ने दुनिया को दिया सबसे बड़ा नोबेल पुरस्कार
Kaushiki | Jul 14, 2026, 08:00 IST
Alfred Nobel Biography
स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने डायनामाइट का आविष्कार किया था। एक अखबार की गलती ने उन्हें अपनी छवि बदलने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कारों के लिए दान कर दी।
Alfred Nobel Biography: क्या आपने कभी दुनिया के सबसे बड़े पुरस्कार के बारे में सुना है? हम बात कर रहे हैं नोबेल प्राइज की। ये पुरस्कार हर साल दुनिया के महान लोगों को मिलता है। लेकिन क्या आप इसके पीछे की पूरी कहानी जानते हैं?
यह कहानी स्वीडन के एक Famous scientist Alfred Nobel की है। उन्होंने एक ऐसा आविष्कार किया जिससे पूरी दुनिया कांप उठी थी। उन्होंने पहाड़ों को पल भर में उड़ाने वाला डायनामाइट बनाया था।
लेकिन बाद में उनका नाम शांति के प्रतीक के रूप में अमर हो गया। एक विनाशकारी खोज करने वाला इंसान शांति का मसीहा कैसे बन गया? यह कहानी बहुत ही दिलचस्प और सबक देने वाली है। आइए जानें अल्फ्रेड नोबेल के जीवन का पूरा सच।
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अल्फ्रेड नोबेल का जन्म 21 अक्टूबर 1833 को स्टॉकहोम में हुआ था। उनके पिता इमैनुएल नोबेल भी एक बेहतरीन इंजीनियर और आविष्कारक थे। अल्फ्रेड का बचपन बहुत ही तंगी और मुश्किलों में बीता था। उनका परिवार बाद में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में शिफ्ट हो गया था।
वहां उनके पिता ने हथियारों और बारूद का एक कारखाना खोला। अल्फ्रेड को बचपन से ही रसायनों के साथ खेलना पसंद था। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही केमिस्ट्री की गहरी समझ हासिल कर ली थी। वह भाषाओं को सीखने में भी बहुत तेज छात्र थे।
![डायनामाइट बनाने वाले 'पागल वैज्ञानिक' के नाम पर शुरू हुआ था नोबेल पुरस्कार - History Of Nobel Prize And Alfred Nobel Who Invention Dynamite - Amar Ujala Hindi News Live]()
उस जमाने में लिक्विड बारूद यानी नाइट्रोग्लिसरीन का इस्तेमाल होता था। यह लिक्विड बहुत ही खतरनाक और पूरी तरह से अस्थिर होता था। जरा सा झटका लगते ही इसमें भयंकर विस्फोट हो जाता था। साल 1864 में अल्फ्रेड की फैक्ट्री में एक बड़ा हादसा हुआ।
इस धमाके में उनके छोटे भाई की जान चली गई थी। इस घटना ने अल्फ्रेड को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। सरकार ने इस खतरनाक लिक्विड पर पूरी तरह बैन लगा दिया था। लेकिन अल्फ्रेड ने हार नहीं मानी और रिसर्च जारी रखी।
![Alfred Nobel:जानिए कौन थे डायनामाइट का आविष्कार करने वाले अल्फ्रेड नोबेल? जिनके नाम पर शुरू हुआ नोबल पुरस्कार - Alfred Nobel: Who Was Dynamite Was Invented Alfred Nobel ...]()
अल्फ्रेड एक सुरक्षित विस्फोटक बनाना चाहते थे जो आसानी से न फटे। उन्होंने नाइट्रोग्लिसरीन को एक खास मिट्टी के साथ मिलाकर देखा। यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा और एक पेस्ट बन गया। इस पेस्ट को छड़ों के रूप में आसानी से ढाला जा सकता था।
साल 1867 में उन्होंने इसे डायनामाइट का नाम देकर पेटेंट कराया। इसके बाद तो पूरी दुनिया में डायनामाइट की मांग बढ़ गई थी। इसका यूज सुरंगों, सड़कों और रेलवे लाइनों को बनाने में होने लगा। इस एक आविष्कार ने अल्फ्रेड नोबेल को बेहद अमीर बना दिया।
![मौत का वो सौदागर जिसने दुनिया को दिया तबाही लाने वाला डायनामाइट, फिर जीवन भर क्यों पछताया?]()
साल 1888 में अल्फ्रेड के जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। उस समय उनके बड़े भाई लुडविग का फ्रांस में निधन हो गया। लेकिन एक फ्रांसीसी अखबार ने गलती से अल्फ्रेड को मृत समझ लिया। अखबार ने हेडलाइन छापी कि मौत का सौदागर अब मर चुका है।
अखबार ने लिखा कि उन्होंने लोगों को मारने का तरीका ढूंढा। जब अल्फ्रेड ने सुबह यह खबर पढ़ी तो वह सन्न रह गए। उन्हें यह सोचकर बहुत दुख हुआ कि दुनिया उन्हें ऐसे याद रखेगी। उन्होंने तुरंत अपनी छवि को बदलने का एक बड़ा फैसला किया।
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अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी मौत से पहले एक गुप्त वसीयत लिखी थी। उन्होंने 27 नवंबर 1895 को इस पर अपने हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने अपनी वसीयत में किसी रिश्तेदार को संपत्ति नहीं दी थी। उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का 94 प्रतिशत हिस्सा एक फंड को दिया।
उन्होंने लिखा कि इस पैसे से हर साल पुरस्कार दिए जाएं। यह पुरस्कार उन लोगों को मिले जिन्होंने मानवता की भलाई की हो। यह वसीयत जब उनकी मौत के बाद पढ़ी गई तो सब हैरान थे। उनके परिवार के लोग इस फैसले से काफी नाराज भी हुए थे।
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अल्फ्रेड नोबेल का निधन 10 दिसंबर 1896 को इटली में हुआ था। उनकी मौत के बाद नोबेल फाउंडेशन की स्थापना की गई थी। उनके पैसे को सुरक्षित रखकर उसके ब्याज से इनाम तय हुआ। साल 1901 में पहली बार नोबेल पुरस्कार दिए गए थे।
यह पुरस्कार शुरुआत में पांच अलग-अलग क्षेत्रों में दिए जाते थे। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, लिटरेचर और पीस यानी शांति शामिल थे। बाद में साल 1968 में इसमें इकोनॉमिक्स को भी जोड़ा गया था। आज यह दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित सम्मान बन चुका है।
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अल्फ्रेड नोबेल चाहते थे कि दुनिया में हमेशा शांति बनी रहे। इसलिए उन्होंने शांति पुरस्कार को अपनी वसीयत में खास जगह दी। यह पुरस्कार ओस्लो, नॉर्वे में एक भव्य समारोह में दिया जाता है। बाकी सभी नोबेल पुरस्कार स्टॉकहोम, स्वीडन में दिए जाते हैं।
शांति पुरस्कार उन लोगों को मिलता है जो युद्ध रोकने का काम करते हैं। इसके विजेता को एक स्वर्ण पदक और बड़ी नकद राशि मिलती है। अल्फ्रेड का यह सपना आज भी दुनिया को बेहतर बनाने में जुटा है। उनका नाम अब विनाश के लिए नहीं बल्कि विकास के लिए जाना जाता है।
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अल्फ्रेड नोबेल की यह पूरी कहानी हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है। कोई भी इंसान अपने अतीत को पूरी तरह से बदल सकता है। उन्होंने अपनी गलती को समझा और दुनिया के भले के लिए काम किया। आज उनके पास 355 से ज्यादा पेटेंट थे, लेकिन पहचान पुरस्कार से मिली।
वह एक महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ संवेदनशील इंसान भी थे। उनका जीवन सिखाता है कि धन का सही उपयोग समाज की भलाई में है। आज भी जब नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होती है, दुनिया उन्हें नमन करती है।
सोर्स क्रेडिट:
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 14 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 14 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
01 जुलाई का इतिहास: क्यों मनाया जाता है National Doctors Day
24 मई का इतिहास: आज ही के दिन हुआ था इतिहास की सबसे ताकतवर महारानी विक्टोरिया का जन्म
यह कहानी स्वीडन के एक Famous scientist Alfred Nobel की है। उन्होंने एक ऐसा आविष्कार किया जिससे पूरी दुनिया कांप उठी थी। उन्होंने पहाड़ों को पल भर में उड़ाने वाला डायनामाइट बनाया था।
लेकिन बाद में उनका नाम शांति के प्रतीक के रूप में अमर हो गया। एक विनाशकारी खोज करने वाला इंसान शांति का मसीहा कैसे बन गया? यह कहानी बहुत ही दिलचस्प और सबक देने वाली है। आइए जानें अल्फ्रेड नोबेल के जीवन का पूरा सच।
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बचपन से ही था विज्ञान के प्रति गहरा लगाव
वहां उनके पिता ने हथियारों और बारूद का एक कारखाना खोला। अल्फ्रेड को बचपन से ही रसायनों के साथ खेलना पसंद था। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही केमिस्ट्री की गहरी समझ हासिल कर ली थी। वह भाषाओं को सीखने में भी बहुत तेज छात्र थे।
डायनामाइट बनाने वाले 'पागल वैज्ञानिक' के नाम पर शुरू हुआ था नोबेल पुरस्कार - History Of Nobel Prize And Alfred Nobel Who Invention Dynamite - Amar Ujala Hindi News Live
नाइट्रोग्लिसरीन से भाई की मौत
इस धमाके में उनके छोटे भाई की जान चली गई थी। इस घटना ने अल्फ्रेड को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। सरकार ने इस खतरनाक लिक्विड पर पूरी तरह बैन लगा दिया था। लेकिन अल्फ्रेड ने हार नहीं मानी और रिसर्च जारी रखी।
Alfred Nobel:जानिए कौन थे डायनामाइट का आविष्कार करने वाले अल्फ्रेड नोबेल? जिनके नाम पर शुरू हुआ नोबल पुरस्कार - Alfred Nobel: Who Was Dynamite Was Invented Alfred Nobel ...
डायनामाइट का आविष्कार
साल 1867 में उन्होंने इसे डायनामाइट का नाम देकर पेटेंट कराया। इसके बाद तो पूरी दुनिया में डायनामाइट की मांग बढ़ गई थी। इसका यूज सुरंगों, सड़कों और रेलवे लाइनों को बनाने में होने लगा। इस एक आविष्कार ने अल्फ्रेड नोबेल को बेहद अमीर बना दिया।
मौत का वो सौदागर जिसने दुनिया को दिया तबाही लाने वाला डायनामाइट, फिर जीवन भर क्यों पछताया?
एक गलत खबर ने बदली अल्फ्रेड की सोच
अखबार ने लिखा कि उन्होंने लोगों को मारने का तरीका ढूंढा। जब अल्फ्रेड ने सुबह यह खबर पढ़ी तो वह सन्न रह गए। उन्हें यह सोचकर बहुत दुख हुआ कि दुनिया उन्हें ऐसे याद रखेगी। उन्होंने तुरंत अपनी छवि को बदलने का एक बड़ा फैसला किया।
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वसीयतनामा जिसने दुनिया को चौंका दिया
उन्होंने लिखा कि इस पैसे से हर साल पुरस्कार दिए जाएं। यह पुरस्कार उन लोगों को मिले जिन्होंने मानवता की भलाई की हो। यह वसीयत जब उनकी मौत के बाद पढ़ी गई तो सब हैरान थे। उनके परिवार के लोग इस फैसले से काफी नाराज भी हुए थे।
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नोबेल फाउंडेशन की स्थापना
यह पुरस्कार शुरुआत में पांच अलग-अलग क्षेत्रों में दिए जाते थे। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, लिटरेचर और पीस यानी शांति शामिल थे। बाद में साल 1968 में इसमें इकोनॉमिक्स को भी जोड़ा गया था। आज यह दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित सम्मान बन चुका है।
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शांति पुरस्कार की अहमियत
शांति पुरस्कार उन लोगों को मिलता है जो युद्ध रोकने का काम करते हैं। इसके विजेता को एक स्वर्ण पदक और बड़ी नकद राशि मिलती है। अल्फ्रेड का यह सपना आज भी दुनिया को बेहतर बनाने में जुटा है। उनका नाम अब विनाश के लिए नहीं बल्कि विकास के लिए जाना जाता है।
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अल्फ्रेड नोबेल के जीवन से मिलने वाला बड़ा सबक
वह एक महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ संवेदनशील इंसान भी थे। उनका जीवन सिखाता है कि धन का सही उपयोग समाज की भलाई में है। आज भी जब नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होती है, दुनिया उन्हें नमन करती है।
सोर्स क्रेडिट:
- Nobel Prize की आधिकारिक वेबसाइट और अल्फ्रेड नोबेल (Who was Alfred Nobel) का वसीयतनामा (https://www.nobelprize.org/)
- अल्फ्रेड नोबेल कौन थे,स्वीडिश इंस्टीट्यूट का आधिकारिक इतिहास और विज्ञान अनुभाग (https://si.se/)
14 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 14 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1996: संयुक्त राज्य अमेरिका ने पाकिस्तान को ब्राउन संशोधन के नियमों के अंतर्गत पहली बार हथियार भेजने प्रारम्भ किये।
- 1999: मेकरी मोरीटा को पापुआ न्यू गिनी देश का नया और आधिकारिक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था।
- 2003: रूस की मशहूर एथलीट येलेना इसिनबायेवा ने महिला पोल वाल्ट खेल स्पर्धा में नया विश्व रिकार्ड बनाया।
- 2007: फ़िलिस्तीन के तत्कालीन कार्यवाहक प्रधानमंत्री सलम फ़याद ने अचानक अपने मुख्य पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।
- 2008: नेपाल की कार्यकारी संसद ने प्रधानमंत्री के निर्वाचन से जुड़े नए संविधान संशोधन विधेयक को पूरी मंजूरी दी।
- 2008: वेनेजुएला देश की खूबसूरत मॉडल डायना मेंडोजा ने इस वर्ष का प्रतिष्ठित मिस यूनिवर्स का ख़िताब जीता था।
- 2008: विश्व की सबसे बुजुर्ग इंटरनेट ब्लॉगर के रूप में सबसे ज्यादा चर्चित आस्ट्रेलियाई महिला का आज ही निधन हुआ।
- इतिहास फैक्ट: स्वीडन के महान वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल ने आज ही के दिन पहली बार डाइनामाइट से धमाके किए थे, जिनके नाम पर आज दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाता है।
- 1929: भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता तथा मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री कैलाश चंद्र जोशी का जन्म हुआ था।
- 1920: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और देश के जाने-माने नेता शंकरराव चह्वाण का जन्म हुआ था।
- 1971: मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन से भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा लोकसभा सांसद अनिल फिरोजिया का जन्म हुआ था।
- 1902: देश के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री चन्द्रभानु गुप्त का जन्म हुआ था।
- 1909: देश के प्रसिद्ध कम्युनिस्ट नेताओं में से एक और केरल राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री ई. एम. एस. नमबूद्रिपद का जन्म हुआ था।
- 1900: देश के प्रसिद्ध राष्ट्र भक्त, महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर पत्रकार देशबंधु गुप्त का जन्म हुआ था।
- 1856: समाज सुधार की दिशा में काम करने वाले देश के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल गणेश आगरकर का जन्म हुआ था।
- 1942: देश की राजनीति से जुड़े सक्रिय सदस्य और नौवीं लोकसभा के सम्मानित सदस्य के. कालीमुत्तु का जन्म हुआ था।
- 2008: भारत देश के भूतपूर्व और बेहद सम्मानित 16वें मुख्य न्यायाधीश वाई. वी. चंद्रचूड़ का आज ही निधन हुआ था।
- 2003: भारतीय सिनेमा के पुराने सुनहरे दौर की प्रसिद्ध और बेहद लोकप्रिय हिन्दी फ़िल्म अभिनेत्री लीला चिटनिस का निधन हुआ था।
- 1982: चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा योगदान देने वाले जाने-माने भारतीय चिकित्सा विज्ञानी रमन विश्वनाथन का निधन हुआ था।
- 1975: हिन्दी फ़िल्मों के 1950, 1960 और 1970 के दशक के सबसे प्रसिद्ध बॉलीवुड फ़िल्म संगीत निर्देशक मदन मोहन का निधन हुआ था।
- 1896: हिन्दी साहित्य के इतिहास से गहराई से जुड़े देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार राजा लक्ष्मण सिंह का निधन हुआ था।
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
01 जुलाई का इतिहास: क्यों मनाया जाता है National Doctors Day
24 मई का इतिहास: आज ही के दिन हुआ था इतिहास की सबसे ताकतवर महारानी विक्टोरिया का जन्म
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